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Holika Dahan 2026: अग्नि में क्या डालें और क्या नहीं, होलीका दहन की राख घर पर कहां रखें… जानिए ऐसी खास बातें

Holika Dahan 2026: होली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है। इस दिन लोग अग्नि प्रज्वलित कर भगवान से प्रार्थना करते हैं कि जीवन की सभी नकारात्मक शक्तियां भस्म हो जाएं और सुख-समृद्धि का आगमन हो।

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भारत

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MEGHA ROY

Feb 27, 2026

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What not to put in Holika Dahan fire|फोटो सोर्स- Chatgpt

Holika Dahan 2026, Holika Dahan Kab Hai: 2 मार्च 2026 को मनाया जाने वाला Holika Dahan केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि नकारात्मकता को जलाकर नई सकारात्मक शुरुआत करने का पवित्र अवसर है। इस रात की अग्नि को बेहद शक्तिशाली और शुद्धिकारी माना जाता है। मान्यता है कि सही विधि से किया गया होलिका दहन घर में सुख-समृद्धि और सुरक्षा का आशीर्वाद देता है। लेकिन कई बार अनजाने में की गई छोटी गलतियां इसका फल कम कर सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि इस खास रात से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातों को पहले ही जान लिया जाए।

होलिका में आग लगाने का क्या मतलब है?

पौराणिक कथा के अनुसार Prahlada की अटूट भक्ति और होलिका के दहन की घटना ही इस पर्व का आधार मानी जाती है। जब अहंकारी Hiranyakashipu ने अपने पुत्र को भगवान की भक्ति से रोकना चाहा, तब अंततः सत्य और श्रद्धा की विजय हुई। होलिका दहन की अग्नि अहंकार के अंत, अन्याय के विनाश, सच्ची भक्ति की शक्ति और जीवन में नई शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन लोग अपनी नकारात्मक सोच, क्रोध और ईर्ष्या को अग्नि को समर्पित कर आत्मशुद्धि का संकल्प लेते हैं।

होलिका दहन की अग्नि में क्या नहीं डालना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार Holika Dahan की पवित्र अग्नि में कुछ वस्तुओं को अर्पित करना वर्जित माना गया है। पानी वाला नारियल, सूखे या मुरझाए फूल, टूटे चावल या खराब फल, तुलसी का पत्ता, तथा पीपल, बरगद, आम और शमी जैसे पवित्र वृक्षों की लकड़ी अग्नि में नहीं डालनी चाहिए। इसके अलावा चमड़े या प्लास्टिक का सामान, कांच की वस्तुएं, टूटी-फूटी चीजें, पुरानी झाड़ू, गंदे कपड़े और चोरी का सामान भी अर्पित करना अशुभ माना जाता है। ऐसी वस्तुओं को जलाना धार्मिक दृष्टि से अनुचित और पर्यावरण की दृष्टि से हानिकारक समझा जाता है।

होलिका दहन की अग्नि में क्या डालें?

होलिका दहन के पूजन से पहले भगवान का ध्यान कर अग्नि को प्रणाम करना शुभ माना जाता है। इसके बाद श्रद्धा भाव से एक-एक कर सामग्री अर्पित की जाती है। परंपरा के अनुसार घी, गोबर के उपले, सूखा नारियल, लौंग, गेहूं की नई फसल की बालियां, चने की फली, जौ और अक्षत, गुलाल, बताशे, काले तिल व पीली सरसों, कपूर, मौसमी फल, हल्दी की गांठ, गंगाजल की कुछ बूंदें, रोली और कच्चा सूत अर्पित करना शुभ माना जाता है। नई फसल की आहुति देने का भाव प्रकृति और अन्नदाता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना होता है, जिससे समृद्धि और मंगलकामना का आशीर्वाद प्राप्त हो।

होलिका दहन की राख कहां रखें?

होलिका दहन के बाद बची हुई राख को अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इसमें अग्नि की शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा समाहित रहती है। पूरी तरह ठंडी हो चुकी राख को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखने से धन में स्थिरता और बचत बनी रहने का विश्वास है। वहीं थोड़ी-सी राख मुख्य द्वार पर छिड़कने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है। घर के दक्षिण-पूर्व में राख रखना भी शुभ माना जाता है, क्योंकि यह दिशा अग्नि तत्व से संबंधित है बस ध्यान रखें कि राख पूरी तरह ठंडी हो चुकी हो।