
CM Mohan Yadav will inaugurate Bhairavnath Temple (फोटो सोर्स : @DrMohanYadav51)
MP News: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 31 जनवरी को एक दिवसीय प्रवास पर रीवा आएंगे। इस दौरान वे गूढ़ विधानसभा क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में भैरवनाथ मंदिर का लोकार्पण करेंगे। दोपहर 1 बजे मुख्यमंत्री गुड़ के समीप ग्राम खामडीह स्थित भैरवनाथ मंदिर(Bhairavnath Temple) परिसर में आयोजित समारोह में शामिल होंगे। सहमडीह में भैरव बाबा की विशाल एवं प्राचीन प्रतिमा स्थापित है, जो दुर्लभ सयन मुद्रा में है।
स्थापत्य कला की दृष्टि से यह प्रतिमा लगभग 10वीं शताब्दी के कल्पुरि काल की मानी जाती है। वर्षों तक यह प्रतिमा खुले आसमान के नीचे स्थित थी। शासन की एलएडी योजना के अंतर्गत प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार एवं अन्य निर्माण कार्य कराए गए हैं। भैरव बाबा की विशाल प्रतिमा के चारों ओर दो मंजिला मंदिर का निर्माण किया गया है, जिसकी कुल लागत 1.80 करोड़ रुपए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव(CM Mohan Yadav) मंदिर पहुंचकर भगवान भैरवनाथ की पूजा-अर्चना करेंगे तथा ध्वज चढ़ाएंगे। इसके बाद वे जनसभा को संबोधित करेंगे। समारोह में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, सांसद जनार्दन मिश्र, विधायक नागेंद्र सिंह, दिव्यराज सिंह, सिद्धार्थ तिवारी, नरेंद्र प्रजापति, जिला पंचायत अध्यक्ष नीता कोल, भाजपा जिला अध्यशा वीरेंद्र गुप्ता सहित अन्य उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर रुपए मुख्यमंत्री 17 करोड़ 13 लाख रुपए की लागत से पूर्ण हुए चार निर्माण कार्यों का लोकार्पण करेंगे तथा शासन की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी करेंगे।
ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध रहा है। विध्य क्षेत्र प्राधीन मंदिरों और किंग और बुंदेलखंड के विभिन्न अवलों में चैव कालीन, राजपूत कालीन तथा कल्चुरि चालीन स्थापत्य के उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिलते हैं। प्राचीन मूर्तिकला का एक अद्भुत और दुर्लभ उदाहरण गुढ़ विधानसभा क्षेत्र के समीप ग्राम आमडीह में स्थित भैरवनाथ बाबा की विशाल प्रतिमा है।
यह प्रतिमा भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव की देश की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में से एक मानी जाती है। अद्भुत शयन मुद्रा में निर्मित निर्मित यह यह प्रतिमा अपनी भव्यता और सौंदर्य के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। प्रतिमा की लंबाई 8.5 मीटर तथा चौड़ाई 3.7 मीटर है। वर्षों तक यह प्रतिमा विश्य की प्रमुख कैमौर पता माला की गोद में खुले आसमान के नीधे स्थित रही।
शासन की एलएडी योजना के अंतर्गत अब इसके चारों ओर दो मंजिला मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर परिसर में सामुदायिक भवन, आठ दुकानें एवं अन्य सहायक निर्माण कार्य भी कराए गए हैं। माना जाता है कि भैरवनाथ की यह विशाल प्रतिमा 10वीं से 11वीं शताब्दी के मध्य कल्पुरि काल में निर्मित कराई गई थी। शयन मुद्रा में यह प्रतिमा एक ही विशाल पत्थर से बनाई गई है।
काले रंग के बलुआ पत्थर से निर्मित यह मूर्ति शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। भैरवनाथ के चेहरे पर रौद्र भाव के साथ असीम शांति का भाव स्पष्ट रूप से झलकता है। चतुर्भुज रूप में अंकित इस प्रतिमा के दाहिने ऊपरी हाथ में सृष्टि के पालन और संहार का प्रतीक त्रिशूल है, जबकि नियाले दाहिने हाथ में ध्यान और भक्ति का प्रतीक रुचाउदक्ष माला सुशोभित है। ऊपरी बाएं हाथ में तीन शीषों वाला सर्प लिपटा हुआ है, जो जितावित कर प्रतीक माना जाता है। बाएं निचले हाथ में बीज और फल दर्साए गए हैं. जो जो उर्वरता और सूजन शक्ति के प्रतीक हैं।
Updated on:
31 Jan 2026 10:19 am
Published on:
31 Jan 2026 10:16 am

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