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Israel-Iran War: नेतन्याहू की ‘करो या मरो’ की हुंकार, समंदर में पहुंचा अमेरिका का ‘काल’,ईरान को ललकार!

Israel iran war: इजराइल-ईरान के बीच महायुद्ध का खतरा गहरा गया है, क्योंकि पीएम नेतन्याहू ने निर्णायक जंग के संकेत दे दिए हैं। इस तनाव के बीच अमेरिका ने इजराइल की सुरक्षा के लिए अपना सबसे विनाशक एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात कर दिया है, जिससे मध्य पूर्व में हलचल तेज हो गई है।

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भारत

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MI Zahir

Feb 16, 2026

Israel-Iran War

इजराइल और ईरान के बीच एक और युद्ध छिड़ सकता है। (फोटो: पत्रिका ग्राफिक्स)

Middle East : मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव अपने चरम पर है। इजराइल और ईरान के बीच चल रही तनातनी (Israel Iran Conflict) अब एक निर्णायक मोड़ पर आ गई है। जहां एक तरफ इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने तेहरान के खिलाफ अपने तेवर बेहद सख्त कर लिए हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने भी अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए अपना विशालकाय एयरक्राफ्ट कैरियर (US Aircraft Carrier) क्षेत्र में भेज दिया है। फरवरी 2026 की ये घटनाएं भू-राजनीति में बड़ा भूचाल ला रही हैं। इजराइल के पीएम नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उसके द्वारा समर्थित प्रॉक्सी गुट अब इजराइल के अस्तित्व के लिए खतरा बन चुके हैं। नेतन्याहू के हालिया बयानों से संकेत मिलता है कि इजराइल अब केवल रक्षात्मक मुद्रा में नहीं रहेगा, बल्कि वह ईरान के भीतर महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने की योजना बना रहा है। उनका कहना है कि कूटनीति का समय अब समाप्त हो चुका है और अब कार्रवाई करने का वक्त है।

समंदर में अमेरिका की किलेबंदी ( US Aircraft Carrier Strike Group )

इस तनाव के बीच सबसे बड़ी खबर अमेरिकी नौसेना की गतिविधियां हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका का एक परमाणु क्षमता वाला एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप फारस की खाड़ी या भूमध्य सागर के करीब पहुंच रहा है। यह तैनाती ईरान के लिए एक खुली चेतावनी है। इस जंगी बेड़े के साथ डिस्ट्रॉयर्स और फाइटर जेट्स का पूरा काफिला है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि अगर ईरान कोई जवाबी कार्रवाई करता है, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

ट्रंप और नेतन्याहू: एक राह, दो मंजिलें

राजनीतिक गलियारों में एक दिलचस्प समीकरण देखने को मिल रहा है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति और वर्तमान परिदृश्य में अहम भूमिका निभा रहे डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू ईरान पर 'अधिकतम दबाव' (Maximum Pressure) बनाने पर तो सहमत हैं, लेकिन 'एंडगेम' (अंतिम परिणाम) को लेकर दोनों में मतभेद हो सकते हैं। जहाँ नेतन्याहू ईरान में पूर्ण सत्ता परिवर्तन या सैन्य समाधान की ओर देख रहे हैं, वहीं अमेरिकी पक्ष इसे एक सीमित दायरे में रखकर केवल ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को कुचलना चाहता है ताकि क्षेत्र में एक लंबी और खर्चीली जंग न छिड़ जाए। अमेरिका चाहता है कि दबाव इतना हो कि ईरान घुटने टेक दे, लेकिन नेतन्याहू समस्या को जड़ से खत्म करना चाहते हैं।

ईरान का पलटवार : युद्ध अर्थव्यवस्था तबाह कर सकता है

इस सैन्य जमावड़े पर तेहरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी धरती पर कोई हमला हुआ, तो पूरा क्षेत्र आग की लपटों में घिर जाएगा। ईरान ने कहा है कि अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर उनके लिए 'तैरते हुए लोहे के लक्ष्य' से ज्यादा कुछ नहीं हैं। वहीं, खाड़ी देशों (Gulf Countries) ने भी संयम बरतने की अपील की है, क्योंकि किसी भी तरह का युद्ध उनकी अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकता है।

लेबनान, सीरिया और यमन के मोर्चे भी एक साथ खुल सकते

आने वाले 48 से 72 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। दुनिया भर की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इजराइल, अमेरिकी समर्थन के साथ ईरान के परमाणु संयंत्रों पर एयरस्ट्राइक करेगा? खुफिया एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। अगर कूटनीतिक बातचीत के पिछले दरवाजे पूरी तरह बंद हो गए, तो यह संघर्ष सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें लेबनान, सीरिया और यमन के मोर्चे भी एक साथ खुल सकते हैं।

तेल की कीमतों में आग : वैश्विक बाजार सहम गया

बहरहाल,इस युद्ध की आहट मात्र से वैश्विक बाजार सहम गया है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल प्राप्त करता है, ब्लॉक होता है या वहां संघर्ष होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ेगा, जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें और महंगाई बेकाबू हो सकती है। यह केवल सैन्य जंग नहीं, बल्कि एक आर्थिक युद्ध का भी संकेत है।