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आपकी बात: गंभीर बीमारी में डिप्रेशन न हो, इसके लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं?

पाठकों ने इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दी हैं, प्रस्तुत है पाठकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

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जयपुर

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Opinion Desk

Jan 13, 2026

पारिवारिक माहौल सकारात्मक रहे
गंभीर बीमारी के समय मानसिक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। परिवार का सहयोग, सहानुभूति और सकारात्मक माहौल मरीज को टूटने से बचाता है। बीमारी और इलाज की सही जानकारी भय कम करती है। जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग और मानसिक परामर्श उपलब्ध होना चाहिए। योग, ध्यान और आशा भरा संवाद मरीज को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखते हैं। - राकेश खुडिया, श्रीगंगानगर

रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रखें
गंभीर बीमारी मरीज पर दोहरा प्रहार करती है बीमारी की गंभीरता, इलाज का लंबा समय और आर्थिक बोझ मरीज को अवसाद की ओर धकेल देते हैं। इससे बचने के लिए सबसे अहम भूमिका पारिवारिक संबल की है। मरीज के साथ समानुभूति रखें। उनसे बीमारी की चर्चा करने के बजाय, सामान्य विषयों पर बात करें ताकि उन्हें यह महसूस न हो कि वे बोझ हैं। अकेलापन अवसाद का सबसे बड़ा कारण है, इसलिए निरंतर संवाद जरूरी है। चिकित्सा प्रणाली में मनोवैज्ञानिक परामर्श अनिवार्य होना चाहिए। इलाज के साथ-साथ मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स की मदद लेने से मरीज के मन में बैठे मृत्यु या अक्षमता के डर को निकाला जा सकता है। जब मस्तिष्क रचनात्मक कार्यों में व्यस्त होता है तो नकारात्मक विचारों के लिए जगह नहीं बचती। दवा बीमारी को ठीक करती है, लेकिन जीने की जिजीविषा और अपनों का साथ ही मरीज को डिप्रेशन से बचा सकता है। - राजेन्द्र कुमार जांगिड़, बालोतरा

सकारात्मक लोगों से मिलते रहें
गंभीर बीमारी होने पर रोगी को कभी भी अकेला न छोड़े और उसके सामने सकारात्मक विचारों को ही प्रकट करें, ताकि डिप्रेसन उस रोगी पर हावी न हो सके। गंभीर बीमारियों से मुक्त होने वालों के विडियो दिखाएं जिसमे हिम्मत न हार कर बीमारी को हराया हो। इसके साथ-साथ आध्यात्मिक विचारों के साथ रोगी से बातचीत करें, इससे मन शांत होगा और तनाव से मुक्ति मिलेगी। - शंकर गिरि, हनुमानगढ़

रोगी के साथ समय व्यतीत करें
गंभीर बीमारी के दौरान डिप्रेशन से बचने के लिए मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक सहयोग बहुत आवश्यक है। नियमित रूप से डॉक्टर से संवाद, परिवार-मित्रों का सकारात्मक साथ, दिनचर्या में हल्की गतिविधियां, ध्यान-योग व प्राणायाम अपनाना, आशावादी सोच विकसित करना तथा मन की बात किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करना सहायक होता है। आवश्यकता पड़ने पर काउंसलिंग लेना भी बेहद उपयोगी है। - निकिता शर्मा, झालावाड़

रोगी को बीमारी के बारे में न पूछें
यदि कोई व्यक्ति गंभीर बीमारी से ग्रसित है तो उसे बार-बार बीमारी की याद न दिलाएं। क्योंकि बीमार व्यक्ति के यह बात दिमाग में बैठ जाती है और वह डिप्रेशन में जाने लगता है। रोगी को डिप्रेशन से निकालने के लिए गंभीर बीमारी के विषय में यह कहें कि यह बीमारी कुछ भी नहीं है इससे आप जल्दी ही ठीक हो जाओगें। रोगी का हाल-चाल भी उसके घर वालों से ही पूछा जाए। इससे ही गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को डिप्रेशन से बचाया जा सकता है। - कैलाश चन्द्र मोदी, सादुलपुर

