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Rajasthan Farmers : देश की मंडियों में फेमस है सीकर का मीठा प्याज, किसानों की है बल्ले-बल्ले

Rajasthan Farmers : खेती में अपने नवाचारों के जरिए अपनी धाक जमाने वाला सीकर मीठे प्याज के उत्पादन से देशभर में पहचान बना रहा है। सीकर के धोद क्षेत्र में होने वाला प्याज मिठास और गुणवत्ता के कारण राजस्थान ही नहीं, देश की मंडियों में भी प्रसिद्ध हो रहा है।

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Sikar sweet onion is famous in Rajasthan and country markets Dhod farmers are happy

फाइल फोटो पत्रिका

Rajasthan Farmers : खेती में अपने नवाचारों के जरिए अपनी धाक जमाने वाला सीकर मीठे प्याज के उत्पादन से देशभर में पहचान बना रहा है। जिले में हर साल बड़े पैमाने पर होने वाली खेती से पचास हजार से अधिक किसानों की आजीविका जुड़ी हुई है। धोद क्षेत्र में होने वाला प्याज मिठास और गुणवत्ता के कारण प्रदेश ही नहीं, देश की मंडियों में भी प्रसिद्ध हो रहा है।

धोद क्षेत्र के रसीदपुरा, खुडी, मैलासी, खूड, मूंडवाड़ा, लोसल क्षेत्र को प्याज उत्पादक गांवों के रूप में देशभर में पहचान मिल रही है। यह क्षेत्र प्रदेश के प्याज उत्पादन में 40 प्रतिशत से ज्यादा भागीदारी रखता है।

जिले में हर साल 18 से 20 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में इसकी बुवाई की जाती है। इससे जुड़े गांवों की संख्या तीन दर्जन से अधिक है और 50 हजार से ज्यादा किसान इस फसल पर निर्भर है। केवल सर्दी के सीजन में ही जिले में साढ़े चार लाख मीट्रिक टन से अधिक मीठे प्याज का उत्पादन होता है।

किसान खुद तैयार करते है बीज

किसान हर साल पारंपरिक खेती के साथ प्याज के बीज तैयार करते हैं। हालाकि किसानों के अनुसार यहां के प्याज में पानी की मात्रा ज्यादा होती है। जिससे एक्सपोर्ट नहीं हो पाता। ऐसे में किसानों को मेहनत का बेहतर मोल नहीं मिल पाता। सरकार के स्तर पर प्याज के भंडारण और प्रोसेसिंग के लिए ठोस व्यवस्था नहीं की गई है।

परिवहन व्यवस्था हो मजबूत

प्याज कारोबारी नेमीचंद सांई ने बताया कि सीकर के प्याज में पानी की मात्रा ज्यादा होने के कारण टिकाऊपन कम रहता है। यहां के किसानों को राहत देने के लिए सीकर में जयपुर या दिल्ली की तरह रेलवे की ओर से परिवहन व्यवस्था की जाए तो किसानों को बेहतर भाव मिल सकेंगे। वहीं जिले में खंडेला व गुरारा क्षेत्र के प्याज में परत ज्यादा होने व पानी की मात्रा कम है।

एक एकड़ प्याज की खेती में एक लाख का खर्चा

एक एकड़ प्याज की खेती पर एक लाख रुपए से ज्यादा लागत आती है। ऐसे में प्याज की औसतन उपज की लागत करीब 15 रुपए प्रति किलो तक आंकी जाती है। इससे कम भाव मिलने पर किसान को नुकसान होता है। प्याज के पौधे को लगाने, खरपतवार हटाने और कटाई से लेकर इनके कट्टों में पैक करने और मंडी तक लाने में लाखों रुपए खर्च हो जाते हैं।

इसलिए मीठा है प्याज

सीकर जिले में प्याज उत्पादक क्षेत्रों की मिट्टी में पोटाश-सल्फर की संतुलित मात्रा है। जिसके कारण यहां के प्याज में मिठास बढ़ जाती है। सीकर में प्याज की फसल साल में दो बार बोई जाती है।

मीठा है, इसलिए हर साल बढ़ रही डिमांड

सीकर का मीठा प्याज सामान्य प्याज की तुलना में अलग और हल्का होता है। यही कारण है कि बड़े शहरों, होटलों में इसकी मांग साल भर बनी रहती है। यहां का प्याज दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और गुजरात की मंडियों तक सप्लाई हो रहा है। धोद क्षेत्र में प्याज की खेती 1990 से शुरू हुई थी।

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