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कैसे सुधरेगी व्यवस्था: ट्रैफिक सिस्टम को ध्वस्त कर रहे पौने 2 लाख ईवी

प्रदेश के चौक चौराहों में लगे कैमरे पौने 2 लाख से ज्यादा इलेक्टि्रक वाहनों को डिटेक्ट नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते ट्रैफिक नियमों को तोड़ने के बाद भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। ईवी में लगे हुए हरे रंग के नंबर प्लेट की इमेज नहीं ले पाने के वजह से चालान […]

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कैसे सुधरेगी व्यवस्था: ट्रैफिक सिस्टम को ध्वस्त कर रहे पौने 2 लाख ईवी

कैसे सुधरेगी व्यवस्था: ट्रैफिक सिस्टम को ध्वस्त कर रहे पौने 2 लाख ईवी

प्रदेश के चौक चौराहों में लगे कैमरे पौने 2 लाख से ज्यादा इलेक्टि्रक वाहनों को डिटेक्ट नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते ट्रैफिक नियमों को तोड़ने के बाद भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। ईवी में लगे हुए हरे रंग के नंबर प्लेट की इमेज नहीं ले पाने के वजह से चालान जनरेट नहीं हो रहा है। पिछले काफी समय से इन वाहनों की ग्रीन नंबर प्लेट सीसीटीवी सर्विलांस कैमरों में स्पष्ट नहीं दिखती, जिससे इनको ट्रेस करना मुश्किल हो गया है। इसे देखते हुए पुलिस महकमे की ओर से राज्य सरकार को पत्र लिखकर वस्तुस्थिति की जानकारी दी गई है।

चौक-चौराहों में लगे सीसीटीवी कैमरे नहीं कर पा रहे ईवी को डिटेक्ट

साथ ही लगातार बढ़ रहे ईवी का हवाला देते हुए बताया गया है कि जल्दी ही इसे नहीं सुधारा गया तो आने वाले समय में ट्रैफिक सुधारने में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। साथ ही सड़क हादसों में इजाफा हो सकता है। बता दें कि ट्रैफिक नियम तोड़ने और कार्रवाई नहीं होने से व्यवस्था सुधारने के साथ राज्य पुलिस को हर महीने लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों में इलेक्ट्रिक वाहन चालक सबसे आगे हैं। खास तौर पर दोपहिया और ऑटो चालकों की संख्या सबसे ज्यादा है।

राजधानी की सड़कों पर 27 हजार ईवी

रायपुर शहर में 27 हजार से ज्यादा ईवी सड़कों पर दौड़ रही है। पुलिस का कहना है कि पुराने कैमरे इन ग्रीन प्लेटों को कैप्चर नहीं कर पा रहे हैं। यदि अपराधियों ने इन वाहनों का इस्तेमाल किया तो सुरक्षा पर गंभीर खतरा हो सकता है। बता दें कि पुराने आईटीएमएस कैमरे (2016–17 में लगाए गए) ग्रीन प्लेट के अंकों को 25 फीट की दूरी से नहीं पढ़ पा रहे। जबकि सामान्य वाहनों की नंबर प्लेट 40 फीट की दूरी से आसानी से रिकॉर्ड हो जाती है। इस समय शहर में 1400 कैमरे हैं जिनमें से 400 से अधिक एआई आधारित हैं। इसके अलावा 3500 निजी कैमरों पर भी पुलिस नजर रखती है।

चार तरह के कैमरे

चौक-चौराहों में ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) रांग वे डिटेक्शन (डब्ल्यूडब्ल्यूडी) ओवर स्पीड और विजलेंस कैमरे लगाए गए हैं। लेकिन, नंबर प्लेट की लेजीबिलीटी और कंस्ट्रास्ट की वजह से कैमरों में रिकॉर्डिंग फेल हो रही है। परिवहन आयुक्त को पत्र लिखकर नंबर प्लेट में बदलाव का सुझाव भी दिया गया है।

350 स्थानों पर लगेंगे कैमरे

प्रदेश के 350 चौक-चौराहों में अत्याधुनिक कैमरे लगाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए सभी जिलों से संभावित स्थानों की जानकारी मांगी गई है। साथ ही पुराने कैमरो को अपडेट कर ईवी को डिटेक्ट करने लायक बनाया जाएगा।

  • संजय शर्मा, एआईजी ट्रैफिक एवं अध्यक्ष राज्य अंतरविभागीय लीड एजेंसी (सड़क सुरक्षा)