
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (फोटो- IANS)
चीन के सबसे बड़े सैन्य अधिकारी जनरल झांग यौशिया को गिरफ्तार कर लिया गया है। वे सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के वाइस चेयरमैन थे और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सबसे करीबी सैन्य सहयोगी माने जाते थे। इस खबर ने दुनिया भर में हलचल पैदा कर दी है।
चीन की रक्षा मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि झांग यौशिया और एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी लियू झेनली पर गंभीर अनुशासन और कानून उल्लंघन का संदेह है।
इस बीच, उनकी गिरफ्तारी की एक और बड़ी वजह सामने आई है। जिससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी सेना में सेंध लगा दी है।
सूत्रों के मुताबिक, चीनी सेना में नंबर दो अफसर का पोजीशन रखने वाले जनरल झांग पर देश के न्यूक्लियर हथियारों के प्रोग्राम की जानकारी अमेरिका को लीक करने और सरकारी कामों के लिए रिश्वत लेने का आरोप है। यह जानकारी आरोपों पर हुई एक हाई-लेवल ब्रीफिंग से परिचित लोगों ने दी है।
दरअसल, जनरल की गिरफ्तारी के बाद शनिवार सुबह ब्रीफिंग हुई। इसमें सेना के कुछ सबसे ऊंचे रैंक के अधिकारियों ने ही हिस्सा लिया था। ब्रीफिंग से परिचित लोगों ने बताया कि झांग पर राजनीतिक गुट बनाने का भी आरोप है। जो चीन में तख्तापलट करने की ओर इशारा करता है।
जनरल पर सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (कम्युनिस्ट पार्टी की शीर्ष सैन्य निर्णय लेने वाली संस्था) में अपने अधिकार का दुरुपयोग करने का भी आरोप है।
अब चीन में अधिकारी यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि झांग ने कहां-कहां और किस तरह से चीनी सेना में अपने पद का गलत इस्तेमाल किया।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सेंट्रल मिलिट्री कमीशन चीनी सेना के लिए होने वाली रिसर्च, डेवलपमेंट और खरीद के लिए जिम्मेदार है। ऐसे में झांग ने कैसे अपने पद का दुरुपयोग किया, यह जांच का विषय है।
झांग की गिरफ्तारी के बाद चीन में मिलिट्री की डिसीजन लेने वाली बॉडी 'सेंट्रल मिलिट्री कमीशन' में अब सिर्फ दो लोग बचे हैं। जिनमें से एक खुद शी जिनपिंग हैं। इसमें पहले सात सदस्य थे।
पिछले कई महीनों से चीन में सीनियर मिलिट्री अधिकारियों को हटाने की खबरें लगातार सुर्खियों में रही हैं। इसके बावजूद, चीन की सबसे बड़ी मिलिट्री डिसीजन लेने वाली बॉडी के एकमात्र बचे वाइस चेयरमैन की गिरफ्तारी ने सबको चौंका दिया है।
झांग की उम्र 75 साल है। वह 1968 में पीपल्स लिबरेशन आर्मी (चीनी सेना) में शामिल हुए थे। पीएलए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की मिलिट्री विंग है।
ऐसा बताया जाता है कि झांग के चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ निजी संबंध थे। उनके पिता सीनियर पार्टी नेता थे जो एक-दूसरे को जानते थे।
उधर, अमेरिकी अखबार 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने रविवार को दावा किया कि झांग पर चीन के परमाणु हथियार कार्यक्रम के बारे में जानकारी अमेरिका को लीक करने का आरोप है।
अगर यह सच है, तो यह कोई साधारण आरोप नहीं है। उन्हें हटाने के बारे में और भी कई थ्योरीज चल रही हैं। अब यह भी पता चला चल है कि झांग के खिलाफ जांच शुरू होने के बाद राहत मिलने की संभावना कम है और उन्हें उनके पद से हटा दिया जाएगा।
सात सदस्यों वाली चीनी सेंट्रल मिलिट्री कमीशन में अब जिनपिंग के अलावा सीएमसी चेयरमैन के तौर पर झांग शेंगमिन बचे हैं। शेंगमिन को सिर्फ तीन महीने पहले इस पद पर नियुक्त किया गया था। उनसे पहले हे वेदोंग सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के चेयरमैन थे। जिन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पद से हटा दिया गया था।
बता दें कि गिरफ्तार किए झांग और लियू दोनों सम्मानित युद्ध नायक हैं। उन्होंने 1970 के दशक के आखिर में वियतनाम के खिलाफ चीनी सेना के अभियानों में हिस्सा लिया था।
चीनी अखबारों में फिलहाल यह कहा जा रहा है कि झांग और लियू पर जो कार्रवाई हुई है, वह साबित करती है कि जिनपिंग चीन में भ्रष्टाचार को लेकर काफी सख्त हैं। चाहे कोई हो, उन पर वह कड़ी कार्रवाई करेंगे।
दोनों लोगों के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि उन्होंने पार्टी सेंट्रल कमेटी और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के भरोसे और उम्मीदों को धोखा दिया है। उन्होंने चीन सेना की जिम्मेदारी को गंभीर रूप से रौंदा और कमजोर किया है।
इस बीच, अमेरिका के पत्रकार और लंबे समय से चीन पर नजर रखने वाले बिल बिशप ने अपने न्यूजलेटर 'सिनोसिज़्म' में लिखा कि जिनपिंग ने झांग को चीनी सेना में कुछ ऐसा करते हुए देखा है, जो उनके देश उन्हें कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ता। यही कारण है कि उन पर ऐसी कार्रवाई हुई।
Published on:
27 Jan 2026 11:10 am
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