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छिंदवाड़ा. वाहनों के दस्तावेजों में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र भी अनिवार्य है लेकिन इसके बनाने को लेकर काफी लंबे समय से फर्जीवाड़ा चल रहा है। वाहनों की बिना जांच के ही आसानी से पीयूसी प्रमाण पत्र शहर व आरटीओ कार्यालय में मिल जाता है। आरटीओ कार्यालय के एजेंट आसानी से पीयूसी प्रमाण पत्र उपलब्ध करा देते है। नियमों की बात की जाए तो वाहनों की जांच मशीन से होनी चाहिए लेकिन वर्तमान में मोबाइल नंबर, गाड़ी का नंबर तथा ओटीपी से दो पहिया व चार पहिया वाहनों के पीयूसी प्रमाण पत्र आसानी से बन जाते है। परासिया मार्ग पर ऐसी ही एक पीयूसी की दुकान सजी है जहां पर कुछ जानकारी व पैसे देने पर यह प्रमाण पत्र उपलब्ध हो जाता है।
प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र के बनने व उसमें चल रहे फर्जीवाड़े को जानने के लिए पत्रिका टीम ने परासिया मार्ग स्थित पुरानी आरटीओ के समीप एक पीयूसी सेंटर को खंगाला है। यह पीयूसी सेंटर सडक़ किनारे खड़े कंडम वाहन में संचालित हो रहा था। जानकारी जुटाने पर पता चला कि चार पहिया का पीयूसी प्रमाण पत्र 250 रूपए में छह माह तथा 500 रुपए में एक वर्ष के लिए बन जाएगा। पैसे देने के साथ ही मोबाइल नंबर, ओटीपी तथा गाड़ी की फोटो भर लगेगी। जिसके बाद पीयूसी सेंटर संचालित करने वाले व्यक्ति ने कहा कि वाहन का नंबर भर दे दीजिए तो प्रमाण पत्र बन जाएगा।
शासन ने वाहनों को पीयूसी प्रमाण पत्र अनिवार्य किया है जिससे वाहनों की स्थिति की जानकारी लग जाएगी कि कहीं वाहन तय मापदंड से ज्यादा प्रदूषण तो नहीं छोड़ रही है। मशीन से जांच करने पर जानकारी सामने आएगी जिसके बाद वाहन स्वामी अपने वाहन की मरम्मत कराएगा जिसके बाद प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। वर्तमान में जो प्रदूषण वाहनों से हो रहा है उसकी जांच ही नहीं हो पा रही है।
वाहनों की जांच के बिना ही पीयूसी प्रमाण पत्र आसानी से मिल जाता है, वर्तमान में पीयूसी प्रमाण पत्र वाहन स्वामी सिर्फ इसलिए लेते है कि वह महाराष्ट्र जाते है तो वहां पर प्रमाण पत्र मांगा जाता है। महराष्ट्र नहीं जाने वाले वाहन स्वामी तो प्रमाण पत्र लेना जरूरी भी नहीं समझते है। शासन ने सभी पेट्रोल पंपों पर पीयूसी सेंटर अनिवार्य किया है जिसको लेकर परिवहन विभाग अनुमति तो दे रहा है लेकिन सेंटर स्थापित करने की कार्ययोजना ठंडे बस्ते में है।
पीयूसी प्रमाण पत्र बनाने में अगर वाहनों की जांच के बिना ही प्रमाण पत्र दिया जा रहा है तो वह बिल्कुल गलत है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी।
अनुराग शुक्ला, एआरटीओ, छिंदवाड़ा।
Published on:
10 Feb 2026 12:08 pm
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