
डोनाल्ड ट्रंप और टेड क्रूज। (फोटो: X Handle/ Sidhant Sibal)
Republican Senator: अमेरिका और भारत के बीच होने वाले जिस बड़े व्यापारिक समझौते (India-US Trade Deal) का दुनिया को इंतजार था, उसके बारे में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एक लीक हुए ऑडियो से अमेरिकी राजनीति से लेकर दिल्ली के गलियारों तक खलबली मच गई है। दावा किया जा रहा है कि इस डील में देर होने की मुख्य वजह कोई तकनीकी अड़चन नहीं है, बल्कि खुद डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump Tariffs) और जेडी वेंस का रुख ही है। हाल ही में सामने आए एक कथित ऑडियो में अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज (Ted Cruz Leaked Audio) को इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए सुना गया है। रिपोर्टों के अनुसार, क्रूज ने संकेत दिया है कि रिपब्लिकन खेमे के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर ट्रंप और उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस, भारत के साथ इस व्यापारिक सौदे (JD Vance Trade Policy) को लेकर फिलहाल बहुत ज्यादा उत्सुक नहीं हैं।
इस खुलासे का नया पहलू यह है कि जहां अब तक माना जा रहा था कि टैरिफ (Tariff) और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बातचीत अटकी हुई है, वहीं अब यह पूरी तरह से 'पॉलिटिकल गेम' नजर आ रहा है। ऐसा लगता है कि ट्रंप प्रशासन "अमेरिका फर्स्ट" की नीति के तहत भारत से कुछ ऐसी बड़ी रियायतें चाहता है, जिन पर अभी सहमति नहीं बन पाई है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार का ग्राफ पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। लेकिन एक औपचारिक 'ट्रेड डील' दोनों देशों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन इस डील को लटका कर भारत पर अन्य मोर्चों (जैसे रूस के साथ संबंध या रक्षा सौदे) पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है।
टैरिफ वार: ट्रंप पहले भी भारत को "टैरिफ किंग" कह चुके हैं। लीक ऑडियो से यह बात साफ होती है कि वे अभी भी भारतीय आयात शुल्कों से संतुष्ट नहीं हैं।
इस लीक पर अभी आधिकारिक मुहर लगना बाकी है, लेकिन इसके रिएक्शन काफी गहरे हैं:
भारतीय बाजार: भारतीय निर्यातकों में थोड़ी चिंता है कि अगर डील में और देरी हुई, तो आईटी और टेक्सटाइल सेक्टर को मिलने वाले फायदे टल सकते हैं।
अमेरिकी विपक्ष: डेमोक्रेट्स इस मौके का फायदा उठाकर ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति पर सवाल उठा रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय: जानकारों का कहना है कि यह केवल एक अस्थायी रुकावट है, क्योंकि अमेरिका को चीन के खिलाफ भारत जैसे बड़े बाजार और साथी की जरूरत है।
इस पूरे मामले में साइड एंगल उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस का उभरता हुआ कद है। वेंस को ट्रंप की नीतियों का कट्टर समर्थक माना जाता है। लीक ऑडियो यह दर्शाता है कि विदेश नीति और व्यापारिक समझौतों में वेंस की बात को काफी वजन दिया जा रहा है। वे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बचाने के लिए कड़े रुख के पक्षधर हैं, जो भारत के लिए बातचीत की मेज पर चुनौती पैदा कर सकता है।
आने वाले दिनों में हमें इस पर कुछ बड़े अपडेट देखने को मिल सकते हैं:
क्या भारत सरकार इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगेगी?
वाशिंगटन में होने वाली अगली उच्च स्तरीय बैठक में क्या इस 'लीक' का साया दिखेगा?
क्या ट्रंप प्रशासन इस डैमेज को कंट्रोल करने के लिए कोई नया बयान जारी करेगा?
बहरहाल, यह लीक ऑडियो एक याद दिलाता है कि अंतरराष्ट्रीय संबंध सिर्फ दोस्ती पर नहीं, बल्कि कठोर व्यापारिक हितों पर टिके होते हैं। भारत को अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' बनाए रखते हुए इस नए अमेरिकी रुख के साथ तालमेल बैठाना होगा।
Published on:
26 Jan 2026 12:47 pm
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