
चीन और अमेरिका में ठन सकती है। (फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)
Strategic threat 2026: लैटिन अमेरिका, जिसे कभी अमेरिका अपना 'सुरक्षित आंगन' समझता था, अब वहां चीनी ड्रैगन की दहाड़ सुनाई दे रही है। जनवरी 2026 (Monroe Doctrine 2026) की शुरुआत में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लेकर अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तनाव ने यह बात साफ कर दी है कि चीन की आर्थिक पैठ अब सामरिक चुनौती में बदल चुकी है। अहम बात यह है कि पेरू में चीन की ओर से तैयार किया गया चानकाय मेगापोर्ट (Chancay Megaport) अब चर्चा का विषय नहीं, बल्कि डर का कारण है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल व्यापार के लिए नहीं बना है। इसकी गहराई और आधुनिक तकनीक इसे चीनी युद्धपोतों और पनडुब्बियों के लिए एक आदर्श ठिकाना बनाती है। मई 2025 की रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने यहाँ अपनी सेना (PLA) के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट की गुप्त तैयारी कर ली है। अगर युद्ध की स्थिति बनती है, तो चीन यहाँ से अमेरिकी तटों पर सीधे नजर (Strategic threat 2026) रख सकता है।
दुनिया की महाशक्तियों के बीच चल रहे शीत युद्ध का नया अखाड़ा अब लैटिन अमेरिका बन गया है। चीन ने पेरू, चिली, ब्राजील और मेक्सिको जैसे देशों के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को इस कदर मजबूत कर लिया है कि अब यह अमेरिका की सामरिक सुरक्षा (Strategic Security) के लिए एक बड़ा रेड सिग्नल माना जा रहा है।
चीन की सबसे बड़ी ताकत उसका 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) है। पेरू में चीन द्वारा विकसित किया जा रहा चानकाय मेगापोर्ट (Chancay Megaport) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। कहने को तो यह एक व्यापारिक बंदरगाह है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इसे चीनी नौसेना (PLAN) के जहाजों के लिए एक लॉजिस्टिक बेस के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो चीनी सेना पहली बार अमेरिका के इतने करीब स्थायी रूप से तैनात हो सकती है।
अमेरिका की आधुनिक सैन्य तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग काफी हद तक लिथियम और दुर्लभ खनिजों (Critical Minerals) पर निर्भर हैं। चिली और अर्जेंटीना के 'लिथियम ट्रायंगल' पर चीन का बढ़ता नियंत्रण अमेरिका की सप्लाई चेन को पंगु बना सकता है। यदि भविष्य में ताइवान या किसी अन्य मुद्दे पर अमेरिका और चीन के बीच टकराव बढ़ता है, तो चीन इन संसाधनों की आपूर्ति रोककर अमेरिका की रक्षा उत्पादन क्षमता को भारी नुकसान पहुँचा सकता है।
मेक्सिको: अमेरिका का सबसे करीबी पड़ोसी होने के नाते मेक्सिको में चीनी निवेश का बढ़ना वॉशिंगटन के लिए चिंताजनक है। चीन यहाँ के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में घुसपैठ कर 'यूएस-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट' (USMCA) के फायदों का इस्तेमाल कर रहा है। चीन और क्यूबा के बीच बढ़ती सैन्य और खुफिया नजदीकी किसी से छिपी नहीं है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि चीन क्यूबा में इलेक्ट्रॉनिक जासूसी केंद्र विकसित कर सकता है, जिससे अमेरिका के सैन्य संचार की निगरानी की जा सके।
अमेरिका का रक्षा तंत्र और आधुनिक हथियार 'सफेद सोने' यानी लिथियम पर टिके हैं। चिली, अर्जेंटीना और बोलीविया के 'लिथियम त्रिकोण' पर चीन ने अपना दबदबा इतना बढ़ा लिया है कि वह अमेरिका की मिसाइल और सैटेलाइट तकनीक की सप्लाई चेन को कभी भी ठप कर सकता है। ट्रंप प्रशासन ने इसे 'इकोनॉमिक टेररिज्म' करार दिया है और जवाब में मेक्सिको और कोलंबिया पर चीनी निवेश कम करने के लिए कड़ा दबाव बनाया है।
चीन ने मेक्सिको की अर्थव्यवस्था में इस तरह घुसपैठ की है कि वह अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों का इस्तेमाल कर रहा है। वहीं क्यूबा में चीन के इलेक्ट्रॉनिक जासूसी केंद्रों की खबरें 2025 के अंत में फिर से गरमा गईं। दक्षिण कमान (US Southcom) के अनुसार, चीन इन देशों के जरिए अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित सैन्य अड्डों की गुप्त सूचनाएं जुटा रहा है।
यह तथ्य वाकई चौंकाने वाला है कि चीन ने बिना एक भी गोली चलाए अमेरिका को उसी की सीमा पर घेर लिया है। व्यापार और कर्ज (Debt-Trap) का इस्तेमाल कर चीन ने लैटिन अमेरिकी देशों को वाशिंगटन के खिलाफ एक ढाल की तरह खड़ा कर दिया है। यह कूटनीतिक जीत नहीं, बल्कि एक भविष्य के बड़े युद्ध की तैयारी लगती है।
क्या अमेरिका 'चानकाय पोर्ट' के जवाब में पेरू पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाएगा?
वेनेजुएला में हालिया सैन्य हलचल के बाद क्या चीन अपनी नौसेना को कैरिबियन सागर में भेजेगा?
भारत इस स्थिति में क्या भूमिका निभाएगा, क्योंकि भारत का भी इन देशों के साथ महत्वपूर्ण व्यापार है?
चीन की रणनीति "चेकबुक डिप्लोमेसी" की है। वह उन देशों को भारी कर्ज दे रहा है जो अमेरिकी नीतियों से असंतुष्ट हैं (जैसे वेनेजुएला और निकारागुआ)। जब ये देश कर्ज नहीं चुका पाते, तो चीन उनके रणनीतिक ठिकानों और संसाधनों पर नियंत्रण कर लेता है। यह अमेरिका की घेराबंदी का एक ऐसा तरीका है जिसमें बिना गोली चलाए दुश्मन को कमजोर किया जा रहा है।
बहरहाल,लैटिन अमेरिका में चीन का बढ़ता दबदबा यह बात साफ करता है कि अब युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि बंदरगाहों, तेल के कुओं और खदानों के जरिए लड़ा जा रहा है। यदि अमेरिका ने समय रहते इस क्षेत्र में अपनी आर्थिक और कूटनीतिक सक्रियता नहीं बढ़ाई, तो उसे अपनी ही दहलीज पर एक बेहद शक्तिशाली दुश्मन का सामना करना पड़ सकता है।
Published on:
06 Jan 2026 02:56 pm
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