
रायपुर । स्कूलों में फेयरवेल पार्टी और दूसरे आयोजनों में स्टूडेंट्स के जोखिम भरे स्टंस पर रोक लगाने को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य बालक अधिकार संरक्षण आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने लोक शिक्षण संचालनालय, सभी कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी करने की अनुशंसा की है।
आयोग ने कहा है कि यदि फेयरवेल पार्टी या अन्य आयोजन बच्चों की ओर से किए जा रहे हों, तो इसकी पूर्व सूचना शाला प्रबंधन को देना अनिवार्य हो। साथ ही ऐसे आयोजनों के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया जाए और समारोह शिक्षकों की निगरानी में गरिमामय तरीके से हो और शाला प्रबंधन यह सुनिश्चित करे कि किसी भी प्रकार के जोखिम भरे स्टंट न हों।
आयोग ने कहा है कि किशोरावस्था में रोमांच और साहसिक कार्यों के प्रति झुकाव स्वाभाविक है, लेकिन इससे बच्चों के जीवन को खतरा नहीं पहुंचना चाहिए। यदि समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो ऐसे कृत्य भविष्य में एक गलत परंपरा का रूप ले सकते हैं।
लापरवाही पर नोटिस और जवाबदेही
आयोग ने कहा है कि यदि ऐसे कृत्य सामने आते हैं, तो संबंधित शाला प्रमुख को नोटिस जारी कर कारण पूछा जाए और भविष्य के लिए सचेत किया जाए। अन्य अवसरों पर भी ऐसे आयोजनों को होने से रोकना शाला प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी। साथ ही ऐसी घटनाएं सामने आने पर उचित पुलिस पदाधिकारी स्कूलों में जाकर बच्चों को समझाइश देने के लिए कहा है। आयोग ने अधिकारियों से कहा है कि इन अनुशंसाओं पर की गई कार्रवाई की लिखित जानकारी 20 फरवरी 2026 तक आयोग को उपलब्ध कराई जाए।
Published on:
11 Feb 2026 11:42 pm
