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आपकी बात: युवाओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरुक करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते है?

पाठकों ने इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दी हैं, प्रस्तुत है पाठकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

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जयपुर

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Opinion Desk

Jan 08, 2026

सड़क सुरक्षा शिक्षा अनिवार्य करें
बहुआयामी और व्यावहारिक कदम उठाना जरूरी है, ताकि जागरूकता केवल जानकारी तक सीमित न रहे बल्कि व्यवहार में भी उतरे। स्कूल–कॉलेज के पाठ्यक्रम में सड़क सुरक्षा और यातायात नियम अनिवार्य किए जाएं। हेलमेट, सीट बेल्ट, स्पीड और मोबाइल उपयोग के प्रभाव को लाइव डेमो से समझाया जाए। ट्रैफिक पुलिस के साथ इंटरेक्टिव सेशन हों। नियम तोड़ने पर सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई हो। कानून और प्रवर्तन को दृढ़ करना पड़ेगा। शिक्षा, तकनीक, कानून और सामाजिक सहभागिता एक साथ काम करें। - डाॅ.मुकेश भटनागर, भिलाई

नियमों के प्रति जागरूक करें
व्यवहार में बदलाव से ही चिंतन में बदलाव आता है, यही बदलाव नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करता है। सीट बेल्ट लगाने में एक सेल्फी लेने से भी कम समय लगता है, लेकिन आज की युवा पीढ़ी लापरवाह है। उन्हें सड़क सुरक्षा के नियमों को पालन करने के लिए प्रेरित करना, जागरूक करना और प्रशिक्षित करना एक बहुत बड़ी चुनौती है। सड़क सुरक्षा एवं यातायात जागरूकता कार्यक्रमों में युवाओं, स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। - डॉ. प्रेमराज मीना, करौली

विद्यार्थियों को वाहन न दें
सड़क सुरक्षा के प्रति युवाओं को जागरूक करने के लिए स्कूलों व कॉलेजों में सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। जागरूकता पोस्टर भी लगाए जाने चाहिए। सड़क सुरक्षा से संबंधित निर्देशों का पालन नहीं करने पर चालान भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए। स्कूलों व कॉलेजों में बिना लाइसेंस व बिना हेलमेट विद्यार्थियों को वाहन लाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। सरकार, शिक्षक, पेरेंट्स और युवा अपनी और दूसरों की जिंदगी का ख्याल रखते हुए सड़क सुरक्षा पर ध्यान देंगे तो निःसंदेह युवा सड़क सुरक्षा का पालन करेंगे। - आजाद पूरण सिंह, जयपुर

नियमों की जानकारी होने पर लाइसेंस जारी करें
युवाओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूल-कॉलेजों में नियमित रूप से प्रशिक्षण और यातायात नियमों पर कार्यशालाएं चलाई जाएं। सोशल मीडिया का उपयोग करके हेलमेट-सीट बेल्ट अनिवार्यता का प्रचार, रियल-लाइफ हादसों पर आधारित वीडियो चलाकर प्रयास किए जा सकते हैं। ड्राइविंग लाइसेंस से पहले काउंसलिंग और यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त दंड जरूरी हैं। जागरूक युवाओं को साथ लेकर जागरूकता रैलियां व प्रतियोगिताएं भी कराई जा सकती हैं। - कुशाग्र स्वामी, झालावाड़

परिवहन विभाग कार्यशालाएं आयोजित करें
युवाओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए सड़क एवं परिवहन विभाग को समय-समय पर माध्यमिक विद्यालयों व कॉलेज में तथा ऐसी कंपनियों में कार्यशालाएं आयोजित करनी चाहिए जहां युवा वर्ग काम करता है। वहां उन्हें सड़क हादसों से होने वाले नुकसान के बारे में अवगत कराया जाए। केवल सड़क सुरक्षा नियम ही नहीं दुर्घटना से पहले होने वाले खतरे को पहचानना और आपात स्थिति में अपना बचाव कैसे किया जाए यह भी सिखाया जाए। अगर प्राथमिक विद्यालय के स्तर से ही इस विषय को पाठ्यक्रमों से जोड़ दिया जाए तो आगे चलकर वे सतर्क और सावधान रहेंगे। हर चौराहे पर यातायात कर्मी नियुक्त नहीं होता है, ग्रीन व रेड लाइट पर ध्यान देकर गाड़ी आगे बढ़ाएं। स्थानीय प्रभावशाली युवाओं को इसके लिए प्रशिक्षण देकर अभियान को आगे बढ़ाने के लिए जागरूक किया जाए। ऑडियो वीडियो के माध्यम से ऑनलाइन कार्यशालाएं भी आयोजित की जा सकती है। सड़क सुरक्षा से संबंधित विषय पर अभिभावक भी उनको सचेत करते रहें। सबसे बड़ी बात निजी स्तर पर युवाओं को अपनी निजी व सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति सडक सुरक्षा की पालना सुनिश्चित करनी होगी। - लता अग्रवाल चित्तौड़गढ़।

