
बांग्लादेश में जमाते इस्लामी के नेता शफीकुर रहमान के बयान पर युवाओं का उफान। फोटो: X
Working Women: बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के प्रमुख डॉ. शफीकुर रहमान ने कामकाजी महिलाओं (Bangladesh Jamaat Chief) के बारे में एक बहुत अपमानजनक और विवादित टिप्पणी की है, जिसके बाद से देश भर में गुस्से का माहौल है। शफीकुर रहमान (Shafiqur Rahman Controversy) ने अपने एक संबोधन के दौरान कथित तौर पर सरकारी और निजी दफ्तरों में काम करने वाली महिलाओं की तुलना 'वेश्यावृत्ति' (Women Rights Violation) से कर दी है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश (Dhaka News Update) खुद को एक प्रगतिशील राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। जमात चीफ के इस बयान से न केवल महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंची है, बल्कि कट्टरपंथी सोच और आधुनिक समाज के बीच की भी गहरी खाई पैदा हो गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जमात प्रमुख शफीकुर रहमान एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अपने भाषण के दौरान महिलाओं की आजादी और उनके घर से बाहर काम करने पर बेहद संकीर्ण विचार रखे। उन्होंने कहा कि महिलाएं जब घर से बाहर निकल कर गैर- मर्दों के साथ काम करती हैं, तो यह "सम्मान का सौदा" करने जैसा है।
उन्होंने कथित तौर पर कहा कि जो महिलाएं सरकारी नौकरियों या अन्य क्षेत्रों में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर चल रही हैं, वह इस्लामी मूल्यों के खिलाफ है। हद तो तब हो गई जब उन्होंने इस तुलना को वेश्यावृत्ति (Prostitution) जैसे घृणित शब्द से जोड़ दिया। उनका तर्क था कि पैसे कमाने के लिए घर से बाहर निकलना और मर्यादा लांघना, समाज को नैतिक पतन की ओर ले जा रहा है।
जैसे ही यह वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, बांग्लादेशी नागरिकों ने तीखी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी। फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लोग जमात चीफ से माफी मांगने की मांग कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था, विशेषकर गारमेंट इंडस्ट्री और महिलाओं की मेहनत पर टिकी हुई है। ऐसे में देश की आधी आबादी का अपमान करना देश की तरक्की का अपमान है।
इस बयान के बाद मानवाधिकार संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है:
ढाका स्थित कई महिला अधिकार समूहों ने इसे "मध्ययुगीन मानसिकता" करार दिया है। उनका कहना है कि धर्म की आड़ में महिलाओं को घरों में कैद करने की साजिश रची जा रही है।
बुद्धिजीवियों और लेखकों ने कहा है कि शफीकुर रहमान का बयान यह दर्शाता है कि जमात-ए-इस्लामी आज भी अपनी पुरानी और कट्टरपंथी विचारधारा से बाहर नहीं निकल पाई है।
सोशल मीडिया पर यूजर्स लिख रहे हैं कि "जो महिलाएं देश चला रही हैं, उन्हें वेश्या कहना यह साबित करता है कि जमात की सोच कितनी गंदी है।"
इस विवाद के बाद बांग्लादेश की राजनीति में गर्माहट बढ़ने के आसार हैं:
विरोध प्रदर्शन: ढाका विश्वविद्यालय और अन्य बड़े शहरों में छात्र संगठन और महिला समूह इस बयान के खिलाफ सड़कों पर उतर सकते हैं।
कानूनी कार्रवाई की मांग: सिविल सोसाइटी के लोग शफीकुर रहमान के खिलाफ मानहानि और नफरत फैलाने (Hate Speech) का मुकदमा दर्ज करवाने की मांग कर सकते हैं।
पार्टी के अंदर भी उदारवादी धड़ा (यदि कोई है) इस बयान से किनारा कर सकता है, क्योंकि इससे पार्टी की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान होगा। देखना होगा कि क्या जमात-ए-इस्लामी इस पर कोई आधिकारिक सफाई पेश करती है या नहीं।
इस खबर का एक अहम पहलू बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था है।
गारमेंट सेक्टर की रीढ़: बांग्लादेश दुनिया के सबसे बड़े कपड़ा निर्यातकों में से एक है और इस इंडस्ट्री में 80% से ज्यादा वर्कफोर्स महिलाएं हैं। अगर महिलाएं काम करना बंद कर दें, तो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था ठप हो जाएगी।
एक तरफ बांग्लादेशी महिलाएं दुनिया भर में नाम कमा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के एक प्रमुख राजनीतिक दल के नेता का ऐसा बयान यह बताता है कि वहां वैचारिक संघर्ष (Ideological Conflict) कितना गहरा है। यह लड़ाई अब सिर्फ राजनीति की नहीं, बल्कि देश की पहचान की बन गई है कि क्या बांग्लादेश एक उदारवादी मुस्लिम देश बनेगा या कट्टरपंथ की ओर जाएगा।
Published on:
02 Feb 2026 12:49 pm
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