सागर, May 14, 2026

कथा सुनाती हुईं जय किशोरी। फोटो-पत्रिका
बीना. खुरई रोड पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचक जया किशोरी ने भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन किया और पूतना वध, माखन चोरी, गोवर्धन महाराज की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि भगवान का नामकरण होता है, तो उनका नाम कृष्ण रखा जाता है। इस नाम का अर्थ है, जो सबको अपनी ओर आकर्षित कर ले। कृष्ण पूर्ण अवतार माने गए हैं, क्योंकि उनमें सभी कलाएं हैं और भगवान ने प्रेम किया, ज्ञान दिया, युद्ध सहित सबकुछ किया है। उन्होंने कहा कि बचपन में शरारती होना अच्छा है, क्योंकि बड़े होकर जिम्मेदारियां और दुनिया शांत करा देती है। अपने आप सबकुछ कम हो जाएगा, इसलिए जब तक संसार के इस जाल में नहीं पड़े हो उत्सव मना लेना चाहिए। कथा वाचक ने कहा कि प्रेम तभी करोगे जब अपनत्व होगा और जिस दिन ईश्वर से प्रेम हो गया, तब लगेगा इससे बड़ा कुछ है ही नहीं। भगवान जल्दी किसी को अपनाते नहीं हैं, अपनाने के पहले परीक्षा लेते हैं, कष्ट देते हैं और परीक्षा पास करने पर कैसी भी परिस्थिति हो भगवान हाथ नहीं छोड़ते हैं। बुरा करने पर भी भगवान सीधे दंड नहीं देते हैं, पहले सुधारने की कोशिश करते हैं और नहीं मानने पर ऐसा दंड देते हैं कि रूह कांप जाती है। उन्होंने पूतना वध का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब कंस को पता चलता है कि कृष्ण गोकुल में हैं, तो पूतना राक्षसी को मारने के लिए भेजते हैं। जब पूतना भगवान को गोद में लेकर दूध पिलाती है, तो भगवान प्राण भी पी लेते हैं।
गोवर्धन महाराज की सुनाई कथा
कथा वाचक ने कहा कि नंदबाबा इंद्र की पूजन कर रहे थे, तो भगवान ने गोवर्धन पर्वत की पूजन करने की प्रेरणा दी, जिससे इंद्र नाराज हो जाते हैं और भारी वर्षा करते हैं। भगवान ने ब्रजवासियों को बचाने के लिए एक अंगुली पर सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को उठाकर रखा और इंद्र के अहंकार को नष्ट किया था। उन्होंने भगवान को छप्पन भोग लगाने का कारण बताते हुए कहा कि यशोदा मैया भगवान को दिन में आठ बार भोजन कराती थीं और उन्होंने सात दिन तक गोवर्धन पर्वत उठाया था, आठवें दिन छप्पन प्रकार का भोजन कराया था।
Published on: 14 May 2026 12:08 pm

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