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नाथद्वारा. नगर के लालबाग स्थित श्री गोवर्धन राजकीय जिला चिकित्सालय में चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। यहां डॉक्टरों की टीम ने पहली बार अत्याधुनिक वीडियो लैरिंगोस्कोपी तकनीक का उपयोग करते हुए मुश्किल इनट्यूबेशन के माध्यम से 90 वर्षीय वृद्धा के कूल्हे की हड्डी का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया। इस सफलता से न केवल अस्पताल की चिकित्सा क्षमताओं पर भरोसा बढ़ा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर गंभीर मरीजों के लिए उन्नत उपचार की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं। उपखंड के केसुली गांव निवासी वजी बाई पालीवाल (90) के गिरने से कूल्हे की हड्डी टूट गई थी। ऑपरेशन से पूर्व उनकी हार्ट बीट बार-बार असामान्य हो रही थी। इस स्थिति को देखते हुए उन्हें उदयपुर ले जाया गया, जहां हृदय संबंधी ऑपरेशन कर पेसमेकर प्रत्यारोपित किया गया। पेसमेकर लगने के बाद परिजन महिला को पुनः नाथद्वारा के जिला अस्पताल लेकर आए।
कूल्हे के ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती एनेस्थीसिया को लेकर थी। पूर्व में हृदय ऑपरेशन हो चुका होने के कारण स्पाइनल एनेस्थीसिया देना कठिन था। वहीं, उम्र अधिक होने और दांतों की स्थिति ठीक नहीं होने के चलते जनरल एनेस्थीसिया भी जोखिमपूर्ण माना जा रहा था। ऐसी स्थिति में पारंपरिक तरीके से ऑपरेशन करना मरीज के लिए खतरे से खाली नहीं था।
इस जटिल परिस्थिति में वरिष्ठ सर्जन डॉ. केके शर्मा और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. बाबूलाल जाट ने गहन विचार-विमर्श किया। इसके बाद वीडियो लैरिंगोस्कोपी तकनीक से इनट्यूबेशन कर ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया। संपूर्ण चिकित्सकीय जांच के बाद इसी विधि से ऑपरेशन किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा।
पीएमओ डॉ. अनिल शाह के मार्गदर्शन में इस नवाचारपूर्ण उपलब्धि के बाद पूरे अस्पताल प्रशासन में खुशी का माहौल है। यह ऑपरेशन नाथद्वारा जिला अस्पताल में पहली बार इस तकनीक के सफल उपयोग का उदाहरण बना।
वरिष्ठ सर्जन डॉ. केके शर्मा ने बताया कि यह हमारे लिए एक बड़ा चैलेंज था। नाथद्वारा अस्पताल में इस तकनीक का पहली बार उपयोग किया गया। इससे बिना बड़े चीरे के सटीक सर्जरी संभव हो सकी। पारंपरिक ऑपरेशन की तुलना में इसमें रक्तस्राव कम होता है और मरीज की रिकवरी भी तेजी से होती है। मरीज की स्थिति बेहद नाजुक थी, ऐसे में कम समय में तकनीकी रूप से किया गया ऑपरेशन जीवनरक्षक सिद्ध हुआ।
एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. बाबूलाल जाट ने बताया कि मरीज की उम्र 90 वर्ष होने और हृदय रोगी होने के कारण बेहोशी देना सामान्य नहीं था। हमारे पास दो ही विकल्प थे या तो नई तकनीक का प्रयोग किया जाए या मरीज को बड़े अस्पताल में रेफर किया जाए। व्यापक मंथन के बाद वीडियो लैरिंगोस्कोपी विधि अपनाई गई, जो पूरी तरह सही साबित हुई। उन्होंने कहा कि इस सफलता के बाद नाथद्वारा जिला अस्पताल में गंभीर और जटिल मरीजों के लिए उन्नत उपचार की नई शुरुआत हुई है। इससे विषम परिस्थितियों में मरीजों को उदयपुर जैसे बड़े चिकित्सा केंद्रों पर रेफर करने की आवश्यकता भी कम होगी।
इस ऑपरेशन को सफल बनाने में डॉ. केके शर्मा, डॉ. बीएल जाट, डॉ. जितेंद्र अवस्थी, सिद्धार्थ शर्मा, ऑपरेशन थियेटर सहयोगी जगमाल एवं सुरेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
Published on:
08 Jan 2026 12:14 pm
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