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17 साल देश की सुरक्षा की, फिर भी महाकाल दरबार में अपमानित हुआ एनएसजी कमांडो

17 साल तक देश की आंतरिक सुरक्षा में तैनात रहे एनएसजी कमांडो सांवरा जाट को महाकाल मंदिर में भस्म आरती की अनुमति होने के बावजूद प्रवेश नहीं मिला। आप भी सुनिए इनका दर्द...।

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Mahakal Mandir News

यह हैं एनएसजी कमांडो सांवरा जाट, जो 17 साल की देश सेवा के बाद महाकाल दर्शन करने आए थे, लेकिन अपमान से बेहद दुखी हैं। फोटो -पत्रिका

Mahakal Mandir: देश की आंतरिक सुरक्षा में 17 वर्षों तक सेवा देने वाले एनएसजी कमांडो सांवरा जाट के क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल था। घर पहुंचने से पहले उनकी एक ही इच्छा थी कि उज्जैन में भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल होकर आशीर्वाद लेंगे। उन्होंने पूर्व से भस्म आरती की अनुमति ले रखी थी। 31 जनवरी की रात श्रद्धा और भक्ति के साथ वे उज्जैन पहुंचे, लेकिन बाबा महाकाल के दरबार तक पहुंचने की यह यात्रा अव्यवस्था, असमंजस और अपमानजनक व्यवहार से भरी रही। मंदिर परिसर में जो अव्यवस्थाएं दिखीं उसने न केवल एक कमांडो की भावनाओं को ठेस पहुंचाई बल्कि आम श्रद्धालुओं के लिए की गई दर्शन व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

गार्ड बोले- नीलकंठ द्वार से नहीं गेट नंबर एक से मिलेगी एंट्री

जाट बताते हैं, जब मैं नीलकंठ द्वार पहुंचा, तो मोबाइल पर भस्म आरती की बुकिंग रसीद दिखाई। वहां मौजूद गार्ड ने साफ कहा कि मेरी एंट्री गेट नंबर एक से होगी। उसी निर्देश पर मैंने अपनी कार माधव सेवा न्यास की पार्किंग में खड़ी की और पैदल गेट नंबर एक की ओर पहुंचा। लेकिन, वहां पहुंचते ही गार्ड ने मुझसे पूछा कि क्या किसी अटैंडर का फोन आया है। मैंने कहा- नहीं, कोई कॉल नहीं आया, लेकिन मेरे पास अनुमति है। इसके बावजूद मुझे प्रवेश देने से मना कर दिया गया और दोबारा नीलकंठ द्वार जाने को कहा गया।

अनुमति मिली फिर भी भटकते रहे कई श्रद्धालु

जाट ने बताया कि मैं अकेला नहीं था। गेट नंबर एक पर मेरे जैसे करीब 20 से 30 श्रद्धालु और खड़े थे, जिनके पास अनुमति थी। सभी परेशान थे, असमंजस में थे। किसी को यह समझ नहीं आ रहा था कि जब अनुमति है तो एंट्री क्यों नहीं मिल रही? चूंकि हम सभी ने गाड़ियां पहले ही पार्किंग में खड़ी कर दी थीं, इसलिए मजबूरी में हमें पैदल ही दोबारा नीलकंठ द्वार की ओर जाना पड़ा। अव्यवस्था को देखकर बहुत दुख हुआ कि भस्म आरती जैसे पवित्र आयोजन में श्रद्धालुओं को इस तरह भटकना पड़ रहा है।

मैंने भेदभाव बर्दाश्त किया

जाट ने बताया कि पार्किंग की समस्या ने मुझे और परेशान कर दिया। मैंने महाकाल पुलिस थाने के पास पार्किंग में गाड़ी लगाने की कोशिश की, लेकिन वहां पार्किंग बंद होने का बोर्ड लगा था। इसके बाद नीलकंठ द्वार पर अनुरोध किया कि वीआईपी पार्किंग में गाड़ी खड़ी करने दी जाए, लेकिन मना कर दिया गया। उसी दौरान मैंने देखा कि अन्य वीआइपी वाहनों को अंदर जाने दिया जा रहा था। यह भेदभाव मुझे बेहद पीड़ादायक लगा। गार्ड का व्यवहार दिल को चुभ गया सबसे ज्यादा दुख गार्ड के व्यवहार से हुआ। वह दूर से चिल्लाकर बोल रहा था कि सब लोग आधार कार्ड हाथ में रखो। श्रद्धा और भक्ति से आए लोगों से इस तरह बात की जा रही थी कि मन खिन्न हो गया। आखिरकार मुझे एक गली में जोखिम उठाकर गाड़ी खड़ी करनी पड़ी, क्योंकि भस्म आरती में शामिल होकर ही गांव जाना चाहता था। किसी तरह आरती में शामिल तो हुआ, लेकिन जिस शांति और सुकून की अपेक्षा से आया था, वह नहीं मिल पाया।

संकेतकों का भी रहा अभाव

जाट ने कहा कि पूरे परिसर में सबसे बड़ी कमी स्पष्ट दिशा-निर्देशों और संकेतकों की नजर आई। कहीं भी यह साफ नहीं लिखा था कि भस्म आरती की बुकिंग वाले श्रद्धालु किस गेट से जाएं, कहां वाहन खड़ा करें और किससे संपर्क करें। इसी कारण लोग बार-बार अलग-अलग गेटों के बीच भटकते रहे। कई श्रद्धालु बुजुर्ग थे, महिलाएं थीं, जो सर्दी और अंधेरे में असहाय नजर आ रहे थे। हर कोई किसी गार्ड या कर्मचारी से पूछता रहा, लेकिन किसी को स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। इस संबंध में मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक से संपर्क किया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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