
अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में रविवार रात दुनिया ने भारतीय क्रिकेट की जो चमक देखी, वह यकायक नहीं थी। यकायक चमक ऐसी होती भी नहीं है, क्योंकि वह फुर्र से आती है और फुर्र से ही आंखों से ओझल हो जाती है। यह चमक तो रोशनी का वह पुंज था, जो सदा से जगमगा रहा था। इसका प्रकाश कभी संदिग्ध या क्षणिक नहीं था। चिरस्थायी नहीं तो दीर्घकालिक तो जरूर था और यह हमारी टीम को विश्व चैंपियन बनाने के लिए काफी था। टीम को विश्व विजेता बनने के लिए जिन भी कारकों की दरकार होती है, वे सब भारत में निहित थे। टीम हर दृष्टिकोण से सक्षम थी।
बल्लेबाजी की लंबी शृंखला और जीनियस, जेम्स, मिरेकल कहे जाने वाले जसप्रीत बुमराह से युक्त गेंदबाजी भारत को पूरी तरह संतुलित बनाए हुए थी। इसका सबसे मजबूत पहलू सभी खिलाडिय़ों की मानसिक दृढ़ता था, जो किसी भी क्षेत्र में श्रेष्ठता कायम करने के लिए जरूरी होती है। सभी खिलाड़ी हर दिन, हर घंटे, हर मिनट नहीं- हर पल खुद को चैंपियन से नीचे देखते ही नहीं थे। इतना सब होने के बाद कुछ बाकी रहता है तो वह है अभ्यास, आपसी समझबूझ, तालमेल और सभी का एक दूसरे पर पूर्ण विश्वास। भारत इस पहलू से भी श्रेष्ठतम रहा। सही मायनों में यह टीम का सर्वोत्तम पहलू था। दो साल पहले वर्ष 2024 में विश्व कप जीतने के बाद से ही टीम इस बार के टूर्नामेंट की तैयारियों में लग गई थी। इस अरसे में टीम ने इतने वेरिएशन आजमा लिए कि किसी भी तरह की परिस्थिति उसके लिए अपरिचित नहीं रही।
हर परिस्थिति में समग्र तौर पर टीम का प्रदर्शन ऊंचा बनाए रखने में इसने महारत हासिल कर ली। इसी बूते भारत निर्विवाद रूप से चैंपियन बनकर सामने आया। पूरे टूर्नामेंट में भारत केवल एक बार परेशानी में आया, जब सुपर एट के ग्रुप मैच में दक्षिण अफ्रीका ने उसे शिकस्त दी। लेकिन इसके बाद जो उसका विजय रथ चला तो वह खिताब पर ही आकर रुका। भारत की इस जीत ने कई मिथक भी तोड़े और कई रिकॉर्ड भी कायम किए। मिथक यह था कि इससे पहले किसी देश ने लगातार दो बार यह खिताब नहीं जीता था। वह अपने ही देश में चैंपियन बनने और तीसरी बार ताज सिर पर धारण करने वाला पहला देश भी बना।
इस कामयाबी को समूची भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम काल के रूप में निरूपित करना भी अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं होगा। एक दिवसीय क्रिकेट में भारत उप विजेता है। पिछली बार भारत फाइनल में नहीं आ सका था, अन्यथा उससे पहले लगातार दो बार टेस्ट क्रिकेट की विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में भी उसकी दस्तक रही। कहने का अर्थ है कि क्रिकेट का कोई भी प्रारूप हो, भारत एक दमखम वाले देश के रूप में ही देखा जाता है। भारत इस समय जूनियर विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट का चैंपियन भी है। इसके साथ ही भारत वर्तमान में महिला क्रिकेट विश्व कप का सिरमौर भी है। इस प्रकार आइसीसी की तीन प्रतिष्ठित ट्रॉफियां इस समय भारत के पास हैं। इसमें कोई शक नहीं कि यह सिलसिला निरंतर जारी रहेगा।
Updated on:
10 Mar 2026 01:36 pm
Published on:
10 Mar 2026 01:30 pm
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