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पांच दिन बाद खुली मण्डी, जिंस लेकर पहुंचे किसानों की लगी कतारें
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पांच दिन बाद खुली मण्डी, जिंस लेकर पहुंचे किसानों की लगी कतारें

– मण्डी में प्रतिदिन को हो रहा है करीब दो करोड़ रुपए का कारोबार बस्सी. जिंसों की अधिक आवक और लगातार खराब मौसम के चलते पांच दिन तक बंद रही कृषि उपज मण्डी में मंगलवार को एक बार फिर कारोबार सुचारू हो गया। मण्डी खुलते ही सुबह से किसानों के वाहनों की लंबी कतारें देखने […]

– मण्डी में प्रतिदिन को हो रहा है करीब दो करोड़ रुपए का कारोबार

बस्सी. जिंसों की अधिक आवक और लगातार खराब मौसम के चलते पांच दिन तक बंद रही कृषि उपज मण्डी में मंगलवार को एक बार फिर कारोबार सुचारू हो गया। मण्डी खुलते ही सुबह से किसानों के वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जिससे पूरे परिसर में चहल-पहल लौट आई।

जानकारी के अनुसार 18 मार्च को मण्डी में जिंसों की अत्यधिक आवक के कारण दो दिन के लिए कारोबार बंद किया गया था। इसके बाद अचानक मौसम खराब हो गया, जिससे मण्डी को लगातार बंद रखना पड़ा। बीच-बीच में मौसम में सुधार की उम्मीद बनी, लेकिन पुन: खराब हालात के चलते कारोबार शुरू नहीं हो सका। ऐसे में मंगलवार को मौसम साफ होने के साथ ही मण्डी में गतिविधियां फिर से शुरू हो पाईं।

मण्डी खुलने के साथ ही क्षेत्रभर से किसान अपनी उपज लेकर पहुंचने लगे। सुबह से ही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों की कतारें लग गईं। कई दिनों बाद मण्डी खुलने से जौ, चना, सरसों एवं गेहूं सहित विभिन्न जिंसों की आवक दर्ज की गई। व्यापारियों ने बताया कि पहले दिन आवक सीमित रही, लेकिन आने वाले दिनों में इसमें और बढ़ोतरी की संभावना है।

पांच दिन तक मण्डी बंद रहने का असर सभी वर्गों पर पड़ा है। जहां मण्डी प्रशासन को राजस्व का नुकसान हुआ, वहीं व्यापारियों को भी कारोबार ठप रहने से घाटा झेलना पड़ा। इसके अलावा पल्लेदारों और मजदूरों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ा, क्योंकि उन्हें इन दिनों काम नहीं मिल सका।

व्यापारियों ने बताया कि वर्तमान में रबी सीजन के चलते मण्डी में जिंसों की आवक अपने चरम पर है। सामान्य दिनों में यहां प्रतिदिन करीब दो करोड़ रुपए का कारोबार होता है। ऐसे में लगातार पांच दिन तक मण्डी बंद रहने से लाखों रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ है।

मण्डी खुलने के बाद अब धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है। यदि मौसम अनुकूल रहा तो आने वाले दिनों में आवक बढ़ने के साथ कारोबार भी रफ्तार पकड़ेगा। वहीं किसान भी समय पर अपनी उपज बेचकर राहत महसूस करेंगे। ( कासं )