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उज्जैन में पता चली मध्यप्रदेश में पाए जाने वाले विषैले सर्पो की प्रजाति

रतलाम. सर्प दंश से सुरक्षा के मद्देनजर जिले से 45 प्रतिभागी उज्जैन के नाग इनफोनमेंट पार्क में प्रशिक्षण लेने गए। रतलााम से गए प्रतिभागियों को चेन्नई के प्रशिक्षक ज्ञानेश्वर ने बताया कि मध्य प्रदेश में मुख्य रूप से कोबरा, करैत, रसल वाइपर, सी स्केल्ड वाइपर ही विषैले सर्प है। मध्य प्रदेश में पाए जाने वाले […]

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Snake bite news Ratlam

जिले के 45 प्रतिभागी उज्जैन के नाग इनफोनमेंट पार्क ले रहे सर्प दंश से बचाव का प्रशिक्षण, सीख रहे सांपों के पकडऩे के तरीके, प्रारंभिक उपचार

रतलाम. सर्प दंश से सुरक्षा के मद्देनजर जिले से 45 प्रतिभागी उज्जैन के नाग इनफोनमेंट पार्क में प्रशिक्षण लेने गए। रतलााम से गए प्रतिभागियों को चेन्नई के प्रशिक्षक ज्ञानेश्वर ने बताया कि मध्य प्रदेश में मुख्य रूप से कोबरा, करैत, रसल वाइपर, सी स्केल्ड वाइपर ही विषैले सर्प है। मध्य प्रदेश में पाए जाने वाले शेष प्रकार के ज्यादातर सर्प विष विहीन होते है। प्रतिभागियों को उज्जैन में आयोजित प्रशिक्षण के दौरान पता चला कि मध्यप्रदेश में कितने प्रकार के विषैले सर्प पाए जाते हैं।
जिन्हे प्रशिक्षकों ने मध्यप्रदेश में पाई जाने वाली प्रजाति, सर्प से प्रारंभिक उपचार के रूप में किसी भी सर्वप्रथम दंश के स्थान को बांधना नहीं चाहिए। सांप के काटे का स्थान को काटे नहीं, साबुन इत्यादि का बिल्कुल उपयोग नहीं करें। झाड़ फूंक टोना टोटका में समय नष्ट नहीं करें। तत्काल नजदीकी अस्पताल में ले जाकर एंटी स्नेक वेनम के इंजेक्शन लगवाना चाहिए की जानकारी दी।

सर्पो को पकडऩे के बताए तरीके
सर्प दंश से सुरक्षा परियोजना प्रशिक्षण अध्ययन एवं अनुसंधान कार्यक्रम का आयोजन उज्जैन के नाग एनफोनमेंट पार्क में आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण 23 जनवरी तक आयोजित होगा। रत्नेश विजयवर्गीय जिला समन्वयक जन अभियान परिषद के सहयोग से जिले के 45 प्रतिभागियों की प्रथम बैच को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस दौरान उन्हे विभिन्न सांपों के प्रकार, उन्हें पकडऩे के उचित तरीके, सर्प दंश के दौरान प्रारंभिक उपचार और उन्हें उचित प्रकार से छोडऩे के तरीकों की कार्य आधारित तकनीके सिखाई जा रही है।

चूहों की 80 प्रतिशत आबादी को सांप नियंत्रित करते
प्रशिक्षण के संबंध में मुकेश इंगले ने बताया कि मानव सांप सह अस्तित्व को बढ़ावा देना, सांपों और उनके आवासों का संरक्षण करना साथ ही जागरूकता एवं क्षमता निर्माण के माध्यम से सर्पदंश से मृत्यु मुक्त भारत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान महाराष्ट्र के प्रशिक्षक केदार भिड़े ने बताया कि सांप प्रकृति का अनुपम उपहार है। अन्न के दुश्मन चूहों की 80 प्रतिशत आबादी को सांप नियंत्रित करते हैं।

ये रहे प्रशिक्षण में शामिल
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि सांप के कान नहीं होते और दूध नहीं पीता है। प्रशिक्षण में सांप का कार्य करने वाले, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कर्मचारी, वन विभाग के कर्मचारी, आपदा प्रबंधन के कर्मचारी, जिला जन अभियान परिषद के विभिन्न सदस्य आदि ने सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान सहायक कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड, संभाग समन्वयक शिवप्रसाद मालवीय, जिला पंचायत सदस्य, जन अभियान परिषद की शासी सदस्य अजीता परमार, मुकेश इंगले एवं आशीष चौरसिया, सुमन घावरी, नवीन नागर, रामसिंह खराड़ी एवं अन्य अधिकारी कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।

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