
प्रयागराज संगम तट पर धरना स्थल पर हंगामा (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
Sangam Ghat Protest Shankaracharya Avimukteshwaranand: शनिवार देर शाम प्रयागराज के संगम तट पर उस समय तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के नेतृत्व में चल रहे धरना-प्रदर्शन के शिविर के पास हंगामा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों और धरना-समर्थकों के अनुसार, कुछ युवक लाठी-डंडों के साथ धरना स्थल की ओर बढ़ने लगे और नारेबाजी करते हुए भीतर तक पहुंचने की कोशिश की। घटना की सूचना मिलते ही धरना स्थल पर मौजूद संतों, साधुओं और श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई, हालांकि समय रहते समर्थकों और आयोजकों की सतर्कता से कोई बड़ा हादसा टल गया।
धरना स्थल पर मौजूद लोगों के मुताबिक, शनिवार को पूरे दिन माहौल शांत था। श्रद्धालु नियमित रूप से संगम तट पर पहुंच रहे थे और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों के साथ शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे थे। लेकिन देर शाम अचानक कुछ युवकों का एक समूह नारे लगाते हुए धरना स्थल के आसपास दिखाई दिया। देखते ही देखते उनकी संख्या बढ़ती गई और वे हाथों में लाठी-डंडे लिए आगे बढ़ने लगे।
समर्थकों का आरोप है कि यह युवक शंकराचार्य के शिविर के काफी करीब तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान वे लगातार उकसाने वाले नारे लगा रहे थे, जिससे माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। धरना स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की, तो कुछ समय के लिए धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी बनी।
धरना-प्रदर्शन से जुड़े लोगों का दावा है कि इन युवकों का इरादा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के पास तक पहुंचकर अव्यवस्था फैलाने का था। समर्थकों का कहना है कि यदि भक्त और स्वयंसेवक समय रहते बीच में न आते, तो कोई गंभीर घटना हो सकती थी। एक समर्थक ने बताया, "हम लोग शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे थे। अचानक कुछ लोग लाठी-डंडे लेकर नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े। उनका व्यवहार आक्रामक था। हमने तुरंत मानव-श्रृंखला बनाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोका।"
धरना समर्थकों के अनुसार, हंगामा कर रहे युवक ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ जैसे नारे लगा रहे थे। इन नारों के कारण धरना स्थल पर मौजूद लोगों में और अधिक आक्रोश फैल गया। समर्थकों का कहना है कि इस तरह के नारे जानबूझकर माहौल बिगाड़ने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के उद्देश्य से लगाए गए।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सुनियोजित उकसावे की कार्रवाई बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि यह असामाजिक तत्वों की हरकत हो सकती है, जिनका धरना या उसके उद्देश्य से कोई लेना-देना नहीं था।
घटना के बाद धरना स्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। संगम जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले इलाके में इस तरह का हंगामा होना प्रशासन की सतर्कता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। समर्थकों का कहना है कि यदि पर्याप्त पुलिस बल और सुरक्षा इंतजाम पहले से मौजूद होते, तो ऐसे तत्व धरना स्थल के आसपास तक भी नहीं पहुंच पाते। धरना-आयोजकों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने धरना स्थल के आसपास अतिरिक्त बल तैनात कर दिया और संदिग्ध लोगों को वहां से हटाया। अधिकारियों का कहना है कि हालात पर पूरी तरह नजर रखी जा रही है और किसी को भी कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना के संबंध में उपलब्ध वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान खंगाले जा रहे हैं। यदि किसी ने जानबूझकर अशांति फैलाने की कोशिश की है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने समर्थकों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण है और किसी भी तरह की हिंसा या उकसावे का जवाब धैर्य और मर्यादा के साथ दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कृत्य धरने के मूल उद्देश्य से ध्यान भटकाने की कोशिश हो सकते हैं, लेकिन सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने वाले लोग इससे विचलित नहीं होंगे।
इस घटना से धरना स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं में कुछ समय के लिए भय का माहौल जरूर बना, लेकिन बाद में स्थिति सामान्य हो गई। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि वे किसी भी दबाव या डर के बावजूद धरना स्थल नहीं छोड़ेंगे और शंकराचार्य के साथ खड़े रहेंगे। रात होते-होते माहौल काफी हद तक शांत हो गया और धरना अपने निर्धारित क्रम में चलता रहा। आयोजकों ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य में भी शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगों और विचारों को रखा रहेगा।
धरना समर्थकों और संत समाज के लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि हंगामा करने वाले युवक कौन थे, वे किस उद्देश्य से वहां पहुंचे थे और उन्हें किसने भेजा था।
कुल मिलाकर, संगम तट पर हुआ यह घटनाक्रम एक बार फिर यह याद दिलाता है कि संवेदनशील धार्मिक स्थलों पर किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच के नतीजों पर टिकी हुई हैं।
Updated on:
25 Jan 2026 08:09 am
Published on:
25 Jan 2026 08:08 am
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