29 मई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भारत, May 12, 2026

ऐतिहासिक फैसला: 3 साल पहले 300 लोगों को पकड़ा था, उन्हें सजा देने के लिए इजराइल ने बना दिया खतरनाक कानून

Israel special military tribunal: इजराइल ने 7 अक्टूबर 2023 के हमले के आरोपियों के लिए खास सैन्य अदालत बना दी। 93-0 से कानून पास हुआ है, इसमें नरसंहार पर मौत की सजा का प्रावधान है।

Benjamin Netanyahu

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू। (इमेज सोर्स: ANI)

इजराइल की संसद ने सोमवार को एक ऐसा कानून पास कर दिया, जिससे 7 अक्टूबर 2023 के भयानक हमले के आरोपियों को अब जल्द ही खतरनाक सजा मिल सकेगी।

इस कानून के तहत खास सैन्य अदालत बनाई जाएगी, जहां लगभग 300 पकड़े गए फिलिस्तीनियों पर मुकदमा चलेगा। ये सभी लोग एक साथ 7 अक्टूबर के हमले के बाद पकड़े गए थे।

दुश्मनों को अब मौत की सजा मिल सकती है

नया कानून इजराइल की सैन्य न्याय व्यवस्था में एक विशेष अदालत गठन करने की इजाजत देता है। इसमें 7 अक्टूबर के हमले में शामिल हमास और दूसरे गुटों के आतंकियों पर मुकदमा चलेगा।

आरोपों में नरसंहार (जेनोसाइड), इजराइल की संप्रभुता को नुकसान पहुंचाना, युद्ध छेड़ना और आतंकवाद शामिल हैं। नरसंहार का दोषी पाए जाने वाले को मौत की सजा तक हो सकती है। इस कानून को धार्मिक जियोनिज्म के सिम्चा रोथमैन और विपक्ष की यूलिया मालिनोवस्की ने मिलकर पेश किया।

93-0 से पास हुआ बिल

संसद में बिल 93 वोटों से पास हुआ, किसी ने विरोध नहीं किया। यह इजराइल की राजनीति में चुनाव से ठीक पहले देखने को मिली बड़ी एकता है। न्याय मंत्री यारिव लेविन ने इसे 'वर्तमान संसद का सबसे महत्वपूर्ण पल' बताया।

उन्होंने कहा कि असहमति के बावजूद देश इस वक्त सही काम कर रहा है। रोथमैन ने इसे 'ऐतिहासिक कदम' करार दिया और कहा कि यह कानून राज्य के इतिहास के सबसे बड़े नरसंहार के दोषियों को सजा दिलाएगा।

7 अक्टूबर को क्या हुआ था?

7 अक्टूबर 2023 को हमास और फिलिस्तीन से जुड़े 5000-6000 आतंकियों ने जमीन, समुद्र और हवा के रास्ते इजराइल पर हमला बोला। करीब 1200 लोग मारे गए, 251 लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया।

हमलावरों पर यातना, बलात्कार और अन्य जघन्य अपराधों के आरोप हैं। अब तक पकड़े गए लगभग 300 आतंकियों को इस नई अदालत में ट्रायल होगा। कानून में साफ लिखा है कि इन आतंकियों को किसी भी भविष्य के कैदी आदान-प्रदान समझौते में रिहा नहीं किया जाएगा।

अदालत कैसे काम करेगी?

यह अदालत सार्वजनिक होगी। पूरी कार्यवाही ऑनलाइन वेबसाइट पर लाइव प्रसारित की जाएगी। 15 जजों की बेंच होगी जिसमें सुप्रीम कोर्ट लेवल के जज और विदेश मंत्री की सलाह से चुने गए अंतरराष्ट्रीय जुरिस्ट भी शामिल हो सकते हैं।

कमेंट्स

कोई कमेंट नहीं है।

पहले कमेंट करने वाले बनें।

कृपया पक्का करें कि आपका कमेंट हमारे नियमों एवं शर्तों के मुताबिक हो।
ट्रेंडिंग वीडियो

संबंधित खबरें