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बच्चों से बचपन छीन सकते हैं एआई खिलौने, एक्सपर्ट्स बोले – हो सकता है गलत असर

एआई खिलौने तेज़ी से लोकप्रिय हो रहे हैं, लेकिन बच्चों पर इनका गलत असर पड़ सकता है। कैसे? आइए जानते हैं।

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भारत

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Tanay Mishra

Mar 15, 2026

Child playing with AI toy

Child playing with AI toy

एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ रहा है। कई सेक्टर्स में एआई अब अहम हिस्सा बन गया है। लोग नौकरी से लेकर अपनी निजी ज़िंदगी में भी एआई का इस्तेमाल करते हैं। बच्चों के खिलौने भी एआई से अछूते नहीं रहे, लेकिन ये खिलौने बच्चों के लिए सही नहीं हैं। इसका एक मामला तब सामने आया जब एक 3 तीन साल के बच्चे ने अपने खिलौने से कहा - "मैं उदास हूं।" इस पर खिलौने ने जवाब दिया - "चिंता मत करो, चलो बात करते हैं।" यह किसी फिल्म का सीन नहीं, मार्केट में मिल रहे एआई खिलौनों की असल तस्वीर है।

बच्चों पर की रिसर्च

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 3 से 5 साल के बच्चों पर एआई खिलौनों के असर को परखा। पता चला कि ये खिलौने बच्चे और बड़े की आवाज़ में फर्क नहीं कर पाता। एआई वाले खिलौने बच्चों की बात बीच में काट देते हैं और भावनात्मक सवाल पर पर अटपटे जवाब देते हैं।

बच्चों से बचपन छीन सकते हैं एआई खिलौने

रिसर्च में शामिल कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की एक वैज्ञानिक का कहना है कि ये खिलौने बच्चों की भावनाओं को गलत समझ सकते हैं और उल्टे-सीधे जवाब दे सकते हैं। ऐसे में बच्चे न खिलौने से दिलासा पा सकते हैं, न माता-पिता से क्योंकि वो उनके आस-पास नहीं होते। एक अन्य प्रोफ़ेसर ने कहा कि अब तक खिलौनों की शारीरिक सुरक्षा पर ध्यान था, लेकिन अब मनोवैज्ञानिक सुरक्षा पर भी सोचना जरूरी हो गया है। एक्सपर्ट्स ने चिंता जताते हुए कहा है कि एआई खिलौनों का बच्चों पर गलत असर पड़ सकता हैं और ये बच्चों से उनका बचपन छीन सकते हैं।

ब्रिटेन में सख्त नियमों की मांग उठी

ब्रिटेन में एआई खिलौनों के लिए सख्त नियम बनाने की मांग की है। ऐसे खिलौनों के प्रभाव की जांच को ज़रूरी बताया है। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि 3 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बनाए जाने वाले एआई खिलौनों पर सख्त नियम लागू किए जाने चाहिए और माता-पिता को भी ऐसे खिलौनों के इस्तेमाल पर नजर रखनी चाहिए।