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आपकी बात: नोएडा के हादसे को देखते हुए आपदा प्रबंधन मजबूत हो, उसके लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

पाठकों ने इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दी हैं, प्रस्तुत है पाठकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

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जयपुर

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Opinion Desk

Jan 22, 2026

सभी विभागों में समन्वय हो
नोएडा जैसी घटनाओं से सीख लेते हुए आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए सबसे पहले सभी विभागों के मध्य बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। इसके बाद आमजन को पूर्व चेतावनी देना और जागरूक करने के लिए जनसंचार का उपयोग जरूरी है। आपदा
प्रबंधन विभाग द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग करना, नियमित मॉक ड्रिल करना, दुर्घटना पर त्वरित प्रतिक्रिया देना अनिवार्य होना चाहिए। इस प्रकार भविष्य में ऐसी घटनाओं में जन हानि रोकी जा सकती है। - सक्षम स्वामी, झालावाड़

स्पष्ट उत्तरदायित्व सुनिश्चित करें
सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम को सख्ती से लागू करना चाहिए। इसके साथ ही प्रिवेंटिव उपायों पर विचार करना चाहिेए ताकि इस तरह के हादसों से लोगों को बचा जा सके। सामान्य स्थिति में इन नियमों की पालना नहीं होने पर उत्तरदायित्व सुनिश्चित हो क्योंकि किसी भी नागरिक की जान से बड़ी किसी की लापरवाही नहीं हो सकती। - हितेश, सिरोही

आपदा प्रबंधन संसाधनों को एकीकृत करें
नोएडा जैसे हादसों से बचाव के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीम, पुलिस, अग्निशमन और आपदा प्रबंधन विभागों के संसाधनों को एकीकृत करना चाहिए। सभी विभाग एक साथ काम कर सकें और तुरंत मौके पर पहुंच कर प्राथमिक उपचार कर सकें ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा सामूहिक जागरूकता बढ़ाना, आपातकालीन किट तैयार रखना, बेहतर समन्वय व ढांचागत सुधार करना जैसे कदम उठाए जाएं। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सशक्त बनाए जाने की भी जरूरत है। - शिवजी लाल मीना, जयपुर

सशक्त स्वयंसेवक नेटवर्क जरुरी
जब भी कोई दुर्घटना या आपदा घटित होती है, स्थानीय लोग ही सबसे पहले आपदा स्थल पर पहुंचते हैं। इसलिए हादसों को कम करने और उनके प्रभाव को सीमित करने में स्थानीय स्वयंसेवकों की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण होती है। ये समूह अपने स्तर पर हरसंभव सहायता का प्रयास करते हैं। इन समूहों को बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण, आपदा प्रबंधन की सरल एवं उन्नत विधियों की जानकारी, बुनियादी बचाव उपकरण और फर्स्ट एड किट उपलब्ध कराये जाने चाहिए। उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वयंसेवकों को जिला स्तर पर सम्मानित करना चाहिए ताकि अन्य लोग भी प्रेरित हो सके। एक सशक्त स्वयंसेवक नेटवर्क सुरक्षित समाज की पहली रक्षा पंक्ति है। - डॉ. प्रेमराज मीना, करौली

आपदा से पहले तैयारी जरूरी
नोएडा हादसा एक बार फिर बताता है कि आपदा प्रबंधन हमारी योजनाओं में है, जमीन पर नहीं। आपदा से निपटने के लिए सबसे पहले जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान और वहां नियमित सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य किए जाएं। भवन निर्माण, मॉल, फैक्ट्रियों और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन हो। आपात स्थिति में त्वरित राहत के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम, आधुनिक उपकरण और स्पष्ट कमांड सिस्टम होना चाहिए। आम नागरिकों को भी आपदा के समय क्या करें, इसकी नियमित मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण दिया जाए। हादसे के बाद जांच तक सीमित रहने के बजाय जवाबदेही तय हो और सुधारात्मक कदम तुरंत लागू किए जाएं। मजबूत आपदा प्रबंधन ही जान-माल की वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है। - राकेश खुडिया, श्रीगंगानगर

मजबूत सुरक्षा नीति बनें
नोएडा हादसा नया नहीं है, सिस्टम ही इतना कमजोर है कि आपात स्थिति में न तो समय पर मदद मिल पाती है न ही हादसों के जनकों पर कठोर कार्रवाई होती है। आपदा प्रबंधन को हमेशा अर्ल्ट रखने के लिए समय-समय पर योग्यता परखने की जरूरत है। साथ ही उन जिम्मेदारों पर कठोर नीति अपनाई जाए जो हादसों को जन्म देते हैं और लापरवाही करते हैं। सड़क दुघर्टनाएं हो या फिर निर्माण स्थल पर लापरवाही से जानलेवा घटनाएं होती हैं इसके लिए आवश्यक सुरक्षा नीति की आवश्यकता है। - हरिप्रसाद चौरसिया, देवास

