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आयुष्मान योजना में 2100 करोड़ का भुगतान अटका, समय पर भुगतान नहीं… अस्पतालों पर बढ़ा दबाव

Ayushman Bharat Yojana: आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके उलट अस्पतालों को मिलने वाला भुगतान समय पर नहीं हो पा रहा है।

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आयुष्मान योजना में 2100 करोड़ का भुगतान अटका(photo-patrika)

Ayushman Bharat Yojana: छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके उलट अस्पतालों को मिलने वाला भुगतान समय पर नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में निजी और सरकारी अस्पतालों के करीब 2100 करोड़ रुपये के क्लेम लंबित हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर दबाव बन गया है।

Ayushman Bharat Yojana: कांग्रेस शासनकाल के क्लेम अब तक लंबित

लंबित राशि में से करीब 1500 करोड़ रुपये कांग्रेस शासनकाल के दौरान के बताए जा रहे हैं, जबकि शेष लगभग 600 करोड़ रुपये पिछले तीन महीनों के हैं। अस्पताल संचालकों का कहना है कि जुलाई-अगस्त 2023 से क्लेम भुगतान में देरी शुरू हुई, जो सत्ता परिवर्तन के बाद भी जारी है।

सरकारी अस्पताल भी भुगतान संकट से अछूते नहीं

भुगतान में देरी का असर केवल निजी अस्पतालों तक सीमित नहीं है। राजधानी स्थित डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का करीब 33 करोड़ रुपये का भुगतान अटका हुआ है। इसमें वर्ष 2024-25 के 19 करोड़ और 2025-26 के 14 करोड़ रुपये शामिल हैं। भुगतान नहीं मिलने से दवाइयों की खरीद, जांच सुविधाओं और रोजमर्रा की सेवाओं में दिक्कतें आ रही हैं।

606 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना में पंजीबद्ध

प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत 606 निजी अस्पताल पंजीबद्ध हैं। योजना के अंतर्गत जितने मरीज सरकारी अस्पतालों में इलाज कराते हैं, लगभग उतने ही मरीज निजी अस्पतालों का रुख करते हैं। स्वास्थ्य विभाग हर साल औसतन करीब 2500 करोड़ रुपये गरीब मरीजों के इलाज पर निजी अस्पतालों को भुगतान करता है।

छोटे और मझोले अस्पताल सबसे ज्यादा प्रभावित

भुगतान में लगातार देरी का सबसे ज्यादा असर छोटे और मझोले निजी अस्पतालों पर पड़ा है। कई अस्पताल संचालकों ने लोन लेकर संस्थान शुरू किए हैं और अब ईएमआई चुकाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में राजधानी समेत प्रदेश के कई अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत निश्शुल्क इलाज सीमित कर दिया है।

हर साल दोहराई जाती है समस्या, समाधान नहीं

निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि यह समस्या हर साल दोहराई जाती है। हॉस्पिटल बोर्ड के चेयरमैन डॉ. सुरेन्द्र शुक्ला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से कई बार मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

समयबद्ध भुगतान व्यवस्था की मांग

अस्पतालों की मांग है कि सरकार ऐसा तंत्र विकसित करे, जिससे आयुष्मान योजना के तहत भुगतान नियमित और समयबद्ध हो सके। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर गरीब मरीजों के इलाज पर पड़ेगा।