
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Photo-X)
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या पर कूटनीतिक विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि खामेनेई की हत्या का नतीजा अमेरिका और इजरायल के अनुसार शासन परिवर्तन शायद वैसा न हो जैसा वे कह रहे हैं। यह घटनाक्रम वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। खामेनेई की मौत अमेरिका और इजरायल के हमले में हुई। यह ईरान के 46 साल के शिया-धर्मशासित इस्लामिक शासन में एक अहम मोड़ था। तेहरान की जवाबी कार्रवाई से मध्य पूर्व के बड़े हिस्से में तनाव और संघर्ष की स्थिति पैदा हो गई है।
बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सिकरी ने स्थिति को गंभीर और आर्थिक रूप से अस्थिर करने वाला बताया। सिकरी ने कहा कि यह तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब कथित तौर पर डिप्लोमैटिक कोशिशें चल रही थीं। उन्होंने कहा कि यह बहुत गंभीर स्थिति है और दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है। हमने देखा है कि दुबई एयरपोर्ट भी बंद कर दिया गया है। दुबई की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद हो गया है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी उथल-पुथल है।
उन्होंने कहा कि यह हमला उस समय हुआ है जब ओमान ने अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में वार्ता की मध्यस्थता की थी। शुरुआती प्रतिक्रिया थी कि वार्ता अच्छी प्रगति कर रही थी और ईरान कई रियायतों पर सहमत हो गया था। अब ऐसा लगता है कि वे वार्ताएं मात्र एक दिखावा थीं और इजरायल ईरान पर हमला करने के लिए दृढ़ था। मेरा मानना है कि इजरायल ने पहले कदम उठाया, जिसके बाद इसमें अमेरिका भी शामिल हो गया।
पूर्व राजनयिक केपी फैबियन ने इस अभियान को वॉशिंगटन और तेल अवीव के लिए महत्वपूर्ण सैन्य सफलता बताया, लेकिन सवाल उठाया कि क्या इससे ईरान में राजनीतिक परिवर्तन होगा। उन्होंने कहा IANS से बातचीत के दौरान कहा कि यह इजरायल और अमेरिका के लिए एक बड़ी सैन्य जीत है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे जिसे शासन परिवर्तन कहते हैं, उसके करीब पहुंच गए हैं, क्योंकि इस शब्द को लेकर बहुत असमंजस है।
फैबियन ने यह भी संकेत दिया कि यह हमला विस्तृत खुफिया जानकारी के आधार पर किया गया था। इजरायल के पास संभवतः मानव और इलेक्ट्रॉनिक दोनों प्रकार की खुफिया जानकारी थी और वे उस घर को ध्वस्त करने में सक्षम रहे जहां अयातुल्ला, उनकी बेटी, दामाद और पोती मौजूद थे।
पूर्व राजनयिक महेश कुमार सचदेव ने आईएएनएस से बातचीत में खामेनेई के लंबे कार्यकाल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरानी नेता ने अपने दशकों के शासनकाल में व्यावहारिक लेकिन वैचारिक रूप से दृढ़ नीति अपनाई। 36 वर्षों तक खामेनेई ने यथार्थवाद और धार्मिक सर्वोच्चता की नीति अपनाई, विभिन्न धाराओं के बीच संतुलन बनाए रखा।
सचदेव ने कहा कि उन्होंने देश और उसकी इस्लामी क्रांति को एकजुट रखने की कोशिश की। साथ ही उन्होंने वार्ता, प्रॉक्सी के प्रोत्साहन, पड़ोसी देशों और आंतरिक समीकरणों, धर्मगुरुओं, राजनीतिक अभिजात वर्ग, आर्थिक शक्तियों और न्यायपालिका के बीच चतुराई से संतुलन बनाकर देश के विकल्पों को विविधता देने की कोशिश की। वे काफी हद तक सफल रहे, भले ही कुछ पर्यवेक्षकों ने उन्हें निर्दयी और सिद्धांतहीन कहा।
Published on:
01 Mar 2026 09:46 pm
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