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नगर निगम की राजनीति में हलचल, भाजपा पार्षद ने उठाया आत्मघाती कदम, जिला अस्पताल में इलाज जारी

BJP Councillor Incident: नगर निगम की भाजपा पार्षद नेहा देवांगन द्वारा जहर सेवन करने की घटना से शहर में सनसनी फैल गई। जिला अस्पताल में उनका इलाज जारी है।

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भाजपा पार्षद ने खाया जहर (photo source- Patrika)

भाजपा पार्षद ने खाया जहर (photo source- Patrika)

Councillor Poison Case: रायगढ़ नगर निगम की राजनीति में शुक्रवार को एक अप्रत्याशित घटना सामने आई, जब वार्ड क्रमांक 2 की भाजपा पार्षद नेहा देवांगन ने कथित रूप से जहर सेवन कर लिया। इस खबर के सामने आते ही शहर की राजनीति और आम लोगों के बीच हलचल मच गई। एक सक्रिय और उभरती हुई महिला जनप्रतिनिधि द्वारा ऐसा कदम उठाए जाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं कि इसके पीछे व्यक्तिगत तनाव था या फिर राजनीतिक परिस्थितियों का दबाव।

Councillor Poison Case: डॉक्टरों की निगरानी में पार्षद

घटना की जानकारी मिलते ही जिला अस्पताल में महापौर, नगर निगम सभापति समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी पहुंच गए। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार पार्षद की हालत फिलहाल स्थिर है और उन्हें खतरे से बाहर बताया जा रहा है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है और उन्हें आवश्यक उपचार दिया जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटना के पीछे मानसिक तनाव या राजनीतिक दबाव जैसी परिस्थितियां हो सकती हैं।

नगर निगम की आंतरिक राजनीति और स्थानीय स्तर पर चल रही खींचतान भी एक संभावित कारण मानी जा रही है। हालांकि अभी तक भाजपा या अन्य किसी राजनीतिक दल की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस टीम ने अस्पताल के साथ-साथ पार्षद के निवास स्थान का भी निरीक्षण किया है।

Councillor Poison Case: भावनात्मक व मानसिक सहयोग की जरूरत

अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में उन्होंने यह कदम उठाया और क्या उन्हें किसी तरह का दबाव या धमकी मिल रही थी। इस घटना के बाद रायगढ़ जिले में राजनीतिक हलकों के साथ-साथ आम नागरिकों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने पार्षद के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है और उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है।

डॉक्टरों के अनुसार फिलहाल उनकी स्थिति नियंत्रण में है और उन्हें भावनात्मक व मानसिक सहयोग की जरूरत है। आने वाले समय में पार्षद या प्रशासन की ओर से दिया गया बयान ही इस पूरे मामले की वास्तविक वजह स्पष्ट कर पाएगा। फिलहाल शहर में यही सवाल उठ रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों ने एक जनप्रतिनिधि को इतना बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया।