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थकान की इंतेहा: स्टोर की रैक को ही बना लिया बिस्तर, कर्मचारी की हालत देख भड़के लोग, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

उदयपुर के सेलिब्रेशन मॉल स्थित मैकडॉनाल्ड्स आउटलेट का एक वीडियो सामने आया है। एक कर्मचारी स्टोर रैक के अंदर सोता दिखाई दे रहा है। भागदौड़ और काम का दबाव किस तरह से एम्पलॉय को थका देता है।​ चौंका देने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

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Udaipur Viral Video
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रैक को ही बिस्तर बना लिया कर्मचारी (फोटो पत्रिका नेटवर्क)

Udaipur viral video: उदयपुर के पॉश सेलिब्रेशन मॉल स्थित मैकडॉनाल्ड्स (McDonald's) आउटलेट का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा और सहानुभूति का केंद्र बना हुआ है। यह वीडियो न केवल एक कर्मचारी की शारीरिक थकान को दर्शाता है, बल्कि आज के दौर में बढ़ते काम के दबाव और बदलती कार्य संस्कृति पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक कर्मचारी स्टोर के भीतर सामान रखने वाली रैक के एक छोटे से खाने में लेटा हुआ है। चेहरे पर मास्क और सिर पर टोपी लगाए वह कर्मचारी उस तंग जगह में इस तरह दुबका हुआ था।

जैसे वह दुनिया की तमाम भागदौड़ से कुछ पल की राहत ढूंढ रहा हो। बताया जा रहा है कि काम के अत्यधिक बोझ और लंबी ड्यूटी शिफ्ट के कारण वह इतना थक गया था कि उसे जहां जगह मिली, वहीं नींद का सहारा लेना पड़ा।

थकान और मजबूरी

यह दृश्य केवल एक 'वायरल क्लिप' नहीं है, बल्कि उन हजारों कर्मचारियों की कहानी है जो चकाचौंध भरे मॉल्स और मल्टीनेशनल ब्रांड्स के पीछे अदृश्य होकर काम करते हैं। जब हम किसी आउटलेट पर जाकर मिनटों में अपना पसंदीदा बर्गर ऑर्डर करते हैं, तो अक्सर हम उस मुस्कान के पीछे छिपी थकान को नहीं देख पाते।

वह रैक, जो सामान रखने के लिए बनी थी, उस कर्मचारी के लिए कुछ पलों का 'बिस्तर' बन गई। यह इस बात का प्रमाण है कि इंसान की शारीरिक क्षमता की भी एक सीमा होती है। जब शरीर जवाब दे देता है, तो उसे लग्जरी बेड नहीं, बस चंद लम्हों का सुकून चाहिए होता है, चाहे वह लोहे की रैक ही क्यों न हो।

मैनेजमेंट और सामाजिक जिम्मेदारी

सोशल मीडिया पर इस वीडियो के आने के बाद लोग मैनेजमेंट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। सवाल यह है कि क्या कर्मचारियों के लिए उचित विश्राम कक्ष (Rest Room) नहीं हैं? क्या मुनाफे की दौड़ में हम इंसानी संवेदनाओं को पीछे छोड़ रहे हैं?

यह वीडियो एक चेतावनी है कि वर्क-लाइफ बैलेंस केवल किताबी शब्द नहीं होना चाहिए। कंपनियों को यह समझना होगा कि एक स्वस्थ और तनावमुक्त कर्मचारी ही किसी संस्थान की असली पूंजी होता है। उदयपुर की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि प्रगति की इस दौड़ में कहीं हम 'मशीन' तो नहीं बनते जा रहे?

सोशल मीडिया पर लोग इस कर्मचारी के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि काम के घंटों और वर्किंग कंडीशंस में सुधार किया जाए, ताकि किसी और को 'रैक' में अपना सुकून न तलाशना पड़े।