
रेडियो की दुनिया आवाज की दुनिया है।
प्रयाग पाण्डे - स्वतंत्र लेखक एवं स्तंभकार,
आज से करीब 120 साल पहले रेडियो का आविष्कार हुआ था। रेडियो के आविष्कार ने वैश्विक संचार में अभूतपूर्व क्रांति ला दी थी। भारत में आवाज की इस अनोखी दुनिया को 103 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। पिछली करीब एक सदी की शानदार यात्रा में रेडियो, भारत के जन-जन के जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। नई संचार तकनीकी के अभ्युदय से पहले रेडियो ने भरोसेमंद जनसंचार के एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
1923 में रेडियो क्लब, मुंबई ने भारत में रेडियो का पहला प्रसारण शुरू किया। इसी वर्ष कोलकाता समेत अन्य महानगरों में भी रेडियो प्रसारण शुरू हुए। इसके बाद भारत में इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी का गठन हुआ। कंपनी ने भारत सरकार से रेडियो प्रसारण का अनुज्ञा-पत्र प्राप्त कर 23 जुलाई, 1927 को मुंबई से रेडियो प्रसारण प्रारंभ कर दिया। इस प्रसारण केंद्र का उद्घाटन भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन ने किया था। 1936 में दिल्ली में रेडियो के केंद्रीय स्टेशन की स्थापना हुई। इसी वर्ष इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन वजूद में आई। 1936 में इसका नाम ऑल इंडिया रेडियो कर दिया गया था। 1957 में आकाशवाणी।
रेडियो की दुनिया आवाज की दुनिया है। इसका अद्भुत और आकर्षक संसार है। अपना सम्मोहन है। रेडियो की आवाज की सम्मोहक दुनिया श्रोताओं को पलक झपकते ही संपूर्ण ब्रह्मांड का विचरण करा देती है। रेडियो की इसी विशेषता ने रेडियो के 'दीवानों' की एक लंबी परंपरा कायम की है। शुरुआती दिनों में हेडफोन लगाकर रेडियो सुना जाता था। कालांतर में बड़े रेडियो आए, जिन्हें सामूहिक रूप से सुना जाता था। 1947 में विलियम शॉकली, बाल्टर ब्रैटेन और जॉन बार्डिन नाम के तीन अमरीकी वैज्ञानिकों ने ट्रांजिस्टर का आविष्कार किया।
ट्रांजिस्टर के आविष्कार से रेडियो की दुनिया में क्रांति आ गई। रेडियो सुनना सामूहिक से निजी हो गया। तब जहां सड़क, बिजली और यातायात के साधन नहीं थे, उन दूरस्थ क्षेत्रों में भी ट्रांजिस्टर पहुंच गया। पहुंच, निरंतरता, सुलभता और सस्ती तकनीक के कारण रेडियो सूचना, शिक्षा और मनोरंजन का लोकप्रिय जनसंचार माध्यम बन गया। रेडियो सर्वसुलभ एवं सस्ता जनसंचार माध्यम है। साक्षर और निरक्षर सभी के लिए उपयोगी है। दृष्टिहीनों के लिए वरदान है। रेडियो के लिए भौगोलिक सीमाएं कोई बाधा उत्पन्न नहीं करती हैं। दूरदराज के क्षेत्रों और गांवों में, जहां जनसंचार के अन्य माध्यमों की पहुंच नहीं है, वहां के लिए रेडियो ज्ञान का प्रवेश द्वार है।
1990 के दशक में इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्र में आई क्रांति ने संचार क्रांति को जन्म दिया है। उपग्रहों और अनेक प्रकार के अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से जनसंचार माध्यमों की शक्ति और विस्तार को अकल्पनीय ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। अब तो समस्त जानकारियां एक छोटे-से मोबाइल में समा गई हैं। संचार क्रांति के मौजूदा दौर में भी रेडियो की प्रासंगिकता बनी हुई है। कम्युनिटी रेडियो आ गए हैं। सैकड़ों खबरिया चैनलों के आ जाने के बावजूद रेडियो सूचना, शिक्षा और मनोरंजन का लोकप्रिय माध्यम है।
Published on:
13 Feb 2026 05:36 pm
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