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छठ मईया की पूजा कर गाए गीत, व्रतधारी महिलाओं ने घाट पर लगाई आस्था की डुबकी, माथे पर सजाया आस्था का सिंदूर

लोक आस्था के छठ महापर्व पर बरियाघाट में भोजपुरी व पूर्वांचल समाज के लोगों ने अस्त होते सूर्यदेव को अर्घ्य देकर पूजा-आराधना की। छठ मईया की पूजा कर उनके गीत गाए। इसके पूर्व व्रतधारी महिलाओं ने घाट पर आस्था की डुबकी लगाई।

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सागर

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Reshu Jain

Oct 28, 2025

puja

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बरियाघाट पर हुआ मुख्य आयोजन, भोजपुरी व पूर्वांचल समाज के लोग जुटे

सागर . लोक आस्था के छठ महापर्व पर बरियाघाट में भोजपुरी व पूर्वांचल समाज के लोगों ने अस्त होते सूर्यदेव को अर्घ्य देकर पूजा-आराधना की। छठ मईया की पूजा कर उनके गीत गाए। इसके पूर्व व्रतधारी महिलाओं ने घाट पर आस्था की डुबकी लगाई। पूजा घाट पर दोपहर 3 बजे से ही भोजपुरी लोग गीत-संगीत गूंजने लगे थे। छठी मैया के गीत व भजन प्रस्तुत कर भक्ति रस बरसाया। पूजा के दौरान गीत गूंज रहे थे सुन लो अरजिया हमार हे छठी मैया... बढ़े कुल और परिवार करिह क्षमा छठी मईया भूल चूकनवा हमार लिहिएं अरगिया है मइया, दिहीं आशीष हजार, हे छठी मैया... आदि गीत फिजा में गूंज रहे थे। इस वर्ष मुख्य आयोजन बरियाघाट पर ही किया गया। व्रतधारी लोगों ने 36 घंटे का निर्जला व्रत भी रखा। पूजा का समापन मंगलवार को उदित होते सूर्य को आर्य देने के साथ होगा।दोपहर में पूजा-अर्चना के बाद शाम को एक सूप में नारियल, पांच प्रकार के फल, और पूजा का अन्य सामान टोकरी में अपने सिर पर रखकर व्रतधारी छठ घाट पर पहुंचे। उनके साथ महिलाएं छठी मैया के गीत गाते हुए चल रही थीं। घाट पर नारियल चढ़ाया गया और दीप जलाया गया। सूर्यास्त से कुछ समय पहले सूर्य देव की पूजा का सारा सामान लेकर व्रतधारी घुटने भर पानी में खड़े हो गए और डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देकर पांच बार परिक्रमा की।आज उदय होते सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य

शनिवार को नहाय खाय के साथ छठ महापर्व शुरु हुआ था। दूसरे दिन रविवार को खरना पूजन के तहत घरों में विशेष पकवान व प्रसादी बनाकर पूजन किया गया। सोमवार को छठ पूजन का मुख्य आयोजन लाखा बंजार झील बरियाघाट पर हुआ। मंगलवार को उदय होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। व्रती महिलाएं पानी में खड़े होकर भगवान सूर्य को प्रणाम कर परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करेंगी। लोगों को ठेकुआ व फल प्रसाद के रूप में बांटे जाएंगे। इसी के साथ महापर्व का समापन होगा। छठ पूजन समिति के विकास शर्मा ने बताया कि सुख-समृद्धि तथा मनोवांछित फल के लिए स्त्री और पुरुष समान रूप से यह पर्व मनाते हैं।

मांग भरकर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दियामकरोनिया के राधा कृष्ण मंदिर 10 वीं बटालियन व आनंद नगर स्थित शिव शक्ति मंदिर में भी अस्ताचलगामी सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया गया। व्रतधारी महिलाओं ने सुहागिनों की रस्मानुसार मांग भरकर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दिया। व्रतधारियों ने बताया कि सूर्य भगवान को कार्तिक मास में खेतों में उपजे सभी नए कन्द-मूल, फल-सब्जी, मसाले व अन्नादि, गन्ना, ओल, हल्दी, नारियल, नीबू, केले आदि चढ़ाए। छठ व्रत नियम व निष्ठा से किया जाता है। भक्ति-भाव से किए गए इस व्रत से धन-धान्य की प्राप्ति होती है और जीवन सुख-समृद्धि से परिपूर्ण रहता है।

यह है कथा

कथा के अनुसार जब पांडव सारा राजपाट जुए में हार गए, तब भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर द्रौपदी ने छठ व्रत रखा और पांडवों को राजपाट वापस मिला। लोक परंपरा के अनुसार सूर्यदेव और छठी मैया का संबंध भाई-बहन का है। लोक मातृका षष्ठी की पहली पूजा सूर्य ने ही की थी। सूर्य की शक्तियों का मुख्य स्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ में सूर्य के साथ-साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण (ऊषा) और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अर्घ्य दिया जाता है।