आधुनिक सुरक्षा तंत्र विकसित करें
नोएडा हादसे को सिर्फ कोहरे के कारण हुई दुर्घटना नहीं माना जा सकता। आपदा प्रबंधन तंत्र और पुलिस की उदासीनता भी इसके लिए जिम्मेदार है। महानगरों में आपदा से बचाव हेतु आधुनिक सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाना चाहिए। सर्दियों में कोहरे का होना हर साल की समस्या है। अतः सड़क पर दुर्घटनाएं रोकने के लिए पूर्व तैयारियां आवश्यक है। नागरिकों को भी कोहरे में परिवहन के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। - ललित महालकरी, इंदौर

नियमों का सख्त पालन
नोएडा हादसा बताता है कि आपदा प्रबंधन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना जरूरी है। प्रत्येक गांव और शहर स्तर पर थाने और नगर निकाय के पास आधुनिक बचाव उपकरण, प्रशिक्षित त्वरित प्रतिक्रिया दल और स्पष्ट समन्वय प्रणाली हो। संवेदनशील स्थलों की पूर्व पहचान, नियमित मॉक ड्रिल, नागरिकों की जागरूकता, अवैध निर्माण पर रोक और जवाबदेही तय करने से ही ऐसी त्रासदियों को रोका जा सकता है। - अमृतलाल मारू, इंदौर

निगरानी तंत्र मजबूत करें
नोएडा में कार सवार व्यक्ति का निर्माणाधीन इमारत के बेसमेंट में कार सहित गिरना और उसकी मृत्यु हो जाना निगरानी तंत्र की विफलता है। इसलिए नई बनने वाली इमारतों के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत करना जरूरी है। निर्माणाधीन इमारतों के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाना और उनका सतत पालन करवाना जरूरी है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्र में इस तरह की दुर्घटना का होना प्रशासनिक तंत्र की विफलता का द्योतक है। इसलिए प्रशाशनिक तंत्र में मजबूत दृढ़ संकल्प वाले नौकरशाहों की जरूरत है। - दिनेश मेघवाल, उदयपुर

निर्माणकर्ता नियमों का पालन करें
नोएडा हादसे का मुख्य कारण निर्माण स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करना है। निर्माण स्थलों पर अनिवार्य रूप से बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और पर्याप्त रोशनी सुनिश्चित की जानी चाहिए। खुले गड्ढों, असुरक्षित यू-टर्न और ब्लैक स्पॉट की पहचान कर उन्हें समय पर ठीक किया जाना चाहिए। अगर कोई निर्माणकर्ता नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके ऊपर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए जिससे सकारात्मक संदेश दिया जा सके। - गजेंद्र चौहान, डीग

सख्त निगरानी हो
नोएडा जैसे हादसे हमारी आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं। भविष्य में ऐसी आपदाओं पर रोक लगाने के लिए ड्रोन, आधुनिक उपकरण और लिफ्ट का होना बहुत जरूरी है। बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत, लाइटिंग अनिवार्य होनी चाहिए। गड्ढे और खुला नाला होने पर सुरक्षा कवच लगाना चाहिए। बिल्डरों के लाइसेंस और स्वीकृत योजनाओं का निर्माण शुरू होने से पहले सख्त जांच की जाए। नई इमारत और बुनियादी ढांचों का निर्माण आपदा रोधी मानक के अनुसार करना चाहिए। आपदा प्रबंधन के विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल होना आवश्यक है। मॉक ड्रिल का आयोजन नियमित अंतराल पर करना चाहिए। अवैध निर्माण पर तत्काल व सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। - लता अग्रवाल, चित्तौड़

बचाव उपकरण उपलब्ध करवाएं
निर्माणाधीन स्थलों पर मजबूत बैरिकेडिंग, एंटी-फॉग लाइट्स और स्मार्ट चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य होना चाहिए। इसके साथ ही समय-समय पर इन स्थलों का ऑडिट होना जरूरी है। इस मामले में देरी इसलिए हुई क्योंकि मौके पर मौजूद कर्मियों को ठंडे पानी से डर था या तैरना नहीं आता था। इसलिए आपदा प्रबंधन दल के पास सभी प्रकार के बचाव उपकरण अनिवार्य होने चाहिए। इंजीनियरों, ठेकेदारों और अधिकारियों को केवल निलंबित नहीं, बल्कि आजीवन ब्लैकलिस्ट व टर्मिनेट करके ऐसे कुछ उदाहरण प्रस्तुत करने होंगे तभी एक अनुशासित और जवाबदेही प्रबंधन की कल्पना की जा सकती है। - ईश्वर लाल धाकड़, जयपुर