
प्रधानमंत्री मोदी और मोहम्मद यूनुस (फोटो- एएनआई)
बांग्लादेश में पिछले कुछ समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। यहां छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़के दंगों ने देखते ही देखते सांप्रदायिक रूप ले लिया। इसके चलते एक के बाद एक कई बांग्लादेशी हिंदुओं पर अत्याचार और उनकी क्रूर हत्या की खबरें सामने आई। भारत समेत दुनिया के कई देशों ने इन घटनाओं की आलोचना की लेकिन इसके बावजूद बांग्लादेशी सरकार ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया। ऐसे में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए भारत का बांग्लादेश से भरोसा उठ चुका है और हमारी सरकार ने बांग्लादेश में मौजूद भारतीय डिप्लोमैट्स को जल्द से जल्द अपने परिवारों को भारत वापस भेजने की सलाह दी है।
बांग्लादेश में अगले महीने चुनाव होने जा रहे हैं। इससे कुछ हफ्ते पहले ही भारत सरकार ने बांग्लादेश में तैनात अपने अधिकारियों के परिवारों को वापस बुलाने का यह फैसला लिया है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बांग्लादेश में सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने एहतियाती कदम के तौर पर यह फैसला लिया है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इस फैसले का असर बांग्लादेश में मौजूद भारतीय दूतावास के कामकाज पर नहीं पड़ेगा। वहां मौजूद भारतीय दूतावास और दफ्तर खुले रहेंगे और अधिकारी अपना काम पहले की तरह जारी रखेंगे।
इस तरह की नॉन-फैमिली पोस्टिंग प्रशासन के सबसे कड़े सुरक्षा उपायों में से एक माना जाता है। यह आमतौर पर ऐसे देशों या शहरों में दी जाती है जहां युद्ध चल रहा हो, आतंकवादी हमलों का डर हो या फिर जहां की सरकार और सुरक्षा व्यवस्था काफी अस्थिर हो। बांग्लादेश में भी इस समय इस तरह के हालात बने हुए हैं इसलिए ही भारत सरकार ने अपने अधिकारियों को यह नॉन-फैमिली पोस्टिंग दी गई है। हालांकि यह अभी सामने नहीं आ पाया है कि बांग्लादेश में मौजूद अधिकारियों के परिवार कब तक वहां से निकलेंगे और यह भी अभी तय नहीं है कि वे वहां से निकलकर भारत आएंगे या नहीं। बांग्लादेश में राजधानी धाका के अलावा चटगांव, खुल्ना, राजशाही और सिलहट में भारतीय उच्चायोग के दफ्तर हैं।
Updated on:
21 Jan 2026 11:19 am
Published on:
21 Jan 2026 10:03 am
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