पटना, May 30, 2026

रितु जायसवाल (Photo-X @activistritu)
Bihar Politics: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं रितु जायसवाल ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोला है। रितु जायसवाल ने किसी खास घटना का उल्लेख किए बिना रोहिणी आचार्या का नाम लेते हुए तंज कसा। उन्होंने कहा, “मैं तो उनकी मुंहबोली बहन थी, लेकिन रोहिणी आचार्या तो उनकी सगी बहन हैं। फिर उनके साथ ऐसा क्यों हुआ? आखिर उनमें क्या कमी रह गई थी?”
बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी की हार के बाद हार के कारणों को लेकर तेजस्वी यादव और उनकी बहन रोहिणी आचार्या के बीच मतभेद सामने आए थे। सूत्रों के अनुसार, रोहिणी चुनावी हार की समीक्षा और उस पर खुली चर्चा की पक्षधर थीं, जबकि तेजस्वी इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस से बचना चाहते थे। इसी को लेकर दोनों के बीच विवाद की स्थिति बन गई थी। बाद में रोहिणी आचार्या ने पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान आरोप लगाया था कि चुनावी हार के कारणों पर चर्चा के दौरान जब उन्होंने तेजस्वी यादव के सलाहकार संजय यादव का नाम लिया, तो उन्हें अपशब्द कहे गए और उनके ऊपर चप्पल भी फेंकी गई।
रितु जायसवाल ने खुद को बागी बताए जाने के सवाल पर कहा कि वह बागी नहीं हुई हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपने कार्यकर्ताओं की आवाज सुननी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “परिहार की जनता ने मुझे 65 हजार से अधिक वोट दिए। क्या इतनी बड़ी संख्या में जनता के समर्थन को बगावत कहा जा सकता है?” रितु ने दावा किया कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी और विरोध के कारण ही परिहार में आरजेडी तीसरे स्थान पर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि मामला सिर्फ टिकट का नहीं था, बल्कि कार्यकर्ताओं की भावनाओं और सम्मान का था।
भाजपा में शामिल होने के फैसले पर उन्होंने कहा कि वह ऐसी पार्टी से जुड़ रही हैं, जो ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की बात करती है। उनके अनुसार, भाजपा राष्ट्रहित, अंत्योदय और समाज के सभी वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की विचारधारा पर काम करती है, इसलिए उससे बेहतर विकल्प उनके लिए कोई नहीं हो सकता।
रितु जायसवाल ने तेजस्वी यादव को अपने नेतृत्व शैली और कार्यशैली में सुधार लाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को कार्यकर्ताओं से नियमित रूप से मिलना चाहिए और उनके लिए अपने घर तथा पार्टी के दरवाजे हमेशा खुले रखने चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे हर वर्ग के लोगों, खासकर दूर-दराज से आने वाले गरीबों और कार्यकर्ताओं से आत्मीयता से मिलते थे। उनके घर के दरवाजे सभी के लिए खुले रहते थे और वे कार्यकर्ताओं को सम्मान देते थे। रितु ने कहा कि लालू प्रसाद यादव के बाद पार्टी और कार्यकर्ताओं के बीच दूरी बढ़ती गई। यही दूरी आज आरजेडी की कमजोर होती स्थिति और सीटों में आई गिरावट की एक बड़ी वजह है।
सीतामढ़ी जिले की सिंहवाहिनी पंचायत की पूर्व मुखिया के रूप में पहचान बनाने वाली रितु जायसवाल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से भाजपा उम्मीदवार गायत्री देवी के खिलाफ चुनाव लड़ी थीं, लेकिन उन्हें 1,569 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद आरजेडी में उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया। पार्टी ने उन्हें महिला मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया और 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवहर सीट से उम्मीदवार बनाया। हालांकि, वह जेडीयू उम्मीदवार Lovely Anand से करीब 29,143 वोटों से चुनाव हार गईं।
वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में जब आरजेडी ने उनकी सीट बदलने का फैसला किया, तो उन्होंने बगावती तेवर अपना लिए। इसके बाद रितु जायसवाल निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर परिहार सीट से चुनाव मैदान में उतर गईं। उनके चुनाव लड़ने से आरजेडी को बड़ा नुकसान हुआ और पार्टी तीसरे स्थान पर खिसक गई, जबकि रितु दूसरे स्थान पर रहीं। आरजेडी ने इस सीट से पूर्व मंत्री रामचंद्र पूर्वे की बहू स्मित गुप्ता को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन अंततः भाजपा की गायत्री देवी को जीत मिली। अब रितु जायसवाल भी भाजपा में शामिल हो गई हैं।
Updated on: 30 May 2026 11:08 am

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