
कैसे सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था: स्कूलों में डिजिटल संसाधनों की कमी, नई शिक्षा नीति की राह में बड़ी चुनौती
नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में इंटरनेट और कंप्यूटर को आधुनिक शिक्षा का अनिवार्य आधार माना गया है। डिजिटल साक्षरता, कोडिंग और कंप्यूटेशनल थिंकिंग जैसे विषयों को स्कूली स्तर से ही लागू करने पर जोर दिया गया है, लेकिन छत्तीसगढ़ के स्कूलों की जमीनी हकीकत इस लक्ष्य से काफी पीछे दिखाई देती है।
यूडाइस की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 18091 स्कूलों में कक्षा छठी या उससे ऊपर की पढ़ाई संचालित होती है। इनमें से केवल 15 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर या आईसीटी लैब की सुविधा उपलब्ध है, जबकि सिर्फ 66 प्रतिशत स्कूलों में ही इंटरनेट कनेक्टिविटी है। संसद में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में यह आंकड़े सामने आए हैं, जो राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बुनियादी डिजिटल ढांचे को मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक न तो शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संभव है और न ही नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।
एनईपी 2020 के तहत स्कूली शिक्षा में प्रारंभिक स्तर से ही कोडिंग, कंप्यूटर साक्षरता और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य छात्रों को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है, लेकिन राज्य के अधिकांश स्कूलों में कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा के अभाव में यह लक्ष्य फिलहाल अधूरा नजर आता है। जानकारों का कहना है कि जब तक स्कूलों में आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षित शिक्षक और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक कोडिंग जैसे आधुनिक विषयों को केवल कागजों तक ही सीमित रहना पड़ेगा।
नई शिक्षा नीति का एक प्रमुख उद्देश्य डिजिटल अंतर को कम करना और सभी छात्रों को समान गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिए नीति में स्कूलों में हाई-स्पीड इंटरनेट, कंप्यूटर लैब, टैबलेट, लैपटॉप और स्मार्ट क्लासरूम उपकरणों के विकास पर बड़े पैमाने पर निवेश का प्रावधान किया गया है। समग्र शिक्षा योजना के तहत छत्तीसगढ़ के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में आईसीटी लैब और स्मार्ट क्लासरूम की स्थापना की जा रही है।
Published on:
17 Feb 2026 12:55 am
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