
Photo- Dinesh Dabi
Army Day Parade Jaipur: देश में हर वर्ष 15 जनवरी को सैन्य नेतृत्व की कमान एक भारतीय को सौंपे जाने के सम्मान में सेना दिवस मनाया जाता है। इसके अलावा इसको मनाने का उद्देश्य सैनिकों के बलिदान को याद करना भी है।
15 जनवरी, 1949 को फील्ड मार्शल कोडांदेरा मदप्पा करिअप्पा (के. एम. करिअप्पा) भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर इन चीफ बने थे। इससे पहले सेना का नेतृत्व ब्रिटिश अधिकारी करते थे।
के. एम. करिअप्पा ने अंतिम ब्रिटिश कमांडर इन चीफ जनरल फ्रांसिस रॉय बुचर का स्थान लिया था। तब से लेकर अब तक इस दिन को सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है।
करिअप्पा का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने भारतीय सेना को राजनीति से दूर रखा। 1949 से लेकर 2022 तक सेना दिवस पर परेड का आयोजन परंपरागत रूप से दिल्ली छावनी स्थित करिअप्पा परेड ग्राउंड में होता रहा।
2023 में पहली बार यह परंपरा टूटी और सेना दिवस परेड दिल्ली से बाहर बेंगलुरु में आयोजित की गई। इसके बाद 2024 में परेड लखनऊ और 2025 में सेना दिवस परेड का आयोजन पुणे में किया गया था।
वर्ष 2026 में देश में चौथी बार दिल्ली से बाहर सेना दिवस परेड का आयोजन पहली बार राजस्थान की राजधानी जयपुर में हो रहा है, जो कि एक ऐतिहासिक अवसर है।
रक्षा सूत्रों का कहना है कि परेड का यह रोटेशन केवल शहरों में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य भारतीय सेना की कमांडों पर फोकस करना है, जो कि देश की सुरक्षा में अपनी अलग और अहम भूमिका निभाती हैं।
15 जनवरी 2026 की सुबह जगतपुरा के महल रोड पर सेना अध्यक्ष की मौजूदगी में भारतीय सेना की भव्य परेड आयोजित होगी।
जयपुर में सेना दिवस परेड को शहर के समृद्ध सैन्य इतिहास के उत्सव के रूप में देखा जाएगा और यह रक्षा अनुसंधान और औद्योगिक केंद्र के रूप में इसके भविष्य को मजबूत करेगा।
दक्षिण पश्चिमी कमान के अधिकारियों का कहना है कि 15 जनवरी को 78वें सेना दिवस पर जयपुर में होने वाली परेड सेना की ओर से आयोजित अब तक की सबसे भव्य परेड होगी।
इस वर्ष की परेड का विषय 'शौर्य और बलिदान की परंपरा' है। अधिकारियों के अनुसार परेड से सेना के शौर्य और बलिदान की विरासत को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
नागरिकों विशेषकर युवा इससे राष्ट्रवाद की भावना से प्रेरित होंगे और 'ऑपरेशन सिंदूर' में सेना के साहस और पराक्रम को जान सकेंगे।
सेना की परेड में 30 से अधिक टुकड़ियां शामिल होंगी, जिनमें सैन्य दस्ते, घुड़सवार दल, टैंक, तोप, मिसाइल, सेना के बैंड, मोटरसाइकिल शो और सैन्य झांकियां शामिल होंगी।
इसके अलावा आकाश में फाइटर प्लेन और हेलिकॉप्टर का फ्लाई-पास्ट मुख्य आकर्षण रहेगा। परेड में ड्रोन और रोबोटिक्स जैसी अत्याधुनिक रक्षा तकनीक का भी प्रदर्शन किया जाएगा।
देश में पहली बार परेड का आयोजन नागरिक क्षेत्र में किया जा रहा है। परंपरागत रूप से सेना दिवस परेड दिल्ली छावनी में आयोजित की जाती थी, जिससे परेड देखने वाले दर्शकों की संख्या सीमित हो जाती थी।
अधिकारियों के अनुसार, पहली बार परेड का आयोजन जयपुर स्थित सेना छावनी के बाहर किया जा रहा है और यह शहर के मध्य में आयोजित हो रही है।
15 जनवरी को होने वाली सेना की परेड से पहले रिहर्सल किया जा रहा है, जिसे देखने के लिए भारी संख्या में लोग आ रहे हैं। रिहर्सल का उद्देश्य परेड के प्रति अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करना है।
जयपुर में हरे कृष्णा मार्ग (महल रोड) पर 15 जनवरी को आयोजित होने वाली आर्मी-डे परेड को लेकर सेना ने 11 जनवरी को दूसरी बार फुल ड्रेस परेड रिहर्सल की।
