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फिल्टर प्लांट पर लैब तो है, लेकिन टेक्नीशियन नहीं, जांच के नाम पर होती है खानापूर्ति

सीएमओ ने कहा उपयंत्री से कराते हैं जांच, हर माह पीएचइ से भी कराई जाती है जांच

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There is a lab at the filter plant, but no technicians; only a formality is done in the name of testing.

फिल्टर प्लांट स्थित लैब

बीना. नगर में पानी सप्लाई के लिए नया फिल्टर प्लांट 2025 में बनाया गया है और पानी की जांच के लिए लैब भी तैयार की गई है, लेकिन अभी तक टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं हो पाई है। फिल्टर पर कार्य कर रहे कर्मचारी ही पानी की कुछ जांचें कर देते हैं और इसके बाद पानी की सप्लाई कर दी जाती है।
फिल्टर प्लांट का निर्माण जिस कंपनी ने किया था, उसी कंपनी ने कुछ दिन प्लांट का संचालन भी किया था। इसके बाद प्लांट नगर पालिका को सौंप दिया था और कई वर्ष बीत जाने के बाद भी लैब टेक्नीशियन नियुक्त नहीं हो पाया है। यहां पदस्थ कर्मचारी ही पीएच और क्लोरीन लेवल की जांच कर लेते हैं। जबकि प्रत्येक दिन टर्बिडिटी, पीएच, अवशिष्ट क्लोरीन, रंग व गंध की जांच होना चाहिए। इसके अलावा साप्ताहिक और मासिक जांचों में टीडीएस, हार्डनेस, क्लोराइड, आयरन, फ्लोराइड, नाइट्रेट की जांच होना जरूरी है। यह मुख्य जांचें हैं और इसके बाद ही पानी की शुद्धता का पता चलता है। लैब में सभी उपकरण हैं और यहां टेक्नीशियन की नियुक्ति हो जाए, तो नियमित जांचें हो सकेंगी।

घरों में पहुंचने वाले पानी के नहीं होते सैंपल
फिल्टर प्लांट से पानी टंकी में आता है और फिर घरों तक पहुंचता है। जिन लाइनों से घरों में पानी पहुंच रहा है वह कई जगह गंदे नाले, नालियों के बीच से निकली हैं। इसके बाद भी घरों में पहुंचने वाले पानी के कभी सैंपल लेकर जांच नहीं की जाती है, जिससे यह पता नहीं चल पाता है कि पाइप लाइन से घरों तक पहुंच रहे पानी में कोई हानिकारक तत्व तो नहीं हैं। लोगों की शिकायत करने के बाद भी नगर पालिका कर्मचारी जांच करने पहुंचते हैं।

उपयंत्री से कराते हैं जांच
लैब में टेक्नीशियन नहीं हैं, लेकिन फिल्टर प्लांट प्रभारी उपयंत्री से जांच कराई जाती है। साथ ही हर माह पीएचइ विभाग से भी जांच कराई जाती है। निकाय द्वारा टेक्नीशियन की नियुक्ति नहीं होती है।
राहुल कुमार कौरव, सीएमओ, बीना