भावनात्मक शिक्षा दी जाए
बच्चे की प्रथम गुरु उसकी मां और प्रथम विद्यालय उसका घर होता है, ठीक इसी तरह युवाओं को भी सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए सर्वप्रथम उसे घर से ही नसीहत देने की आवश्यकता है। घर से बाहर वाहन ले कर जाने से पहले यातायात नियमो की जानकारी जब भावनात्मक रूप से किसी भी युवा को दी जाए तो हादसों में कमी लाई जा सकती है। इसके साथ-साथ सरकारी स्तर पर भी समय-समय पर जागरूकता अभियान चला कर युवाओ को जागरूक करना चाहिए। - शंकर गिरि, हनुमानगढ़

दोस्त एक दूसरे को समझाएं
परिवार के लोग अपने बच्चों को पाबंद करें और उनको समझाएं कि उनकी जान अनमोल है। युवाओं के साथ जो भी दोस्त होते वो भी एक दूसरे को सड़क हादसों से बचने के लिए प्रेरित करें कि हमारी एक लापरवाही परिवार को खत्म कर सकती है। प्रशासन को भी सड़क नियमों का पालन करने के लिए युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से प्रेरित करना चाहिए। - चंद्रशेखर प्रजापत, जोधपुर

सोशल मीडिया से जागरूकता फैलाएं
युवाओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। यातायात नियमों की जानकारी को रोचक वीडियो, पोस्टर और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से फैलाया जा सकता है। हेलमेट और सीट बेल्ट के महत्त्व को एनीमेशन वीडियो के जरिए समझाया जाना चाहिए। ड्राइविंग लाइसेंस से पहले अनिवार्य सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण देना चाहिेए। इसके साथ ही जागरूक युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनकर नियमों का पालन करने के लिए लोगों को प्रेरित करना चाहिए। - कृष्णकुमार खीचड़, जोधपुर

नियमों का पालन करना सिखाए
सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में नियमों का पालन करना सिखाना चाहिए। हेलमेट और सीट बेल्ट पहनना, वाहन चलाते समय या पैदल चलते समय फोन का इस्तेमाल नहीं करना, शराब या नशे में ड्राइविंग के गंभीर परिणाम के बारे में अवगत कराना, तेज गति से वाहन चलाने के खतरों के बारे में समझाना, सड़क पार करने के लिए जेब्रा क्रॉसिंग और फुटपाथ का इस्तेमाल करना सिखाना चाहिए। युवाओं को सड़क सुरक्षा कानून के बारे में पूर्ण जानकारी सोशल मीडिया, अखबार और माता-पिता द्वारा भी दी जानी चाहिए। इस तरह वह खुद भी सुरक्षित रहे और दूसरों को भी सुरक्षित रख सकें। युवाओं को जब जिम्मेदारी और जीवन का मूल्य समझाया जाएगा तभी जाकर सड़क सुरक्षा एक आदत बनेगी। - मोदिता सनाढ्य, उदयपुर

जल्दबाजी करने से बचें
देश में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, वहीं सड़क दुर्घटनाएं गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। इन हादसों में सबसे अधिक युवा जान गंवा रहे हैं, जिनके प्रमुख कारण ओवरस्पीड, लापरवाही से वाहन चलाना और नशे में ड्राइविंग करना है। सरकारें समय-समय पर प्रयास करती हैं, लेकिन जनजागरूकता के बिना ये प्रयास सफल नहीं हो सकते। सड़क सुरक्षा के लिए परिवहन विभाग को लाइसेंसधारी चालकों की अनिवार्य बेसिक ट्रेनिंग सुनिश्चित करनी चाहिए। कई बार हादसे खराब सड़क के कारण होते हैं इसलिए सड़कों की नियमित निगरानी करनी चाहिए। - राकेश विश्नोई, बाड़मेर

व्यवहारिक प्रशिक्षण दें
यातायात नियमों की पालना करने के लिए युवाओं को प्रेरित करना ही एकमात्र उपाय है। स्कूलों में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाए जैसे कि जेब्रा क्रॉसिंग पर चलना, हेलमेट/सीट बेल्ट का उपयोग अनिवार्य करना, शराब पीकर वाहन न चलाने पर जोर देना, मोबाइल फोन से दूरी, ओवर स्पीड से परहेज करना। सड़क सुरक्षा मित्र जैसे कार्यक्रमों से युवाओं को जोड़ने तथा समय-समय पर यातायात पुलिस द्वारा सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाने की बातें युवाओं को सुरक्षित ड्राइविंग के प्रति जागरूक कर सकेंगी। वहीं दुर्घटनाओं में कमी लाने में मददगार बन सकेंगी। - शिवजी लाल मीना, जयपुर