
किसान बालुदास वैष्णव और लेमन ग्रास से तैयार प्रोडक्ट, पत्रिका फोटो
PM-FME Scheme: राजसमंद। जिले की ग्राम पंचायत खटामला में कभी पारंपरिक खेती तक सीमित रहने वाले किसान बालुदास वैष्णव आज आत्मनिर्भर भारत की उस सोच का सजीव उदाहरण बन चुके हैं, जिसकी कल्पना देश ने वर्षों पहले की थी। यह कहानी सिर्फ एक किसान की सफलता की नहीं है, बल्कि उस सरकारी नीति की है जिसने गांव, खेती और उद्यमिता को एक मजबूत सूत्र में पिरो दिया प्रधान मंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (पीएम-एफएमई) ने। योजना के तहत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम के लिए अधिकतम 10 लाख रुपए तक के क्रेडिट लिंक्ड ऋण पर किसानों को 35 प्रतिशत अनुदान का लाभ मिल रहा है।
भारत में खाद्य उद्यम क्षेत्र कुल रोजगार का लगभग 74 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है। इनमें से अधिकांश उद्यम सूक्ष्म, असंगठित और ग्रामीण पारिवारिक ढांचे से जुड़े होते हैं। यही उद्यम न केवल गांवों की अर्थव्यवस्था को संबल देते हैं, बल्कि शहरों की ओर होने वाले पलायन को भी रोकते हैं। इन्हीं चुनौतियों और संभावनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भर भारत और लोकल फॉर वोकल की सोच के तहत पीएम-एफएमई योजना की शुरुआत की।
खटामला निवासी बालुदास वैष्णव ने इस योजना को केवल एक सरकारी सहायता के रूप में नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देखा। पीएम-एफएमई योजना के तहत उन्होंने लेमन ग्रास (नींबू घास) और चुकंदर के प्रसंस्करण का कार्य शुरू किया और अपनी फर्म की भी स्थापना की।
आज बालुदास केवल खेती तक सीमित नहीं हैं वे:-
पीएम-एफएमई योजना के तहत बालुदास को सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम के लिए अधिकतम 10 लाख रुपए तक के क्रेडिट लिंक्ड ऋण पर 35 प्रतिशत अनुदान का लाभ मिला। इस सहायता से उन्होंने चाफ कटर, क्रॉप ड्रायर, ग्राइंडर और पैकेजिंग मशीन जैसी आवश्यक मशीनरी खरीदी। बालुदास ने बताया कि आज मेरे उद्यम से हो रहे मुनाफे से न केवल ऋण की किस्तें समय पर चुक रही हैं, बल्कि परिवार का भरण-पोषण और जीवन स्तर दोनों बेहतर हो गए हैं।
लेमन ग्रास की खेती की सबसे बड़ी खासियत है:-
बालुदास की सफलता यहीं नहीं रुकी। उन्होंने आसपास के किसानों मोतीलाल सालवी, अंबालाल कुमावत, नारायणलाल कुमावत, भीमराज सैन सहित कई किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर लेमन ग्रास जैसी नवाचारी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। आज खटामला और आसपास के क्षेत्र में लेमन ग्रास की खेती एक नई पहचान बना रही है।
अपने नवाचारी कृषि प्रयासों के लिए 15 अगस्त 2025 को बालुदास वैष्णव को महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के कुलपति द्वारा सम्मानित भी किया गया। यह सम्मान न केवल उनकी मेहनत की पहचान है, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता की दिशा में एक प्रेरणादायक संदेश भी है।
किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ बाजार मांग आधारित नवीन फसलों को अपनाना चाहिए। पीएम-एफएमई योजना का लाभ लेकर अपने सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम शुरू करें, ताकि मुनाफे के साथ स्वावलंबी बन सकें।
कल्प वर्मा, उप निदेशक उद्यान, राजसमंद
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Updated on:
26 Jan 2026 12:05 pm
Published on:
26 Jan 2026 11:57 am

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