
जयपुर. स्वच्छ सर्वेक्षण-2025 12500 अंकों का होगा। इसके लिए जयपुर की शहरी सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि, इस बार सर्वेक्षण की टूलकिट में बड़ा बदलाव किया गया है। अब नगर निगम के कागजी दावों से ज्यादा जमीनी हकीकत पर अंक मिलेंगे। निगम को सर्वाधिक फोकस दिखने वाली सफाई (विजिबल क्लीननेस) पर करना होगा। कुल अंकों में से 10500 अंक तो सिटीजन फीडबैक को शामिल करते हुए जमीनी मूल्यांकन के हैं। यानी शहर कितना साफ नजर आता है, यह सीधे रैंकिंग तय करेगा।
ये राह आसान नहीं
शहर में नई टूल किट के हिसाब से काम करना आसान नहीं है। विजिबल क्लीननेस पर अत्यधिक काम करने की जरूरत है। शाम को मुख्य बाजारों की सड़कों पर कचरे के ढेर लग जाते हैं। उनको उठाने के लिए निगम अगले दिन दोपहर तक मशक्कत करता है। इसके लिए डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और मैकेनाइज्ड स्वीपिंग भी दावों के अनुरूप नजर नहीं आती है। प्रमुख सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में फैली गंदगी अब भी सवाल खड़े करती है।
1000 अंकों का इस बार यूज्ड वाटर मैनेजमेंट को भी अहम पैरामीटर बनाया गया है। जयपुर में सीवरेज ट्रीटमेंट और ट्रीटेड वॉटर के पुन: उपयोग को लेकर स्थिति संतोषजनक नहीं मानी जा रही। बड़े पार्कों में जरूर एसटीपी के पानी से सिंचाई की जा रही है। द्रव्यवती नदी के किनारे लगे 5 एसटीपी के पानी का कोई उपयोग नहीं हो रहा है।
यहां जाएंगी टीम
-आवासीय और व्यावसायिक इलाके
-कच्ची बस्ती
-स्कूल
-वेंडर जोन
-पार्क में वेस्ट टू वंडर
-पर्यटन स्थल
-आरआरआर सेंटर
-पब्लिक टॉयलेट
नागरिक खुश तो बढ़ेगी रैंकिंग
सिटीजन फीडबैक के लिए 1000 अंक तय किए गए हैं। नागरिकों की संतुष्टि इस बार सीधे रैंकिंग तय करेगी। निगम की शिकायत निवारण व्यवस्था पर आमजन की नाराजगी पहले भी सामने आती रही है। समय पर समाधान नहीं होने की स्थिति में इसका असर सर्वेक्षण के अंकों पर पड़ सकता है।यहां बुरा हालसर्वेक्षण के दौरान परकोटा क्षेत्र, प्रमुख बाजार, पर्यटन स्थल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, स्लम एरिया और नई कॉलोनियां सभी जगह टीम जाएगी। अब तक निगम ने यहां पर कोई खास तैयारी नहीं की है।
यहां पर काम करने की जरूरत-विजिबल क्लीननेस
प्रमुख सड़कों पर मिट्टी, खुले कचरा पॉइंट और सेकेंडरी डंपिंग स्पॉट अब भी नजर आ रहे हैं। जबकि, निगम डोर टू डोर कचरा संग्रहण 100 फीसदी का दावा करता है। इसके बावजूद कचरा सड़कों पर आ रहा है।-कचरा पृथक्करण: शहर के बड़े हिस्से में हूपर तो जा रहे हैं, लेकिन कचरा अलग-अलग नहीं लिया जा रहा है। पूरे शहर में बमुश्किल पांच फीसदी क्षेत्र में कचरा संग्रहण अलग-अलग किया जा रहा है।-कॉलोनियों की सफाई: बाहरी और नई कॉलोनियों में नियमित सफाई नहीं हो रही है। सफाईकर्मियों की पर्याप्त संख्या न होना भी एक समस्या है। कई कॉलोनियों में तो एक माह में एक बार भी झाडू नहीं लग पाती।
Published on:
12 Jan 2026 02:05 pm

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