इसमें सेना की ताकत और शौर्य का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। रिहर्सल परेड में राजस्थान की झांकी भी प्रदर्शित की गई, जिसमें जयपुर की सांस्कृतिक झलक दिखाई दी।
रिहर्सल परेड में स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों, हाईटेक ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम और रोबोटिक योद्धाओं की झांकी ने दर्शकों को चौंका दिया। 'ऑपरेशन सिंदूर' की झांकी ने सेना की ताकत से रूबरू करवाया। मद्रास रेजिमेंट व सिख रेजिमेंट के बैंड ने भी तालियां बटोरीं।
इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटी। तीसरी व अंतिम रिहर्सल परेड 13 जनवरी को होगी। जयपुर निवासी एडवोकेट रामबाबू शर्मा ने कहा कि पिंक सिटी में सेना की परेड का आयोजन पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। इससे युवाओं में देशभक्ति की भावना मजबूत होगी और आम लोगों को भारतीय सेना के शौर्य को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
विराट है, विशाल है, तू भैरव महाकाल है,
हाथ में त्रिशूल धरे, तांडव विकराल है,
काल का कोलाहल तेरे डमरू की ताल है,
धर्म की रक्षा करे, देश की तू ढाल है…
शौर्य, जोश और 'वीर रस' से ओत-प्रोत 'भैरव बटालियन' के इस आधिकारिक रेजिमेंटल गीत को जयपुर निवासी और भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल गुरमीत सिंह ने लिखा, संगीतबद्ध और अपनी ओजस्वी आवाज दी है।
जयपुर में आयोजित रिहर्सल में 'भैरव रेजिमेंट' का दस्ता जब कदमताल करता हुआ निकला तो यही गीत जवानों में जोश पैदा कर रहा था। राजस्थान के धोरों में प्रशिक्षित यह दस्ता अदृश्य वार और विपरीत परिस्थितियों में विजय प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।
लेफ्टिनेंट कर्नल गुरमीत सिंह का राजस्थान से गहरा नाता रहा है। उन्होंने अपने सैन्य करियर के दौरान श्रीगंगानगर, लालगढ़ जाटान और जयपुर जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर अपनी सेवाएं दी हैं।
मरुधरा की मिट्टी और यहां के गौरवशाली इतिहास को करीब से महसूस करने के कारण ही वे इस गीत में वह 'हुंकार' पैदा कर पाए हैं, जो सीधे रोंगटे खड़े कर देती है।
सेना के जवानों में जोश भरने वाले कई गीतों की रचना लेफ्टिनेंट कर्नल गुरमीत सिंह ने की है। उनका गीत- मेरा धर्म सनातन, पंथ सिखी…काफी लोकप्रिय हुआ है।
गीत की हर पंक्ति जवानों में जोश भरने वाली है और उनमें अदम्य साहस का संचार करती हैं। विशेष रूप से ये पंक्तियां किसी भी देशभक्त को भावुक और उत्साहित कर देंगी:- "शिवाजी की ललकार है, गुरु गोबिंद की जयकार है,
जो बीचों-बीच फाड़ दे, वो राणा की तलवार है…।" यह गीत 'भैरव' को धर्म और देश के रक्षक के रूप में प्रतिष्ठित करता है। इसमें भगवान शिव के रौद्र रूप 'महाकाल' की शक्ति, गुरु गोबिंद सिंह का संकल्प और महाराणा प्रताप के स्वाभिमान की झलक मिलती है।
भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में युद्ध अचानक शुरू होंगे और इसमें तकनीक की अहम भूमिका रहने वाली है। इसलिए सेना को ऐसे सैनिकों की जरूरत है जो हथियार चलाने में दक्ष होने के साथ ही आधुनिक तकनीक में भी कुशल हों।
इसी सोच के तहत 'भैरव बटालियन' का गठन भारतीय सेना की मारक क्षमता को और अधिक घातक बनाने के लिए किया गया है। गीत की पंक्तियां "तू अंतिम विकल्प है, तू आर तू ही पार है" यह दर्शाती हैं कि जब स्थितियां अत्यंत कठिन हों, तब भैरव बटालियन विनाशक बनकर उभरेगी।
हाइब्रिड फोर्स के तौर पर 'भैरव बटालियन' को ड्रोन वॉरफेयर, मेडिकल इमरजेंसी, विस्फोटक निपटान और डिजिटल युद्ध के लिए तैयार किया गया है। रेगिस्तान में तैनात तकनीक से लैस 'भैरव बटालियन' के रणबांकुरे हर चुनौती के लिए तैयार हैं।
Updated on:
12 Jan 2026 07:53 pm
Published on:
12 Jan 2026 07:35 pm
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