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Puja Room Vastu Rules: पूजा घर के ये गुप्त वास्तु नियम बदल देंगे आपकी किस्मत, शांति और धन लाभ के लिए आज ही आजमाएं

Puja Vastu Rules in Hindi: पूजा घर की ये छोटी-छोटी वास्तु गलतियां रोक सकती हैं धन और शांति। जानिए पूजा का सही समय, दिशा, तुलसी नियम और मंदिर वास्तु टिप्स।

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भारत

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Manoj Vashisth

Jan 12, 2026

Puja Room Vastu Rules

Puja Room Vastu Rules : घर में पूजा करते समय ध्यान रखें ये वास्तु बातें, हर मनोकामना होगी पूरी!

Puja Room Vastu Rules: पूजा करते वक्त कुछ वास्तु नियम हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी है। लोग अक्सर पूजा करते हैं, लेकिन छोटी-छोटी गलतियां फायदे की जगह नुकसान कर जाती हैं। वास्तु विशेषज्ञ अनीश व्यास ने इन नियमों को आसान भाषा में समझाया है।

सबसे पहले, पूजा के लिए एक तय समय रखें। दिन में पांच शुभ वक्त होते हैं, जिनमें पूजा करना अच्छा रहता है। सबसे बढ़िया है ब्रह्म मुहूर्त यानी तड़के सुबह पूजा करना। अगर इतनी जल्दी उठना मुश्किल है, तो आप सुबह 9 या 10 बजे तक पूजा कर सकते हैं। इसके बाद, शाम को सोने से पहले पूजा कर लें। असल बात ये है कि पूजा के लिए रोज एक ही समय चुनें।

सबसे पहले गणेश जी पूजा

शास्त्रों में कहा गया है कि पूजा में सबसे पहले गणेश जी को याद करें। वैसे, पांच देवता हैं। सूर्य देव, गणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु। पूजा शुरू करते वक्त इन सभी को मन में जरूर लें। इससे घर में सुख-शांति और बरकत बनी रहती है।

पूजा में तुलसी के पत्ते जरूर रखें

तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना गया है। पूजा में चढ़ने वाले प्रसाद में तुलसी के पत्ते जरूर डालें। लेकिन भगवान शिव, गणेश और भैरव को तुलसी के पत्ते न चढ़ाएँ। साथ ही, रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रांति या शाम के वक्त तुलसी के पत्ते न तोड़ें। ऐसा करने पर देवी लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं, और इससे घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है।

पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ बैठें

पूजा करते समय हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ बैठें। पूजा में तेल या घी का दीपक जलाएँ। लेकिन एक बात का ध्यान रखें। एक दीपक से दूसरा दीपक न जलाएँ। इससे सेहत से जुड़ी परेशानियाँ आ सकती हैं।

खड़ी मूर्तियां घर में न रखें

घर के मंदिर में देवताओं की मूर्तियां 1, 3, 5, 7, 9 या 11 इंच की रखें। गणेश, सरस्वती या लक्ष्मी की खड़ी मूर्तियां घर में न रखें। अगर मंदिर में कोई मूर्ति टूट जाए, तो उसे तुरंत हटा दें। ऐसी मूर्तियां मंदिर में दान करें या फिर किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें। पूजा के दौरान गंगाजल का इस्तेमाल करना भी अच्छा माना जाता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।