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जिस लाश को पुलिस ने जानवर समझकर फेंका वह इंसान की निकली; सनसनीखेज मामला जानकर चकरा जाएगा सिर!

Crime News: जिस लाश को पुलिस ने जानवर समझ कर फेंका वह इंसान की निकली। 4 सालों बाद सनसनीखेज केस का खुलासा हुआ। जानिए पूरा मामला क्या है?

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जिस लाश को पुलिस ने जानवर समझ कर फेंका वह इंसान की निकली। फोटो सोर्स-AI

Crime News: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने जिस शव को पशु का बताकर फेंक दिया वह अभिषेक यादव का निकला। 5 साल पहले अग्निकांड में अभिषेक के अधजले शव को कई लोग मानव का बता रहे थे लेकिन पुलिस सुनने को तैयार नहीं थी। उनके पिता 2 सालों तक थानों के चक्कर लगाते रहे। जिसके बाद पुलिस ने शव के अवशेष DNA जांच को भेजे।

शाहजहांपुर न्यूज: जांच रिपोर्ट ने पुलिस की लापरवाही की पर्ते उधेड़ी

मंगलवार को आई जांच रिपोर्ट ने पुलिस की लापरवाही की पर्ते उधेड़ दीं। मामले को लेकर उनके पिता ने दुकान मालिक नईम और उसके साथी राजू पर हत्या की FIR दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि दुकानदार ने अभिषेक को जलाकर मारा और इसे अग्निकांड का रूप दे दिया गया। पुलिस ने बुधवार को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

क्या था पूरा मामला

दरअसल, रोजा बस अड्डा स्थित नईम की मोबाइल की दुकान में 19 दिसंबर 2020 को रात में आग लग गई थी। जांच में पुलिस को शव के अवशेष मिले थे। इस दौरान पुलिस को कड़ा और ताबीज भी मिला था। पशु के अवशेष बताते हुए पुलिस ने तालाब किनारे कचरे में फिंकवा दिए। लोगों ने उस दौरान अवशेष किसी मानव के होने की आशंका जताई थी। जिसके बाद दबाव में आई पुलिस ने पशु चिकित्साधिकारी को बुलाया। उनकी जांच से स्पष्ट हो गया कि अवशेष पशु के नहीं, बल्कि इंसान के थे।

शाहजहांपुर: पुलिस ने जानवर समझ कर फेंका, इंसान की निकली लाश

बावजूद इसके पुलिस ने दांत, हड्डियों के बचे हिस्से, कड़ा और ताबीज थाने में रखवाकर मामले पर पर्दा डाल दिया। आग में कौन जला, इसकी पड़ताल पुलिस ने नहीं की। वहीं, स्थानीय निवासी अभिषेक 19 दिसंबर से ही लापता थे। अगले दिन अभिषेक के पिता रामौतार ने रामचंद्र
मिशन थाने पहुंचकर बताया कि बेटा अभिषेक पाप्स फैक्ट्री में नौकरी करता था। वह ढाबे पर खाना खाने गया, तभी से लापता है।

Shahjahanpur: नहीं मानी मृतक के पिता ने हार

मृतक के पिता रामौतार ने रोजा क्षेत्र में मिले शव के अवशेष पर संदेह जताया, लेकिन पुलिस ने टरका दिया। उन्होंने SP से शिकायत की। जिसके बाद 15 जनवरी 2021 को रामचंद्र मिशन थाने में गुमशुदगी दर्ज हो सकी। एक साल तक पुलिस एक कदम भी नहीं चली तो रामौतार दोबारा SP के पास पहुंचे। जांच के नाम पर टालमटोल चलती रही, लेकिन रामौतार ने हार नहीं मानी। लगातार वह अफसरों के कार्यालय के चक्कर लगाते रहे।

DNA जांच के बड़ा खुलासा

नवंबर 2022 में पुलिस ने रामौतार, उनकी पत्नी सुमन और शव के अवशेषों के सैंपल DNA जांच को भेजे। मंगलवार को आई DNA रिपोर्ट में अधजले शव के अवशेष अभिषेक के होने की पुष्टि हो गई। जिसके बाद मृतक की मां सुमन ने तहरीर दी कि बेटे अभिषेक का दुकान स्वामी नईम व राजू से विवाद हुआ था। उन दोनों ने ही अभिषेक की हत्या कर शव को बोरे में भरकर दुकान में जला दिया।

मामले को लेकर CO सिटी ने क्या कहा?

मामले को लेकर CO सिटी पंकज पंत का कहना है कि DNA जांच में शव अभिषेक का होने की पुष्टि हुई है। उनकी मां की तहरीर के आधार पर 2 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवा दी गई है। अभिषेक के खिलाफ पूर्व में चोरी की FIR दर्ज थी। ऐसे में हर बिंदु पर गंभीरता से जांच की जाएगी।