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सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, अतिथियों ने छात्रों को दी सफलता की शुभकामनाएं

पीएम श्री शासकीय रवींद्र उमावि माकड़ौन का वार्षिकोत्सव संपन्न

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पीएम श्री शासकीय रवींद्र उमावि माकड़ौन का वार्षिकोत्सव संपन्न

माकड़ौन. पीएम श्री शासकीय रविंद्र उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव शुक्रवार को गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समापन समारोह में शिक्षा विभाग के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षाविदों की उपस्थिति रही। विद्यार्थियों की रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रेरक संदेशों के बीच आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।वार्षिकोत्सव के समापन समारोह के मुख्य अतिथि विकासखंड शिक्षा अधिकारी तराना तेज सिंह राठौड़ रहे। विशेष अतिथि के रूप में माकड़ौन तहसीलदार नवीन कुंभकार, जनभागीदारी समिति शासकीय महाविद्यालय माकड़ौन के सदस्य कृष्णपाल सिंह झाला, नगर परिषद उपाध्यक्ष करण सिंह गुर्जर, नमन सारस्तकीड़ा अधिकारी शासकीय महाविद्यालय माकड़ौन, श्रीधरकरमरकर संकुल प्राचार्य नांदेड़, कन्या उमावि माकड़ौन के प्राचार्य मोहन अंबोदीया तथा किशोर पवार उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पीएम श्री रविंद्र उमावि माकड़ौन के प्राचार्य एवं संकुल प्रभारी मनोहर नागर ने की।

मां शारदे पूजन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत

समारोह की शुरुआत अतिथियों द्वारा मां शारदे के पूजन-अर्चन से की गई। इसके पश्चात विद्यालय प्राचार्य मनोहर नागर ने अतिथियों का पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया। छात्र-छात्राओं ने नृत्य, नाटक और समूह प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए इसे उनके सर्वांगीण विकास का प्रतीक बताया।

अतिथियों ने विद्यार्थियों को दिया उज्ज्वल भविष्य का संदेश

मुख्य अतिथि तेज सिंह राठौड़ ने विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों और विद्यार्थियों के प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए बोर्ड परीक्षाओं में श्रेष्ठ परिणाम की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ता है। तहसीलदार नवीन कुंभकार ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सांस्कृतिक मंच से मिली सीख को वार्षिक परीक्षाओं में भी सफलता में बदलें। उन्होंने छात्रों से अनुशासन, परिश्रम और निरंतर अभ्यास को सफलता की कुंजी बताया। कार्यक्रम का समापन उत्साह और प्रेरणा के वातावरण में हुआ।

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