25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पत्नी अगर ज्यादा पढ़ी-लिखी है तो क्या गुजारा भत्ता देने से किया जा सकता है मना? इलाहाबाद HC ने क्या कहा

Allahabad HC News: पत्नी अगर ज्यादा पढ़ी-लिखी है तो क्या गुजारा भत्ता देने से पति मना कर सकता है? जानिए इलाहाबाद HC ने इस पर क्या कहा है?

2 min read
Google source verification
can alimony be denied if wife is highly educated know what did allahabad hc say prayagraj news

इलाहाबाद HC न्यूज। फोटो सोर्स- पत्रिका

Allahabad HC News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पत्नी को सिर्फ इस आधार पर गुजारा भत्ता देने से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह ज्यादा शिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम है। कोर्ट ने कहा कि उच्च शिक्षा और योग्य होना यह नहीं दर्शाता कि पत्नी स्वयं कमाई कर रही है।

Allahabad HC: पढ़ी-लिखी पत्नी को गुजारा भत्ता देने से किया जा सकता मना या नहीं?

बुलंदशहर की सुमन वर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद ने कहा, ''पति अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने की जिम्मेदारी से केवल इसलिए नहीं बच सकता कि पत्नी में कमाई की योग्यता है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि कमाने की क्षमता और वास्तव में नौकरी करके पैसे कमाना अलग-अलग बातें हैं।

Prayagraj News: परिवार न्यायालय का आदेश रद्द

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यह स्थिति कई महिलाओं की वास्तविकता को दर्शाती है, जो अपनी पढ़ाई-लिखाई के बावजूद, सालों तक घरेलू काम और बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारियों के बाद नौकरी पर लौटने में कठिनाई महसूस करती हैं। कोर्ट ने बुलंदशहर के अपर प्रधान न्यायधीश परिवार न्यायालय का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें पति से गुजारा भत्ता मांगने के लिए पत्नी की याचिका CRPC की धारा 125 के तहत खारिज कर दी गई थी।

Prayagraj: क्या है मामला?

मामले के मुताबिक, परिवार न्यायालय ने पत्नी की गुजारा भत्ता की याचिका इसलिए खारिज की थी कि उसने कोर्ट से अपनी पेशेवर पढ़ाई-लिखाई छिपाई और साफ मन से अदालत में नहीं आई। न्यायालय का यह भी मानना था कि पत्नी बिना किसी उचित कारण के अलग रह रही है और उसने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत वैवाहिक अधिकारों की बहाली की कार्रवाई के बावजूद वैवाहिक घर लौटने से इनकार किया। हालांकि, परिवार न्यायालय ने याची के नाबालिग बेटे के लिए याचिका दायर करने की तारीख से हर महीने 3,000 रुपये देने का आदेश जारी किया था।

'महिला के पास आय का कोई जरिया नहीं'

महिला के वकील ने कहा कि महिला के पास आय का कोई जरिया नहीं है। महिला के पति यह साबित करने में असफल रहे कि उनकी पत्नी काम कर रही थी और पैसे कमा रही थी। इसके विपरीत, पति का दावा था कि पत्नी बहुत पढ़ी-लिखी है, फिलहाल प्राइवेट टीचर के रूप में काम कर रही है, उसके पास टेलरिंग में ITI डिप्लोमा है और वह बच्चों को ट्यूशन देकर भी पैसे कमाती है।

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी का पति से गुजारा भत्ता पाने का कानूनी अधिकार इस आधार पर समाप्त नहीं होता कि वह कमाई करने की क्षमता रखती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह एक सामाजिक सच्चाई है कि महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों में खुद को लगा देती हैं और बच्चों की देखभाल करती हैं। हाईकोर्ट ने यह नोट किया कि याची के किशोर बेटे के लिए परिवार न्यायालय द्वारा दिए गए 3,000 रुपये का भत्ता बहुत कम है, क्योंकि लड़के को पढ़ाई करने और स्वस्थ माहौल में बड़ा होने के लिए पर्याप्त सहारे की आवश्यकता है।

'1 महीने के भीतर नए सिरे से तर्कसंगत आदेश पारित किया जाए'

अदालत ने परिवार न्यायालय का आदेश रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि 1 महीने के भीतर नए सिरे से तर्कसंगत आदेश पारित किया जाए। जिससे बेटे और पत्नी दोनों के हितों का संरक्षण हो सके।