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टैरिफ वार में चीन को नहीं हरा पाया अमेरिका, भारत के लिए खतरा पैदा कर रहे ट्रंप

अमेरिकी टैरिफ से चीन ने अमेरिका को निर्यात कम कर दिया। नतीजा हुआ कि अमेरिकियों को सस्ते चीनी सामान से हाथ धोना पड़ा और ज्यादा पैसे खर्च करने पड़े।

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भारत

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Vijay Kumar Jha

Jan 15, 2026

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग (Photo-IANS)

चीन ने अमेरिकी टैरिफ को बेअसर कर दिया है। 2025 में उसका ट्रेड सरप्लस (आयात पर खर्च से ज्यादा निर्यात से कमाई) रिकॉर्ड 1.2 खरब डॉलर हो गया है। मतलब यह हुआ कि दूसरे देशों का सामान मंगाने पर चीन ने जितना खर्च किया उससे 1.2 खरब डॉलर ज्यादा अपना सामान बाहर भेज कर कमा लिया। यह तब है जब दस साल से लगातार अमेरिका कोशिश कर रहा है कि इस मोर्चे पर चीन की रफ्तार रोकी जाए। चीन का ट्रेड सरप्लस 20 साल से बढ़ रहा है और अब दस गुना बढ़ चुका है। जब डोनाल्ड ट्रंप पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति बने, तभी से उन्होंने इसे रोकने की कोशिश की। उनके बाद आए जो बाइडेन ने भी कोशिश की। लेकिन, चीन पर कोई असर नहीं हुआ। 

चीन का बढ़ता गया ट्रेड सरप्लस

2017 से अब तक उसका ट्रेड सरप्लस तीन गुना बढ़ गया। और तो और, डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद टैरिफ बढ़ाने का जो खेल खेला, उसके बाद भी चीन का ट्रेड सरप्लस बढ़ता ही गया। उन्होंने चीन पर शुरुआत में 145 फीसदी टैरिफ लगाया था, जो समझौते के बाद दस फीसदी किया गया। इसके बावजूद चीन का ट्रेड सरप्लस 2024 के 993 अरब डॉलर से 2025 में 1.2 खरब डॉलर हो गया।

अमेरिका को उल्टा हुआ नुकसान

अमेरिकी टैरिफ से चीन ने अमेरिका को निर्यात कम कर दिया। नतीजा हुआ कि अमेरिकियों को सस्ते चीनी सामान से हाथ धोना पड़ा और ज्यादा पैसे खर्च करने पड़े। यही नहीं, अमेरिकी टैरिफ के बाद चीन ने अमेरिका को निर्यात कम (12 महीनों में 89 अरब डॉलर) किया और दूसरे देशों को बढ़ाया। इस तरह विश्व व्यापार में उसका दबदबा बढ़ाने में भी परोक्ष रूप से अमेरिका ने मदद की। जाहीर है, ट्रंप ऐसा चाहते नहीं हैं। लेकिन, उनकी नीतियों से ऐसा ही हुआ। 

चीन के दबदबे से बाकी देशों के लिए भी आगे चल कर मुश्किल खड़ी हो सकती है। हर जगह चीन ही सामान पहुंचाएगा तो उन देशों के स्थानीय उत्पादों का क्या होगा। खास कर तब, जब चीन जरूरत का हर सामान बना रहा है और सस्ते दाम पर दूसरे देशों में पहुंचा रहा है।        

डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से केवल आर्थिक मोर्चे पर खतरा पैदा नहीं हो रहा है, कई और चुनौतियां भी नजर आ रही हैं। उनका ताजा बयान ईरान को लेकर है, जिसमें उन्होंने मदद का वादा किया है। मदद कूटनीतिक होगी या हमले के रूप में या फिर तख्तापलट होगा, यह साफ नहीं है। अगर हमले के रूप में होगी तो भारत सहित बाकी देशों के लिए आर्थिक और कूटनीतिक मुश्किल खड़ी होगी। भारत अभी ईरान से ज्यादा तेल नहीं ले रहा है तो उसके लिए आर्थिक से ज्यादा कूटनीतिक समस्या खड़ी होगी। लेकिन, ईरान पर संभावित हमले से तेल के बाजार में भी आग लगनी तय है।

भारत के लिए खड़ा हो सकता है संकट

अगर ईरान ने सऊदी अरब, यूएई और कतर जैसे देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमला शुरू कर दिया तो भारत के लिए भी गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। पश्चिम एशिया के इन देशों में 80-90 लाख भारतीय रहते हैं। भारत अपनी 60 फीसदी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया के देशों पर ही निर्भर रहता है। ऐसे में इन देशों में कुछ हुआ तो भारत के सामने ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है और महंगाई की मार भी झेलनी पड़ सकती है।

अमेरिका ने मादुरो को उठाया

ट्रंप ने वेनज़ुएला में अपने सैनिकों से जिस तरह महल में घुस कर राष्ट्रपति को पत्नी सहित उठवा लिया और आगे कोलंबिया, क्यूबा, ग्रीनलैंड, मेक्सिको के बारे में भी इस तरह की धमकी दी, उससे तो अमेरिका को छोड़ कर सभी को नुकसान ही होने वाला है। ट्रंप ने सीधा संदेश दिया कि वह किसी का भी संसाधन किसी भी कीमत पर ले सकते हैं। ट्रंप की इस नीति से छोटे देशों के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। ऐसे में वे या तो अमेरिका के आगे हथियार डालेंगे या रूस, चीन जैसी दूसरी शक्तियों से गुपचुप करीबी बढ़ाएंगे। यह अंततः अमेरिका को कमजोर ही करेगा।