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छपरेट घाट पर बना डैम हुआ जर्जर, फिर भी नहीं की जा रही मरम्मत

बारिश के तेज बहाव में ढह सकता है डैम, सिंचाई विभाग का है डैम, 17 वर्ष पूर्व किया गया था तैयार

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The dam at Chhapret Ghat is dilapidated, yet repairs are not being carried out.

जर्जर डैम

बीना. बीना नदी के छपरेट घाट पर सिंचाई विभाग ने डैम बनाया है और इसी डैम से रेलवे, नगर पालिका फिल्टर प्लांट के इंटकवेल का पानी सुरक्षित रहता है। वर्षों पुराने इस डैम के पिलर जर्जर होने लगे हैं, जिससे बारिश में पानी के तेज बहाव से इसके कुछ पिलर बह सकते हैं।
जानकारी के अनुसार करीब 17 वर्ष पूर्व यह डैम बनाया गया था और इसमें 68 गेट लगे हुए हैं। जिन पिलरों में यह गेट लगे हैं, उनमें कुछ जर्जर हो गए हैं। इसके बाद भी इनकी मरम्मत नहीं की जा रही है। डैम की देखरेख और मरम्मत का कार्य सिंचाई विभाग कुरवाई करता है। डैम के कुछ पिलर के नीचे का फाउंडेशन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और पिलर बीच से भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। विभाग के कर्मचारी जब डैम के गेट लगाने और खोलने के लिए आते हैं, तब भी यहां ध्यान नहीं दिया जाता है, जिससे साल दर साल स्थिति खराब होती जा रही है। जबकि इस डेम से ही रेलवे और नगर पालिका के इंटकवेल का पानी सुरक्षित रहता है, जिससे शहरवासियों, रेलवे क्षेत्र में गर्मियों के मौसम तक पानी मिल पाता है। डैम के कुछ गेट भी खराब होने लगे है, जिससे पानी लीक होता है।

छोटा पड़ने लगा है डैम
शहर का दायरा और आबादी बढऩे के बाद डेम छोटा पडऩे लगा है और बड़े डैम की जरूरत है। क्योंकि नल कनेक्शनों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिससे पानी की खपत भी बढ़ी है। भविष्य के हिसाब से इंटकवेल के पास बड़ा डेम बन जाए, तो बारिश के पानी का पर्याप्त स्टाक हो जाएगा।

कराएंगे जांच
यदि डैम क्षतिग्रस्त हो रहा है, तो उसकी जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर मरम्मत कराएंगे।
अमृता सिंघई, एसडीओ, जल संसाधन विभाग

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