
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा (फोटो: पत्रिका)
Patrika Exclusive: बदलते दौर में अब प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर का पैटर्न भी लगातार बदल रहा है। पिछली सरकार के समय कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों के बाद पेपर सेटर्स की ओर से लगातार सवाल पूछने का तरीका बदला जा रहा है। पिछले दो साल में हुई कई प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न पत्रों में एआइ का भी असर दिखा है।
असिस्टेंट प्रोफेसर, स्कूल व्याख्याता, पुलिस सब इंस्पेक्टर टेलीकॉम, सांख्यिकी अधिकारी, पशु परिचर, प्लाटून कमाण्डर, तृतीय श्रेणी शिक्षक, विकास अधिकारी पुलिस कांस्टेबल, पटवारी व चतुर्थ श्रेणी आदि का पेपर पैटर्न अब तक युवाओं में चर्चा में है।
यूपीएससी की तर्ज पर राजस्थान लोक सेवा आयोग व चयन बोर्ड के पेपर तैयार कराने की वजह से पेपर स्तरीय होने के साथ-साथ कठिनाई का स्तर भी बढ़ा है। इस वजह से कई परीक्षाओं में युवा न्यूनतम 40 फीसदी अंक भी हासिल नहीं कर सके।
ऐसे में पिछले दो साल में कई भर्तियों में पद भी खाली रह गए है। नए पेपर पैटर्न की वजह से परीक्षा का समय प्रबंधन भी चुनौती बन गया है। तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में कई विषयों का पेपर काफी लंबा आने की वजह से कई युवा पूरा पेपर भी हल नहीं कर सके।
संस्कृत शिक्षा विभाग में सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा सहित कई भर्तियों में स्तरीय पेपर की वजह पद भी खाली रह गए है। 200 पदों के लिए आयोजित संसकृत शिक्षा की सहायक आचार्य भर्ती में धर्मशास्त्र, यजुर्वेद और ज्योतिष फलित आदि विषयों के छह पदों पर एक भी अभ्यर्थी चयनित नहीं हो सका। इसके अलावा महिला अधिकारिता विभाग की प्रोटेक्शन ऑफिसर, कॉलेज शिक्षा व स्कूली शिक्षा के अलावा कई विभागों की भर्तियों में पद रिक्त रह गए।
प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर पैटर्न में लगातार तकनीक का प्रयोग बढ़ रहा है। शिक्षा सहित अन्य विभागों की बड़ी भर्तियों के प्रश्न पत्र में एआइ का असर भी सामने आया। यूपीएससी की तर्ज पर प्रश्न पत्र काफी स्तरीय आने से लगातार तैयारी में जुटे रहने वाले युवाओं को काफी फायदा मिल रहा है।
डॉ. हितेश शर्मा, कॅरियर काउंसर
Published on:
29 Jan 2026 01:32 pm

बड़ी खबरें
View Allसीकर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
