
सीकर। प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर सख्ती के बाद अब नॉन प्रैक्टिस एलाउंस (एनपीए) को लेकर चिकित्सकों में हलचल तेज हो गई है। सरकार के निर्देशों के तहत चिकित्सकों को निजी प्रैक्टिस से दूर रहने को कहा गया है, जिसके बाद कई सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों ने एनपीए दिए जाने की मांग शुरू कर दी है। इसी क्रम में कल्याण अस्पताल के 60 चिकित्सकों ने प्रशासन से नियमों के अनुरूप नॉन प्रैक्टिस एलाउंस स्वीकृत करने की मांग की है। चिकित्सकों का कहना है कि सरकार के निर्देशों के बाद उन्होंने निजी प्रैक्टिस पूरी तरह बंद कर दी है, ऐसे में उन्हें नियमानुसार नॉन प्रैक्टिस एलाउंस दिया जाना चाहिए। वहीं कई चिकित्सकों का तर्क है कि निजी प्रैक्टिस पर रोक लगने से उनकी अतिरिक्त आय का स्रोत समाप्त हो गया है, ऐसे में उन्हें मूल वेतन का निर्धारित प्रतिशत एनपीए के रूप में दिया जाना चाहिए। चिकित्सकों का कहना है कि सरकार के निर्देशों के बाद उन्होंने निजी प्रैक्टिस पूरी तरह बंद कर दी है, ऐसे में उन्हें नियमानुसार नॉन प्रैक्टिस एलाउंस दिया जाना चाहिए।
एनपीए लेने वाले चिकित्सकों में कल्याण अस्पताल और मेडिकल काॅलेज के चिकित्सक भी शामिल है। जिनमें क्लीनिक और नॉन क्लीनिकल श्रेणी के चिकित्सक है। इन चिकित्सकों में मेडिकल कॉलेज के 44 और कल्याण अस्पताल के 60 चिकित्सक शामिल है। इन सभी चिकित्सकों ने अस्पताल और काॅलेज प्रबंधन को जनवरी माह से नॉन प्रेक्टिस एलाउंस के लिए आवेदन दिया है। इस सूची को स्वास्थ्य विभाग जयपुर और राजस्थान मेडिकल एज्यूकेशन सोसाइटी को भिजवाया जाएगा। इस सूची में शामिल चिकित्सकों के प्रेक्टिस करने संबंधी जानकारी ली जाएगी। गौरतलब है कि पूर्व में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जहां एनपीए लेने के बावजूद गुपचुप तरीके से निजी प्रैक्टिस जारी रही।
प्रदेश स्तर से निर्देश के बाद अस्पताल और काॅलेज प्रबंधन से एनपीए लेने वाले चिकित्सकों की सूची मांगी गई है। एनपीए के लिए चिकित्सकों ने संबंधित प्रबंधन को आवेदन किया है। सूची को जयपुर भेजा जाएगा।
डॉ. केके अग्रवाल, अधीक्षक कल्याण अस्पताल
Published on:
29 Jan 2026 11:19 am

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