सकारात्मक गतिविधियों में शामिल करें
रोगी को गंभीर बीमारियों में डिप्रेशन न हो इसके लिए उसकी दिनचर्या में बदलाव करना होगा। इसके लिए उसे अकेले नहीं छोड़ना, उसके सामने नकारात्मक बात नहीं करनी चाहिए। समय-समय पर कुछ न कुछ शारिरिक, मनोरंजक, मोटिवेशनल गतिविधियां करवाएं। संगीत भी एक दवा का काम करती है और अन्य गतिविधियों में भी उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने से उन्हें डिप्रेशन से बचा सकते हैं। - चंद्रशेखर प्रजापत, जोधपुर

किताबों के साथ समय बिताएं
गंभीर बीमारी में डिप्रेशन ना हो इसके लिए मरीज के साथ बातचीत लगातार रखनी चाहिए। मेडिटेशन और योग से मदद के अलावा पॉजिटिव सोच लाने का प्रयास करना चाहिए। सकारात्मक विचारों और अच्छी कहानियों की किताबों को पढ़ना चाहिए। इसके साथ रोगी स्वयं अपने आप को मनपसंद कामों में व्यस्त रखें। - गजाला परवीन, जयपुर

बीमारी ठीक होने का अहसास दिलाएं
गंभीर बीमारी में मरीज को डिप्रेशन से बचाने के लिए परिजनों का सहानुभूति पूर्ण व्यवहार एवं हिम्मत रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। हमेशा सकारात्मक विचारों के साथ प्रेरित करते रहना, रोगी के साथ रहना, उसे अकेले नहीं छोड़ना, बीमारी जल्द ठीक हो जाएगी इसका अहसास दिलाते रहना चाहिए। मरीज को हमेशा सकारात्मक वातावरण में एवं ईश्वर से जोड़े रखें। इस तरह के प्रयास रोगी को डिप्रेशन में जाने से बचाएगें। - शोभा जोशी, भोपाल

वर्तमान में जीने की आदत डालें
गंभीर बीमारी के दौरान मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है लेकिन सकारात्मक नजरिया अपनाकर इसे प्रबंधित किया जा सकता है। अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें अपनों या किसी विशेषज्ञ के साथ साझा करना बहुत जरूरी है। छोटे और प्राप्त करने योग्य लक्ष्य तय करने से मन में उपलब्धि का भाव बना रहता है। इसके साथ ही योग, ध्यान या व्यायाम तनाव को कम करने में काफी मददगार साबित होते हैं। अपनी पसंदीदा गतिविधियों में व्यस्त रहकर वर्तमान में जीने का प्रयास भी तनाव से निजात में मददगार है। - अमृतलाल मारू, इंदौर

प्रकृति से जुड़ाव जरूरी है
गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग शारीरिक तौर पर तो परेशान होते हैं इसके कारण वे मानसिक रूप से भी अवसाद में चले जाते हैं।इसके लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं जैसे अस्पताल के वेटिंग एरिया एवं एंट्रेंस में कुछ उत्साहवर्धक कोट्स एवं चित्रकारी की जा सकती हैं जो कि निश्चित तौर पर मददगार साबित होगी। साथ ही इन व्यक्तियों को संगीत, अध्यात्म से जुड़ाव, प्रकृति से जुड़ाव भी मानसिक अवसाद से उबारने में सहायक है। सबसे जरूरी तथ्य उनके अपनों का साथ, प्रेम व्यवहार एवं देखभाल उनकी शारीरिक एवं मानसिक दोनों स्थितियों को सुधारने में सबसे ज्यादा असरकारक है। - शिवानी विश्वकर्मा, नरसिंहपुर