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पेपर पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया होगी डिजिटल, विद्यार्थियों को मोबाइल पर उपलब्ध हो जाएगी उत्तरपुस्तिका

एक माह बाद से पीजी के 10 हजार विद्यार्थियों को तथा साल वर्ष में सभी 90 हजार विद्यार्थियों को मिल जाएगी सुविधा, राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय ने बनाई कार्ययोजना

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राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय

राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय

छिंदवाड़ा. परीक्षा देने के बाद विद्यार्थी को लगता था कि उसे नंबर कम मिले है जिसके लिए वह पेपर पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करता था जिसके लिए उसे काफी लंबी प्रकिया से गुजरना होता था। इस प्रकिया को राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय ने बहुत की आसान करने पर कार्य करना शुरू कर दिया है। पेपर पुनर्मूल्यांकन की प्रकिया को पूर्णत: डिजीटल करने पर कार्य किया जा रहा है जिसमें ऑनलाइन आवेदन करने के बाद विद्यार्थी को उसके मोबाइल पर ही उत्तरपुस्तिका उपलब्ध हो जाएगी। विश्वविद्यालय एक माह के भीतर अपने कार्यक्षेत्र में आने वाले कॉलेजों के पीजी पाठ्यक्रम के 10 हजार विद्यार्थियों के लिए यह सुविधा उपलब्ध कराएगा तथा आने वाले एक वर्ष के भीतर सभी 90 हजार विद्यार्थियों को यह सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। जिसका फायदा छिंदवाड़ा के साथ ही सिवनी व बालाघाट जिले के विद्यार्थियों को मिलेगा।

उत्तरपुस्तिका की जांच ऑनलाइन, शिक्षकों को प्रशिक्षण

पुनर्मूल्यांकन की प्रकिया डिजीटल करने से पहले विश्वविद्यालय ने उत्तरपुस्तिका की जांच को ऑनलाइन किया है जिसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है। इस प्रकिया के बाद वहीं ऑनलाइन फाइल विद्यार्थियों के पुनर्मूल्यांकन के आवेदन पर उनके मोबाइल पर भेज दी जाएगी। धीरें-धीरें सभी शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा एक वर्ष में इस प्रक्रिया को पीजी पाठ्यक्रम के बाद सभी विद्यार्थियों को उपलब्ध करा दी जाएगी।

क्या फायदा होगा इस सुविधा से

इस डिजीटल प्रकिया से मूल्यांकन जल्दी होगा, आवेदन करने पर तत्काल बाद विद्यार्थियों को यह मोबाइल पर उपलब्ध करा दी जाएगी। पूर्व की तरह इस बार उत्तरपुस्तिका के बंडल नहीं खोलने पड़ेंगे। पारदर्शिता बढ़ेगी जिससे किसी भी तरह के सवाल प्रबंधन पर खड़े नहीं हो पाएंगे। पूरी प्रकिया डिजीटल होने से समय के साथ ही अतिरिक्त शुल्क से भी विद्यार्थी बचेंगे।

इनका कहना है।

मोबाइल ऐप के माध्यम से परीक्षा फार्म भरने की प्रकिया चार फरवरी से शुरू हो गई है वहीं पेपर पुनर्मूल्यांकन की प्रकिया भी एक माह बाद से शुरू हो जाएगी। पहले पीजी के विद्यार्थियों के लिए यह सुविधा होगी, फिर साल भर में सभी विद्यार्थियों के लिए यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। उत्तरपुस्किा के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के बाद कुछ देर बाद ही मोबाइल पर ही जांची हुई उत्तरपुस्तिका पहुंच जाएगी।

प्रो. इंद्र प्रसाद त्रिपाठी, कुलगुरू, राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय, छिंदवाड़ा।