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40 साल पुरानी पाइप लाइन का नक्शा नहीं, उलझन बढा़ रही मुसीबत, निगम के सामने चुनौती

राजधानी की 18 से 20 लाख आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना निगम के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। इसी समाधान के लिए महापौर मीनल चौबे ने जल बोर्ड बनाया है, जिसमें आठ इंजीनियरों की जिम्मेदारी तय की है, लेकिन उन्हें भी पसीने छूट रहे हैं, क्योंकि महीनेभर बाद तेज गर्मी शुरू होने […]

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सब इंजीनियर भर्ती फर्जीवाड़ा : 275 पदों पर चयन समिति ने किया 383 का सलेक्शन, फिर भी समिति वालों पर जांच की आंच नहीं

सब इंजीनियर भर्ती फर्जीवाड़ा : 275 पदों पर चयन समिति ने किया 383 का सलेक्शन, फिर भी समिति वालों पर जांच की आंच नहीं

राजधानी की 18 से 20 लाख आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना निगम के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। इसी समाधान के लिए महापौर मीनल चौबे ने जल बोर्ड बनाया है, जिसमें आठ इंजीनियरों की जिम्मेदारी तय की है, लेकिन उन्हें भी पसीने छूट रहे हैं, क्योंकि महीनेभर बाद तेज गर्मी शुरू होने वाली है और अभी तक पूरा खाका नहीं बना पाए हैं। सबसे बड़ी चुनौती 40 साल पुरानी पाइप लाइन को लेकर है। जिसका कोई नक्शा और डिजाइन ही नहीं है, जिससे यह पता लगा सके कि पाइप लाइन कहां से कहां तक गई है। कहां से कहां कनेक्ट है। इसके लिए उनके सामने सिर्फ वाल्व खोलने वाले लाइनमैन ही सबसे बड़ा माध्यम हैं। यही वजह है कि एक लीकेज होने पर कई जगह गड्ढे खोदने पड़ते हैं। सुधारने तक गंदा पानी सप्लाई होता है। इससे छुटकारा मिल नहीं पाया है।

सबसे बड़ी समस्या लो-प्रेशर, आधी-अधूरी पाइप लाइन

वार्डों में सबसे बड़ी समस्या लो-प्रेशर, आधी-अधूरी पाइप लाइन, लीकेज और गंदा पानी नलों में आने की बनी हुई है। इन खामियों को दुरुस्त करने में निगम के इंजीनियर कामयाब नहीं हो पाए हैं। अब कुछ दिन बाद ही जल संकट गहरा सकता है। कहां पिछले 8-10 साल से टैंकर मुक्त करने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नहीं हुआ है। निगम के आंकड़े बताते हैं कि पिछले साल परेशानी बढ़ने पर गर्मी के महीनों में 65 बोर कराने पड़े थे। इस बार 100 बोर कराने की योजना बनाई है। जिन कॉलोनियों और मोहल्लों में ज्यादा लो प्रेशर की समस्या है, वहां बोर करा कर पानी देने की तैयारी निगम कर रहा है। इसके साथ ही एक बार फिर टैंकर से ही प्यास बुझाने की चुनौती सामने है। क्योंकि जमीनी स्तर पर अभी हर घर में पूरे प्रेशर से पानी पहुंचाने के प्वाइंट को ही सूचीबद्ध कर रहे हैं।

तीन-तीन एजेंसियों के काम, फिर भी समस्याएं बरकरार

शहर के लोगों को शुद्ध पानी देने के लिए तीन-तीन सरकारी एजेंसियों ने करोड़ों रुपए का काम कराया। नगर निगम, अमृत मिशन योजना और स्मार्ट सिटी कंपनी। इसके बावजूद टैंकर से जलापूर्ति पर हर साल 50 से 1 करोड़ रुपए का कारोबार रुका नहीं। 24 घंटे पानी देने के लिए मोतीबाग और गंज टंकी को तय किया है, उसमें भी सप्लाई की बाधा बनी हुई है। वहीं निगम के आंकड़े में पाइप लाइनों में हर माह तीन से चार लीकेज सुधारने के आंकड़े हैं। इस समय 10 से 12 जगहों पर सड़कों पर गड्ढे खोदे गए हैं।

44 में से 17 टंकियों की पाइप लाइन का पता नहीं

निगम की 17 टंकियों से होने वाली जलापूर्ति को लेकर ज्यादा समस्याएं हैं। जल बोर्ड के इंजीनियरों की मानें कि स्मार्ट सिटी कंपनी ने जिन 16 वार्डों में 24 घंटे पानी देने के लिए पाइप बिछाया है और अमृत मिशन योजना से 22 टंकियों की पाइप लाइन का ही नक्शा और डिजाइन है। 17 टंकियों वाली पाइप लाइन काफी पुरानी है, जिसे पीएचई ने बिछाया था, उसका नक्शा निगम के पास नहीं है। ऐसे में कई दिन लीकेज ढूंढने में लगते हैं। निगम के पास ऐसी कोई तकनीक भी नहीं है कि जिससे लीकेज तुरंत पकड़ में आए। यही वजह है कि लोगों के घरों में गंदा पानी आता है।

फिल्टर प्लांट से लेकर टंकियों तक स्काडा सिस्टम

जल बोर्ड के इंजीनियरों के अनुसार पेयजल आपूर्ति दुरुस्त करने के लिए कई स्तर पर काम कर रहे हैं। नदी से कितना पानी फिल्टर प्लांट में आता है और कितना शुद्धिकरण होकर टंकियों में भरा जाता है और कितनी मात्र में सप्लाई होता है। इसे मापने के लिए स्काडा सिस्टम पर काम कर रहे हैं। दावा यह भी है कि अगले दो सप्ताह के अंदर पूरा खाका तैयार कर लेंगे।

जलापूर्ति सिस्टम को सुधार रहे

15 साल तक कांग्रेसी महापौर सत्ता में रहे। जलापूर्ति पर करोड़ों रुपए खर्च किए, परंतु शहर के लोगों को जल संकट जैसी िस्थतियों से राहत नहीं मिली। मेरा प्रयास जमीनी स्तर पर जलापूर्ति सिस्टम को दुरुस्त करना है। जल बोर्ड के इंजीनियर इस दिशा में काम शुरू कर दिए हैं। नतीजा अच्छा होगा।
मीनल चौबे, महापौर रायपुर