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युद्ध का साइड इफेक्ट: सिलेंडर संकटकाल में यह बना बेहतर विकल्प

युद्ध का साइड इफेक्ट चौतरफा दिख रहा है। सिलेंडर संकटकाल से इंडक्शन बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर घरों में सोलर ऊर्जा से चलने वाले हाइब्रिड इंडक्शन मॉडल का इस्तेमाल बढ़ता है तो रसोई का खर्च काफी घट सकता है। इस दिशा में राहत देने के लिए सरकार को […]

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युद्ध का साइड इफेक्ट: सिलेंडर संकटकाल से इंडक्शन बना बेहतर विकल्प

युद्ध का साइड इफेक्ट: सिलेंडर संकटकाल से इंडक्शन बना बेहतर विकल्प

युद्ध का साइड इफेक्ट चौतरफा दिख रहा है। सिलेंडर संकटकाल से इंडक्शन बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर घरों में सोलर ऊर्जा से चलने वाले हाइब्रिड इंडक्शन मॉडल का इस्तेमाल बढ़ता है तो रसोई का खर्च काफी घट सकता है। इस दिशा में राहत देने के लिए सरकार को कदम उठाने होंगे। एलपीजी सिलेंडर पर एक परिवार का औसत मासिक खर्च करीब 950 से 984 रुपए तक पहुंच रहा है, जबकि सोलर आधारित इंडक्शन कुकिंग में खर्च घटकर लगभग 340 से 380 रुपए प्रतिमाह रह सकता है। यानी एक परिवार को सालभर में 7 हजार रुपए से ज्यादा की बचत संभव है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सुबह के समय बिजली आधारित कुकिंग को बढ़ावा दिया जाए, जिससे गैस की खपत घटे।

सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने की दरकार

सिलेंडर संकटकाल से जूझ रहे छत्तीसगढ़ में इंडक्शन बेहतर विकल्प बन सकता है। इसके लिए जरूरत है सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रयास करे। जनता को सब्सिडी के साथ ही अन्य सुविधाएं मुहैया कराए और इंडक्शन पर भी लगने वाले टैक्स आदि में छूट दे। अगर सरकार सकारात्मक कदम उठाए तो अचानक आने वाले एलपीजी संकट से जूझना नहीं पड़ेगा और सिलेंडर संकटकाल में इंडक्शन बाजी पलट सकता है।
सिलेंडर की किल्लत के बीच कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के छत्तीसगढ़ चैप्टर के पदाधिकारी विजय गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हाइब्रिड इंडक्शन मॉडल को बढ़ावा देने का सुझाव दिया है। साथ ही कहा है कि यदि इंडक्शन पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाए और सोलर ऊर्जा के साथ बिजली आधारित कुकिंग को प्रोत्साहित किया जाए तो एलपीजी की मांग में करीब 50 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।

खाड़ी देशों से प्लास्टिक दाने की सप्लाई बंद, पैकेजिंग महंगी होने के आसार

खाड़ी देशों से आने वाले प्लास्टिक दानों की सप्लाई प्रभावित होने से प्लास्टिक उत्पाद और पैकेजिंग उद्योग पर असर पड़ने लगा है। ये दाने प्लास्टिक के विभिन्न उत्पादों और पैकेजिंग सामग्री के निर्माण में कच्चे माल के रूप में उपयोग किए जाते हैं। सीजी रोटोग्रेवर एसोसिएशन के चेयरमेन अमित धावना ने बताया कि युद्ध की स्थिति के कारण पेट्रो-केमिकल उत्पादों के आयात पर असर पड़ा है, जिससे कच्चे माल की उपलब्धता घट गई है। इसके चलते आने वाले दिनों में प्लास्टिक उत्पादों और पैकेजिंग की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक तक बढ़ोतरी के आसार हैं।

प्रदेश में एलपीजी उपभोक्ता

दैनिक एलपीजी उपभोक्ता- 63.59 लाख
सिंगल कनेक्शन- 45.73 लाख
मासिक एलपीजी आवश्यकता- 35350 टन
मासिक रिफिल सिलेंडर- 22.30 लाख
डबल गैस कनेक्शन- 17.83 लाख