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शिवपुरी, Jun 02, 2026

‘हवा-पानी से डरने लगा था’: बिल्ली के पंजे की खरोंच के बाद रेबीज से शिवपुरी के बच्चे की मौत

Cat Scratch: ग्वालियर के शासकीय कमलाराजा अस्पताल में चल रहा था 13 साल के बच्चे का इलाज, दिमाग तक गंभीर इंफेक्शन फैलने के कारण हुई मौत।

shivpuri

13 year old boy dies of rabies after cat scratch (source- file photo)

Shivpuri Cat Scratch Rabies Infection: मध्यप्रदेश के शिवपुरी से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, घटना जिले के करैरा की है। करैरा के रहने वाले एक 13 साल के बच्चे की बिल्ली के पंजा मारने के बाद रेबीज इंफेक्शन फैलने से मौत हो गई। रेबीज के कारण हुई बच्चे की दर्दनाक मौत ने सबको झकझोर कर रख दिया है। समय पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन न लगवाने की मामूली सी लापरवाही के चलते बच्चे के शरीर में संक्रमण इस कदर फैल गया कि अस्पताल में डॉक्टरों के तमाम प्रयास के बावजूद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

बिल्ली ने मारा था पंजा

शिवपुरी जिले के करैरा के रहने वाले 13 वर्षीय बच्चे को बिल्ली ने पंजा मार दिया था। बिल्ली के पंजा मारने के बाद बच्चे के शरीर पर खरोंच आई थी। परिजनों ने इसे बेहद सामान्य बात समझा और बच्चे को डॉक्टर को दिखाने या एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने की जरूरत नहीं समझी। सोमवार सुबह को अचानक से बच्चे का व्यवहार अजीब होने लगा। हालत बिगड़ती देख परिजन उसे ग्वालियर लेकर भागे, लेकिन नाजुक हालत देखकर निजी डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद परिजन उसे ग्वालियर कमलाराजा अस्पताल लेकर पहुंचे।

हवा-पानी से डरने लगा था, मुंह से बहने लगी थी लार

परिजन बदहवास हालत में दोपहर को बच्चे को जेएएच लेकर पहुंचे। तब तक संक्रमण बच्चे के दिमाग और पूरे नर्वस सिस्टम को जकड़ चुका था। बच्चा बेहद आक्रामक हो चुका था, उसके मुंह से लगातार लार बह रही थी। सबसे डरावना लक्षण यह था कि वह पानी को देखते ही और ठंडी हवा में आते ही बुरी तरह चीखने-चिल्लाने लगता था (जिसे मेडिकल भाषा में हाइड्रोफोबिया कहते हैं, यह रेबीज का आखिरी व लाइलाज चरण है)। डॉक्टरों ने उसे पीडियाट्रिक आईसीयू में शिफ्ट किया, लेकिन महज कुछ ही घंटों में मासूम की सांसें थम गईं।

पूरे शरीर में फैल चुका था इंफेक्शन

जीआरएमसी के पीडियाट्रिक विभाग के प्रभारी एचओडी डॉ. घनश्याम व्यास ने बताया कि बिल्ली के पंजा मारने के बाद बच्चे को रेबीज की अंतिम स्टेज में अस्पताल लाया गया था। हमारी टीम ने इलाज शुरू किया, लेकिन संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंचने के कारण उसकी मौत हो गई। लोग अक्सर बिल्ली या बंदर के खरोंचने को हल्के में लेते हैं, जबकि इनके नाखून और लार में भी रेबीज के वायरस होते हैं। ऐसी किसी भी घटना के तत्काल बाद घाव को साबुन से धोएं और 24 घंटे के भीतर एंटी-रेबीज का पहला शॉट जरूर लगवाएं।

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