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सवाई माधोपुर, Apr 20, 2026

रणथम्भौर में इतिहास रच रहा कूनो से आया चीता, पहली बार ROPT रेंज में रखा कदम

मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से आया चीता केपीए-2 पिछले कई दिनों से रणथम्भौर की सीमा में घूम रहा है। यह फलौदी रेंज से निकलकर आरओपीटी रेंज में पहुंच गया।

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रणथम्भौर की आरओपीटी रेंज में आया चीता। फोटो: पत्रिका

सवाईमाधोपुर। मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से आया चीता केपीए-2 पिछले कई दिनों से रणथम्भौर की सीमा में घूम रहा है। यह फलौदी रेंज से निकलकर आरओपीटी रेंज में पहुंच गया। वर्तमान में इसका मूवमेंट कुशालीपुरा क्षेत्र के आसपास बताया जा रहा है। गौरतलब है कि बाघों की नगरी रणथम्भौर इन दिनों चीते की मौजूदगी से चर्चा में है।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह पहला अवसर है जब रणथम्भौर की आरओपीटी रेंज में किसी चीते ने दस्तक दी है। इससे पहले भी एमपी से निकलकर कई बार चीते राजस्थान के जंगलों में आ चुके हैं, लेकिन आरओपीटी रेंज में यह पहली बार आया है।

चीते की लगातार ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग जारी

एहतियातन कूनो और रणथम्भौर वन विभाग की टीमें चीते की लगातार ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि चीते की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और स्थानीय वन्यजीवों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

वन विभाग की ओर से अब तक ट्रैकुलाइज नहीं

मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकलकर रणथम्भौर की फलौदी और अब आरओपीटी रेंज में विचरण कर रहे चीते को वन विभाग की ओर से अब तक ट्रैकुलाइज नहीं किया गया है। विभाग की टीमें लगातार उसकी ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग कर रही है। आमतौर पर जब भी चीते कूनो से निकलकर राजस्थान की सीमा में आए हैं, कूनो की टीम उन्हें ट्रैकुलाइज कर वापस ले जाती रही है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है, जिससे वन्यजीव प्रेमियों के बीच चर्चा बनी हुई है।

बीस दिन पहले इटावा खातौली में किया था ट्रैकुलाइज

वनाधिकारियों ने बताया कि करीब बीस दिन पहले यही चीता बूंदी के इटावा खातौली के जंगलों में पहुंच गया था। उस समय कूनो वन विभाग की टीम ने उसे ट्रैकुलाइज कर वापस कूनो ले जाया गया था। कुछ ही दिनों बाद यह पुनः कूनो से निकलकर रणथम्भौर में आ गया।

इनका कहना है

कूनो से आया चीता फलौदी रेंज से निकलकर आरओपीटी रेंज में पहुंचा है। वर्तमान में इसका मूवमेंट कुशालीपुरा के आसपास बना हुआ है और विभाग की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है।
-मानस सिंह, उपवन संरक्षक रणथम्भौर बाघ परियोजना सवाईमाधोपुर।

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