
‘असील’ चूजों की बिक्री तेज (photo source- Patrika)
CG Poultry: जहां पूरे देश में चिकन और अंडों में मिलावट, हॉर्मोन और केमिकल फीड को लेकर सवाल उठ रहे हैं और कुछ जगहों पर इनके इस्तेमाल पर रोक लगाने की चर्चा हो रही है, वहीं छत्तीसगढ़ में इसके उलट तस्वीर सामने आ रही है। यहां देसी और शुद्ध मानी जाने वाली 'असील' नस्ल के मुर्गियों की डिमांड और बिक्री तेज़ी से बढ़ रही है। मिलावट के डर के बीच, असील नस्ल भरोसे, सेहत और रोज़गार का नया ज़रिया बनकर उभर रही है।
देश के कई हिस्सों में चिकन और अंडों में केमिकल मिलावट, हॉर्मोन और एंटीबायोटिक के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज़ हो गई है। कुछ जगहों पर चिकन और अंडों पर बैन लगाने की मांग हो रही है, तो कहीं इनके इस्तेमाल को लेकर लोगों में डर बढ़ रहा है। लेकिन, इस माहौल में छत्तीसगढ़ में बिल्कुल उलटी तस्वीर सामने आ रही है: यहां देसी और शुद्ध 'असील' नस्ल के मुर्गे धड़ल्ले से बिक रहे हैं।
बीते कुछ समय से बाजार में बिकने वाली ब्रॉयलर मुर्गियों और अंडों को लेकर सवाल उठे हैं। तेजी से वजन बढ़ाने, कृत्रिम दवाओं और केमिकल फीड के इस्तेमाल के आरोपों ने उपभोक्ताओं को चिंतित किया है। नतीजतन लोग अब स्वस्थ, देसी और प्राकृतिक विकल्प तलाशने लगे हैं।
इस खोज की वजह से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में असील मुर्गियों की मांग तेज़ी से बढ़ी है। असील एक पारंपरिक देसी नस्ल है जिसे बिना केमिकल और कम से कम पेस्टिसाइड के पाला जा सकता है। इसे प्राकृतिक माहौल में पाला जाता है, जिससे इसका मांस और अंडे शुद्ध और सुरक्षित माने जाते हैं। प्योर ब्रीड का मीट ब्रॉयलर मुर्गियों से ज़्यादा स्वादिष्ट और पौष्टिक माना जाता है। उनके अंडों में नैचुरल न्यूट्रिएंट्स भरपूर होते हैं। यही वजह है कि हेल्थ का ध्यान रखने वाले लोग अब कमर्शियल मुर्गियों और अंडों के बजाय प्योर ब्रीड के मुर्गों को पसंद कर रहे हैं।
बढ़ती मांग का सीधा फ़ायदा छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों को हो रहा है। महिला समूह, किसान और युवा शुद्ध नस्ल के चूज़े पालकर घर से ही रोज़गार शुरू कर रहे हैं। यह बिज़नेस अपनी कम लागत, कम जोखिम और अच्छी कीमतों की वजह से तेज़ी से पॉपुलर हो रहा है। नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन (NRLM), DMF, और एग्रीकल्चरल क्लस्टर स्कीम के तहत राज्य में ब्रूडिंग सेंटर बनाए गए हैं। वे हेल्दी प्योरब्रेड चूजे बांट रहे हैं और ट्रेनिंग दे रहे हैं, जिससे मिलावट-मुक्त प्रोडक्शन को बढ़ावा मिल रहा है।
हालांकि प्योरब्रेड चिकन और अंडे स्टैंडर्ड ब्रॉयलर से ज़्यादा महंगे होते हैं, लेकिन हेल्थ और क्वालिटी का ध्यान रखने वाले कस्टमर ज़्यादा पैसे देने को तैयार रहते हैं। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में प्योरब्रेड चिकन की बिक्री रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच रही है।
चिकन और अंडों पर बैन लगाने की चर्चा से कस्टमर कन्फ्यूज़ हो रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ का असील मॉडल दिखा रहा है कि देसी, नेचुरल और ट्रांसपेरेंट खेती ही भविष्य का रास्ता है। मिलावट और हेल्थ रिस्क की चिंताओं के दौर में, छत्तीसगढ़ की असील ब्रीड न सिर्फ कस्टमर का भरोसा जीत रही है। बल्कि गांव में रोज़गार, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर इकॉनमी का एक मज़बूत उदाहरण भी बन रही है। ब्रॉयलर पर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन असील पर भरोसा छत्तीसगढ़ की नई पहचान बन रहा है।
असील चिकन का लुक भी इसे दूसरे चिकन से अलग बनाता है। इसका मुंह लंबा और गोल होता है, जबकि इसकी आंखें घनी होती हैं और इसके पंख काले, लाल या मिले-जुले रंग के होते हैं। इसकी लंबी गर्दन और मजबूत, सीधे पैर इसे और भी खास बनाते हैं। इसकी पूंछ भी दूसरे चिकन से लंबी होती है। असील चिकन की सात मुख्य किस्में हैं: नूरी (सफेद), यारकिन (काला और लाल), पीला (सुनहरा लाल), कगार (काला), टिक्कर (भूरा), चिट्टा (काला और सफेद चांदी), और रेजा (हल्का लाल)।
यह चिकन अपनी लड़ने की भावना के लिए भी जाना जाता है और इसे 'फाइटर चिकन' निकनेम दिया गया है क्योंकि यह लड़ने में बहुत माहिर है। असील चिकन न केवल अपनी शारीरिक बनावट और दवा वाले गुणों के लिए मशहूर है, बल्कि इसकी कीमत भी इसे खास बनाती है, जिससे यह पोल्ट्री फार्मिंग के लिए एक बहुत अच्छा विकल्प बन जाता है।
Updated on:
11 Jan 2026 01:19 pm
Published on:
11 Jan 2026 01:18 pm
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